Hindustani Kranti

आर्यवृत, भारत, हिन्दुस्तान तथा सोने की चिड़िया आदि के नामों से विख्यात हमारा देश प्रगति पथ पर अग्रसर है | विश्व गुरु बनने के लिए बस कदम-दो-कदम ही दूर रह गया है; जिसकी पहचान देश की संस्कृति, सभ्यता, भाषा और यहाँ की कलाएँ हैं | भारत की सभ्यता अन्य देशों को अपनी ओर आकर्षित करती है, अमेरिका, जापान, चीन, कनाडा आदि देश हमारी संस्कृति तथा सभ्यता को जानने तथा इसे अपनाने के लिए आतुर हैं| ये सुनकर प्रत्येक भारतीय का सिर गर्व से ऊँचा हो जाता है | परन्तु दुर्भाग्य की बात है कि हमारी भारतीय युवा पीड़ी पश्चिमी सभ्यता की ओर आँखे बन्द करे दौड़ी चली जा रही है | पश्चिमी सभ्यता की चका चौंध इतनी बढ़ गयी है कि युवाओं को हित - अहित कुछ नही दिख रहा है | परन्तु भारत माँ अपने बच्चोँ को गर्त में जाते कैसे देख सकती है | उसकी करुण पुकार है ये "हिन्दुस्तानी क्रान्ति"
       हमारे पूर्वजों ने हमारे लिए अनेकों ज्ञान के भण्डार ( वेद, पुराण, उपनिषद् आदि ), उर्जा स्रोत छोड़ दिये थे जिन्हें सहज कर रखना हम युवाओं का उत्तरदायित्व है परन्तु वर्तमान पीढ़ी उन्हें सहजने की बात तो दूर उन्हें बिसरा बैठी है | प्राचीन उन सभी स्मृतियों को पुनः स्मरण करना और कराना ही है ये "हिन्दुस्तानी क्रान्ति" |
       
युवा पीढ़ी आधुनिकता के आवरण को ओढने में व्यस्त है; वह तो लगा है पश्चिमी सभ्यता के वस्त्रों को धारण करने में  युवक/युवतियाँ स्वयं को दर्पण में एक बार अवश्य देखें और स्वयं से प्रश्न पूछे कि क्या वास्तव में वे सुन्दर प्रतीत हो रहें है ? क्या यही हमारी वास्तविक सुन्दरता है ? और तुलना करे अपनी भारतीय सुन्दरता से | हाँ ऐसे ही लोगों को उनके वास्तविक चेहरे दिखाने के लिए दर्पण है ये  "हिन्दुस्तानी क्रान्ति" |
       महात्मा गाँधी, स्वामी विवेकानंद, स्वामी दयानन्द सरस्वती, गौतम बुध आदि महापुरुषों ने जो ज्ञान के पाठ पढ़ाए थे, जो सत्य के प्रयोग सिखाये थे , क्या हम उनका अनुसरण कर रहें हैं ? क्या हम उनका पालन कर रहें है ? ऐसे ही बहुत से प्रश्नों का उत्तर है ये "हिन्दुस्तानी क्रान्ति" |

 हिन्दुस्तानी क्रान्ति का एक मात्र उद्देश्य है --

➤ युवाओं लौटो भारत की ओर |
➤ पहचानों अपनी शक्ति को |
 सम्मान करो अपनी संस्कृति तथा सभ्यता का |


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