Tuesday, June 25, 2019

स्वभाव (Nature)

स्वभाव क्या है ? ( What is the nature) क्या यह बदला जा सकता है ? ( Can this be changed? ) किस स्वभाव के व्यक्ति को अच्छा कहा गया है और किसे बुरे की संज्ञा दी गई है ? ( What kind of person is said to be good and what is the name of evil?) अच्छे स्वभाव से क्या - क्या प्राप्त होता है और बुरे स्वभाव से क्या हानियाँ हैं | ( What is achieved by good nature and what are the impairments of bad nature. ) आइये जाने - 

उपदेश से स्वभाव नहीं बदला जा सकता | गर्म किया हुआ पानी फिर शीतल हो जाता है | - पंचतंत्र 

⇨ मैं नरक में जाने से नहीं डरता यदि पुस्तकें मेरे साथ हों, मैं नरक को स्वर्ग बना दूंगा | - लोकमान्य तिलक 

⇨ स्वभाव  इन्सान को जन्म से मिलता है और शिक्षा तथा संगति से उसे सुधारा जा सकता है | - प्रेमचन्द 

⇨  अच्छा स्वभाव शहद की मक्खी की तरह है, प्रत्येक झाडी से शहद ही निकालती है | - बीचर

⇨  जल तो आग की गरमी पाकर ही गरम होता है, उसका अपना स्वभाव तो ठण्डा ही होता है | - कालिदास 

⇨  वैवाहिक जीवन में तो पति-पत्नि का स्वभाव ही जीवन की बुनियाद है | - अज्ञात 

⇨ इस दुनिया में किसी भी व्यक्ति का स्वभाव प्राकृतिक रूप से ऐसा नहीं है जिसे पूर्ण कहा जा सके | उसे आवश्यकता होती है देखभाल की, आत्मसंयम की | - एस. मार्डेन 

⇨ जिसका जो स्वाभाविक गुण है, उसे उससे वंचित करने की क्षमता किसी में भी नहीं होती है | हंस का स्वाभाविक गुण है कि दूध और पानी को अलग कर सकता है | स्वयं विधाता भी इस कार्य में असमर्थ है | हंस के कुपित होने पर विधाता उसका निवास स्थान छीन सकता है किन्तु उसके नीरक्षीर विवेक को बुद्धि को नहीं छीन सकता | - भर्तृहरि 

⇨ कोई व्यक्ति अचानक स्वभाव के विपरीत आचरण करे, तब शंका कीजिये | - प्रेमचन्द

⇨ हमारे स्वभाव का प्रभाव हमारे परिवार के दूसरे किसी  सदस्य की उन्नति या अवनति पर भी पड़ता है | - डी. पाल 

⇨ स्वभाव की उग्रता झगड़े की आग को भड़काती है, परन्तु बिलम्ब से क्रोध करने वाला व्यक्ति अपने मधुर वचन से बुझा देता है | - नीति वचन 

⇨ स्वभाव के अनुसार उन्नति कीजिए, संस्कार स्वयं आपके पास चले आयेंगे | - स्वामी विवेकानन्द

⇨ स्वभाव ही मनुष्य के जीवन का स्वर्ग या नर्क निर्धारित करता है | - डी. बारिया 

⇨ एक चोट को आदमी शीघ्र भूल जाता है लेकिन अपमान को देरी से | - चेस्टर फील्ड 

⇨ बुरे लोगों को निंदा में ही आनन्द आता है | सारे रसों को चखकर भी कौआ गन्दगी से ही तृप्त होता है | - वेदव्यास 

⇨ स्वभाव कच्ची मिट्टी की भांति होता है जिसकी कोई शक्ल नहीं होती इसे आकृति देने की आवश्यकता होती हैं | - संतवाणी 

⇨ जिसका जो स्वभाव है, उसे छुड़ाना कठिन है |  यदि कुत्ता राजा बना दिया जाये, तो क्या वह जूता नहीं चबायेगा | - हितोपदेश

⇨ दया मनुष्य का स्वाभाविक गुण है | - प्रेमचन्द

⇨ व्यक्ति के स्वभाव पर उसका भविष्य निर्भर करता है | - प्रेमचन्द 

⇨ अगल-बगल देख-समझकर व्यवहार करने वाला कभी धोखा नहीं खाता | - चीनी कहावत 

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Gaurav Hindustani

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