Tuesday, January 7, 2020

आदि पुरुष | Protoplast meaning | Lord Krishna

नमस्ये पुरुषं त्वाद्यमीश्वरं प्रकृतेः परम |
अल्क्ष्यं सर्वभूतानामन्तर्बहिरवस्थितम ||


"श्रीमती कुंती ने कहा ;  मैं आपको नमस्कार करती हूं  क्योंकि आप आदि पुरुष हैं  और इस भौतिक जगत के गुणों से निसंग रहते हैं |  आप समस्त वस्तुओं के भीतर तथा बाहर स्थित रहते हुए भी सबों  द्वारा अलक्ष्य  हैं |"

श्रीमती कुंती देवी को यह भली-भांति ज्ञात था  की कृष्ण आदि भगवान हैं  भले ही पद रिश्ते में हुए उनके भतीजे लगते थे |  ऐसी प्रबुद्ध महिला अपने भतीजे को नमस्कार करने की गलती नहीं कर सकती थी |  इसलिए उन्होंने भौतिक जगत से परे आदि पुरुष के रूप में संबोधित किया |  यद्यपि सारे जी भी दिव्य हैं,  किंतु वे न  तो आदि जीव हैं न अच्युत हैं |  वे भौतिक  प्रकृति के चंगुल में आ कर नीचे गिर सकते हैं,  किंतु भगवान कभी नहीं गिरते |  इसीलिए वेदों में उन्हें समस्त जीवो में प्रधान कहा गया है (नित्यो नित्यानाम चेतानाश्चेतनानाम ) |  तत्पश्चात उन्हें ईश्वर या नियंता के रूप में संबोधित किया गया है |  चाहे जीव हो या सूर्य,  चंद्र जैसे देवता हों,  कुछ हद तक वे भी  ईश्वर हैं,  लेकिन इनमें से कोई भी परमेश्वर नहीं है |  कृष्णा परमेश्वर या परमात्मा है |   वे  अंतः तथा बाह्यं दोनों में विद्यमान रहते हैं  |  यद्यपि वे श्रीमती कुंती के समक्ष उनके भतीजे के रूप में उपस्थित थे किंतु वे उनके और अन्य सबों के अंतर में भी विद्यमान थे |  भगवान भगवदगीता में कहते हैं " मैं हर एक के हृदय में स्थित हूं और मेरे ही कारण जीव मेरा स्मरण करता है,  विस्मरण करता है,  मुझ से अवगत होता है आदि-आदि |  समस्त वेदों के माध्यम से मैं जाना जाने योग्य हूं क्योंकि मैं ही समस्त वेदों का रचयिता हूं और वेदांत का शिक्षक हूँ |"

महारानी कुंती इसकी पुष्टि कर रही है किस समस्त जीवो के भीतर और बाहर रहते हुए भी भगवान अलक्ष्य हैं |  कहने का भाव यह है कि भगवान सामान्य व्यक्ति के लिए पहेली तुल्य हैं |  महारानी कुंती ने स्वयं अनुभव किया कि भगवान कृष्ण ने उनके समक्ष उपस्थित होते हुए भी उत्तरा के गर्भ में प्रविष्ट होकर अश्वत्थामा के ब्रह्मास्त्र आक्रमण से भ्रूण की रक्षा की |  वे स्वयं इस दुविधा में पड़ी हुई थी  कि कृष्ण सर्वव्यापी हैं या अंतर्यामी |  वस्तुतः वे दोनों हैं किंतु  उन्हें छूट है कि  जो लोग उनके शरणागत नहीं है उनके समक्ष वे प्रकट न हों  | यह अवरोधक पर्दा परमेश्वर की माया शक्ति कहलाता है और उपद्रवी जीव की संकुचित दृष्टिकोण  को नियंत्रित करने वाली यही है |  उसकी व्याख्या अध्याय 2 में की गई है


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Gaurav Hindustani

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