Sunday, June 9, 2019

हे ! युवाओं ..मत भागों ..! हे ! हिन्दुस्तान के आगामी गौरव ..रुको ..ठहरो ..|

Know your culture and Proud on Your culture.

हे ! युवाओं ..मत भागों ..! हे ! हिन्दुस्तान के आगामी गौरव ..रुको ..ठहरो ..| 
हे ! देश की युवा पीढ़ी जिस विकास की गाड़ी पर तुम बैठना चाहते हो वह अन्धकार की ओर जाती है | मत भागो इसके पीछे | 
जिस आर्यवृत की संस्कृति को पीछे छोड़ रहे हो वास्तव में वही तुम्हारा मूल है वही तुम्हारा प्रकाश है | वही तुम्हारा ज्ञान है | 
Dear Indian Your, Don't follow western culture. Don't become a modern person, become a gentleman and buildup, simple living and high thinking. 

जैसे-जैसे हम बाहरी संस्कृति को अपने देश में शरण दे रहें हैं | वैसे-वैसे ये हमारी संस्कृति का नाश कर रही है | वह दिन दूर नहीं जब यह पश्चिमी सभ्यता हमारी भारतीय संस्कृति को पूर्णतः नष्ट कर देगी | आइये जाने क्या भी हमारी पहचान और क्या थे उसके फ़ायदे | 

गुरुकुल में पढ़ते थे - 
हमारी सभ्यता में गुरुकुल थे | ऋषिमुनि बचचों को समान रूप से ज्ञान देते थे | राजा हो या प्रजा सभी के बच्चे समान रूप से शिक्षा ग्रहण करते थे | कोई भेद-भाव नहीं | यहाँ तक कि भगवान् श्री कृष्ण तथा मर्यादा पुरुषोत्तम राम को भी अपना-अपना राजमहल छोड़कर गुरुकुल जाना पड़ा | यदि चाहते तो वे इतने समृद्ध थे कि महल में ही गुरुओं को बुला सकते थे, परन्तु उन्होंने उस प्राचीन पवित्र परम्परा का सम्मान कर उसका पालन किया | 
क्योंकि बालक जब घर में, समाज में रहकर शिक्षा ग्रहण करता है तब उसका आधा मन घर की चीजों में बंट जाता है | और गुरुकुलों में जब तक शिक्षा-दीक्षा पूरी नहीं हो जाती थी वे बालक वहीँ रहते थे | परिणामस्वरूप वे हर क्षेत्र में निपुण होते थे | 

गुरुकुल में पढ़ते थे
गुरुकुल में पढ़ते थे 


सादा भोजन करते थे -
एक कहावत है कि स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मस्तिष्क निवास करता है और स्वस्थ शरीर बनता है शुद्ध, सात्विक और शाकाहारी भोजन से | भगवान् राम ने चौदह वर्षों तक जंगलों में फलाहार ही किया | और श्री कृष्ण ने माखन-मिश्री का महत्व समझाया | किन्तु आज का ये समाज राक्षस प्रवृति का होता जा रहा है | वह जानवर तो जानवर इंसानों को खाने से भी नहीं चूक रहा है इसका कारण पश्चिमी सभ्यता ही है | 
लेकिन भारत के लोग यह नहीं सोचते कि वे क्यों खाते हैं मांस ...क्योंकि उनके यहाँ अन्न, फल सब्जी आदि पर्याप्त मात्रा में नहीं होते इस कारण | परन्तु हमारा देश कृषि प्रधान देश है यहाँ अन्न की कमी नहीं | 

इमानदार तथा वचन परायण थे - 
इमानदारी हमारी संस्कृति के कण-कण में थी, महाराजा सत्यवादी हरीशचंद्र, महात्मा गाँधी ईमानदारी के साकार मूर्त हैं | और भगवान् श्री राम जिहोने वचन निभाने का सूत्र दिया | 
रघुकुल रीति सदा चलि आयी
प्राण जाये पर वचन न जायी 

ऐसी महान विभूतियों ने इस भारत की धरती पर जन्म लिया परन्तु उनका अनुशरण न कर दूसरे देशों के आडम्बर का चोला पहनने में लगें हैं | 

इमानदार तथा वचन परायण थे
इमानदार तथा वचन परायण थे


बड़ों का आशिर्वाद लेते थे - 
बड़ों के पैर छूकर उनसे आशीर्वाद की पवित्र परम्परा हमारे भारत देश में ही है और कहीं नहीं है | हर छोटे-बड़े काम में बड़ों की राय लेना शुभ माना जाता था और फलदायी भी सिद्ध होता था | 
आज की युवा पीढ़ी बड़ों के पैर छूने में ही स्वयं को लज्जित महसूस करती है उनसे किसी काम में राय लेना तो दूर की बात है | 

बड़ों का आशिर्वाद लेते थे
बड़ों का आशिर्वाद लेते थे


हमारी संस्कृति अर्थात् हमारा मूल ही खतरे में है | परिणाम स्वरुप देश में भ्रष्टाचार, बलात्कार और न जाने कौन-कौन से अपराध दिन-प्रतिदिन बढ़ते जा रहे हैं | यदि वास्तव में इन सबको मूलतः नष्ट करना है तो लौट आओ अपनी संस्कृति की ओर ...| 
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Gaurav Hindustani

My name is Gaurav Hindustani. I am web designer by profession, but I am author by heart so Hindustani Kranti is a platform for all Authors and poets who write GOLDEN words and have special stories and poetries. You can send any time your words to me at gauravhindustani115@gmail.com.

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