Tuesday, October 8, 2019

ऑफिस बॉय से मुख्य न्यायाधीश बनने की अद्भुत रोमांचक यात्रा

I come from a poor family. I started my career as a class IV employee and the only asset I possess is integrity.
S.H. Kapadia


 यह भारत के उच्चतम न्यायालय के  पूर्व न्यायाधीश श्री एस एच कपाड़िया जी के, जो उन्होंने स्वयं के बारे में सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश बीआर कृष्णा अय्यर  को लिखे एक पत्र में लिखे थे |  भारत के 38 वें न्यायाधीश श्री कपाड़िया जी ने अपनी जीवन-यात्रा एक ऑफिस असिस्टेंट की तरह प्रारम्भ की थी | 
 
उनकी जज बनने की अदम्य,  उत्कट इच्छा थी |  एक निम्न मध्यमवर्गीय पारसी परिवार में जन्मे कपाड़िया जी के पिता एक क्लर्क थे एवं माता गृहणी | पढ़ाई का बोझ उन पर काफी भारी था, इसलिए होमी कपाड़िया को बेहराम जी जीजीभाई (Behramjee Jeejeebhoy) नामक लॉ फर्म पर नौकरी करनी पड़ी | कभी किसी ने कल्पना भी नहीं की थी कि यह लड़का कभी भारत के मुख्य न्यायाधीश के पद को भी सुशोभित कर सकता है | 
  
27वर्ष की उम्र में सन 1974 में वे आयकर विभाग में Counsel बने | वर्ष 1991 में बाम्बे हाईकोर्ट में मुख्य न्यायाधीश तथा दिसम्बर 2003  में उच्चतम न्यायालय में जज बनाए गये | 12 मई, 2010 को उन्हें भारत के मुख्य न्यायाधिपति की शपथ राष्ट्रपति द्वारा दिलाई गयी | 
  
न्यायमूर्ति एस एच कपाड़िया ने स्वयं को हर प्रकार के राजनैतिक दबाव से मुक्त रखा है एवं अनेक महत्वपूर्ण निर्णय दिये हैं | इस देश की न्याय प्रणाली में समुचित परिवर्द्धन एवं सुधान हेतु अनेक सफल प्रयास किये हैं  |

S.H. Kapadia
S.H. Kapadia