Sunday, March 15, 2020

पथ पर चलने को आतुर हूँ

पथ पर चलने को आतुर हूँ,
मन मे उठती यू आभा से, उत्पन्न घटित हर बाधा से,,,
यू तनिक नही घबराता हूँ, चलने बहने की नगरी मे उत्प्लव का शोर मचाता हूँ!
फिर भी नभ की हर बून्दो मे अन्त: के राग मे प्राचुर हूँ
पथ पर चलने को आतुर हूँ,
पथ पर चलने को आतुर हूँ,

वह शक्ति तुम्हारी जीवन की है ह्र्दय राग् मे लीन् प्रिये, मोती, सीपो कि क्या बिसात हम कंकड तक है बीन लिये,
किस आन्धी मे दिखलाऊ मै, कितने और राग् सुनाऊ मै!
लिख लिख कागज मे अब ऊब चुका , बस नभ मे लिखने को
प्राचुर हूँ,
पथ पर चलने को आतुर हूँ,
पथ पर चलने को आतुर हूँ,


path par chalne ko atur hun


कवि - शिवम् तिवारीshivam tiwari kavi
शहर - प्रयागराज
ईमेल - shivam9532096168@gmail.com
Share This
Previous Post
Next Post
Gaurav Hindustani

My name is Gaurav Hindustani. I am web designer by profession, but I am author by heart so Hindustani Kranti is a platform for all Authors and poets who write GOLDEN words and have special stories and poetries. You can send any time your words to me at gauravhindustani115@gmail.com.

0 comments: