Tuesday, June 4, 2019

"तुम बिन"

जब से तुम नहीं हमसफर
तुम बिन ज़िंदगी भी अंजानी राहों का सफर

देखें लाख तुफां बाहर समंदर
तुम बिन कैसे बयां करे अंदर का मंजर

हैं अकेले,नही तुम हो पास
तुम बिन जीने का नही एहसास

क्या कहे तुम बिन नही सुकूं
तुम बिन जी ना सकूं

लम्हा-लम्हा,कतरा-कतरा जल रही हैं ज़िंदगी
तुम बिन कैसे हो बंदगी

किससे कहे हम जिये कैसे
रोना चाहें भी तो कैसे,इन आँखों में तुम बसे

वक्त नही कटका ख़्वाहिशे भी टूट गई
तुम बिन हर तमन्ना रूठ गई

बोझिल हुई हैं सांसे तुम बिन
आँखें धुंधला गई तुम बिन

मांगी थी जो हर मन्नत अधूरी
तुम बिन जीना मजबूरी

तुम बिन खुशियां कहां बाज़ार में
हम तो दर्द ख़रीद लाए उधार में

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ख़ुदा भी तू,मूरत भी तू
तुम बिन इबादत किस की करूं

यूं भी तेरे ख़्यालो में थी ज़िंदगी
तुम बिन होती नहीं ख़्यालो में बंदगी

ख़्वाबो वाली नींद टूट गई
तुम बिन खुशियां रूठ गई

तुम्हारे दिए फूल सौगात हुई पुरानी
तुम बिन हर बात झूठी कहानी

अब सोती नहीं है ये आँखें
तुम बिन बहोत रोती हैं ये आँखें

तेरी चाहत के सिवा कोई चाहत नही
तुम बिन मिलती कही राहत नहीं

वो लम्हा तूने जब मुंह मोड लिया
तुम बिन हमने जीना छोड़ दिया

निखरना भूल गए तुम बिन
कि बिखर गए हैं तुम बिन..

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 सांसें भी बेवफ़ा लगें
तुम बिन जीना भी सज़ा लगें

कभी जिन आँखों में रंगत समायी
तुम बिन वो आँख भर आयी

तेरा दिया दर्द भी बेगाना
तुम बिन बेरंग ज़माना

अब है कायनात से रंजिशें
तुम बिन नही अब सांसों को बंदिशें

दुआ के लिए हाथ उठाए भी तो कैसे
तुम बिन क्या मांगे रब से

यूं तो कहने को है सभी पास
तुम बिन नही खुद के ही साथ

क्यों हो तुम ख़फा
तुम बिन भटके मेरी वफ़ा

तुम बिन कैसे कटे ये पल
बहोत हुआ अब साथ चल


"तुम बिन"
"तुम बिन"

Priya Batra
(Nagpur)
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Gaurav Hindustani

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