Monday, June 24, 2019

प्रशंसा (Praise)

प्रशंसा क्या है ? (What is praise?) कौन प्रशंसा का पात्र है ? (Who is worthy of praise?) प्रशंसा किसकी और कैसे करनी चाहिए ? (Who should praise and how?) अपनी प्रशंसा सुनकर व्यक्ति की क्या प्रतिक्रिया होनी चाहिए ? (What should be the reaction of the person after listening to his praise?) प्रशंसा के क्या हानि-लाभ हैं ? (What are the benefits of praise?) आदि प्रश्नों का सटीक विवेचन मनीषियों एवं विचारकों की दृष्टि से | 

जैसे चाँदी की परख कुठाली पर और सोने की परख भट्टी में होती है, वैसे ही मनुष्य की परख लोगों के द्वारा की गयी प्रशंसा से होती है | - नीति वचन 

⇨  प्रत्येक व्यक्ति प्रशंसा चाहता है | - लिंकन 

⇨  एक बुद्धिमान पुरुष की प्रशंसा उसकी अनुपस्थिति में करनी चाहिए, किन्तु स्त्री की प्रशंसा उसके मुख पर | - वेल्स लोकोक्ति

⇨  प्रतिद्वंद्वी द्वारा की गयी प्रशंसा सर्वोत्तम कीर्ति है | - टामस मूर 

⇨  प्रशंसा के प्रति अनुराग पर ही सदैव किसी जाति का महान प्रयास आधारित रहा है, जैसे उसका पतन विलासिता के प्रति अनुराग में रहा है | - रस्किन 

⇨  प्रशंसा अच्छे गुणों की छाया है, परन्तु जिन गुणों की वह छाया है उन्ही के अनुसार उसकी योग्यता भी होती है | - वेकन 

⇨  अपनी प्रशंसा सुनकर हम इतने मतवाले हो जाते हैं कि फिर हममे विवेक की शक्ति भी लुप्त हो जाती है | बड़े से बड़ा महात्मा भी अपनी प्रशंसा सुनकर फूल उठता है | - प्रेमचन्द 

⇨  मुझे किसी दूसरी वस्तु की इतनी आवश्यकता नहीं है जितनी की आत्म्पूजा की भूख के पोषण की | - अज्ञात 

⇨  अपनी पुस्तकों की प्रशंसा करने वाला लेखक अपने बचचों की प्रशंसा करनेवाली माता के समान है | - डिजरायली 

⇨  किसी के गुणों की प्रशंसा करने में अपना समय व्यर्थ नष्ट न करो, उसके गुणों को अपनाने का प्रयत्न करो | - कार्ल मार्क्स 

⇨  प्रशंसा प्रार्थना से अधिक दिव्य है, प्रार्थना स्वयं का तैयार रास्ता हमे दिखाती है, प्रशंसा वहां पहले से ही उपस्थित रहती है | - यंग 

⇨  स्वर्ण और हीरे के समान, प्रशंसा का मूल्य केवल उसके दुर्लभत्व में ही होता है | - डॉ. जॉन्सन

⇨  प्रशंसा आपके व्यक्तित्व के मूल केन्द्र पर चोट करती है, इससे आप जान सकते हैं कि आपके सामने बैठे व्यक्ति का मानसिक तथा आध्यात्मिक स्तर क्या है | - स्वामी अमरमुनि

⇨  प्रशंसा के वचन साहस बढ़ाने में अचूक औषधि का काम देते हैं | - सुदर्शन 

⇨  प्रशंसा अज्ञान की बेटी है | - फ्रैंकलिन 

⇨  प्रशंसा से बचो, यह आपके व्यक्तित्व की अच्छाइयों को घुन की तरह चाट जाती है |  - चाणक्य 

⇨  प्रशंसा की मीठी अग्नि यमराज के कठोर हृदय को भी मोम बना देती है, तभी तो वह अपने भक्त को अमर होने का वर दे देता है, यह जानते हुए भी कि इस संसार में कोई अमर नहीं है | - वेदान्त तीर्थ 

⇨  प्रशंसा की भूख जिसे लग जाती है, वह कभी तृप्त नहीं होता | - अज्ञात 

⇨  दूसरे की प्रशंसा करना बहुत कम लोग जानते हैं , इसलिए जब भी कोई आपकी प्रशंसा करे तो यह जानने की कोशिश करें कि सामने वाला आपसे आखिर चाहता है क्या है ? - स्वामी गोविन्द प्रकाश 

⇨  प्रशंसा खोजने वालों को वह नहीं मिलती | - खलील जिब्रान

प्रशंसा (Praise)
प्रशंसा (Praise)

Share This
Previous Post
Next Post
Gaurav Hindustani

My name is Gaurav Hindustani. I am web designer by profession, but I am author by heart so Hindustani Kranti is a platform for all Authors and poets who write GOLDEN words and have special stories and poetries. You can send any time your words to me at gauravhindustani115@gmail.com.

0 comments: