Sunday, June 2, 2019

कर्म (Work)

कर्म क्या है ? (What is work ?) मानव जीवन में कर्म का क्या महत्व है ? (What is importance of work in human life ?) कर्म से क्या पाया जा सकता है ? (What can you achieve by work ?) कर्म कैसे हों ? (Which type of work should be done ?) अकर्मी की क्या गति होती है ? और कर्मशील की क्या गति होती है ? महान विचारकों की दृष्टि में कर्म ---

➽ इस संसार में कोई मनुष्य स्वभावतः किसी के लिए उदार, प्रिय या दुष्ट नहीं होता | अपने कर्म ही मनुष्य को संसार में गौरव अथवा पतन की ओर ले जाते हैं - नारायण पण्डित 

➽ कर्म करना बहुत अच्छा है, पर वह विचारों से आता है, इसलिए अपने मस्तिष्क को उच्च विचारों एवं उच्चतम आदर्शों से भर लो, उन्हें रात-दिन अपने सामने रखों, उन्हीं में से महान कर्मों का जन्म होगा | - महर्षि अरविन्द 

➽ केवल वही व्यक्ति सबकी उपेक्षा उत्तम रूप से करता है जो पूर्णतया निस्वार्थी है, जिसे न धन की लालसा है, न कीर्ति की और न अन्य किसी वस्तु की | - स्वामी विवेकानन्द 

➽ जो निष्काम कर्म की राह पर चलता है, उसे इसकी परवाह कब रहती है कि किसने अहित साधन किया है | - अज्ञात 

➽ तुम जो भी कर्म प्रेम और सेवा की भावना से करते हो, वह तुम्हे परमात्मा की ओर ले जाता है | जिस कर्म में घृणा छिपी होती है, वह परमात्मा से दूर ले जाता है | - सत्य साई बाबा 

➽ कर्म का मूल्य बाहरी रूप और बाहरी फल में इतना नहीं है, जितना कि उसके द्वारा हमारे भीता दिव्यता की वृद्धि होने में है | - अरविन्द 

➽ अविद्या से संसार की उत्पत्ति होती है | संसार से घिरा जीव विषयों में आसक्त रहता है | विषयासक्ति के कारण कामना और कर्म का निरन्तर दबाव बना रहता है | कर्म शुभ और अशुभ दो प्रकार के हो सकते हैं और शुभ-अशुभ दोनों प्रकार के कर्मों का फल मिलता है | - मणिरत्नमाला

➽ कर्मयोगी अपने लिए कुछ करता ही नहीं | अपने लिए कुछ भी नहीं चाहता और अपना कुछ मानता भी नहीं | इसलिए ओमे कामनाओं का नाश सुगमता पूर्वक हो जाता है | - स्वामी विश्वासजी 

➽ कर्म करने और उसका फल पाने के बीच लम्बा समय लगता है, जिसकी प्रतीक्षा धैर्य पूर्वक करनी पड़ती है | बीज को वृक्ष बनने में कुछ समय लगता है | अखाड़े में दाखिल होते ही कोई पहलवान नहीं हो जाता है | विद्यालय में प्रवेश पाते ही कोई ज्ञानी नहीं हो जाता | कामयाबी धैर्य से मिलती है, कर्मक्षेत्र चाहे कोई भी हो | - स्वर्ग सूत्र 

➽ जो व्यक्ति छोटे-छोटे कर्मों को ईमानदारी से करता है, वही बड़े कर्मों को भी ईमानदारी से कर सकता है | - सैमुअल

➽ कर्मठ इहलोक-परलोक का ध्यान कर कर्म नहीं करता, वह तो बस क्रियारत रहता है | - भरतमुनि 

➽ इस धरती पर कर्म करते हुए सौ साल तक जीने की इच्छा रखो, क्योंकि  कर्म करने वाला ही जीने का अधिकारी है |  जो कर्मनिष्ठा छोड़कर भोगवृति रखता है, वह मृत्यु का अधिकारी बनता है | - वेद

➽ कर्म वह आइना है जो हमारा स्वरुप हमें दिखा देता है, अतः हमे कर्म का एहसानमंद होना चाहिए - विनोबाभावे 

➽ कर्मशील लोग  शायद ही कभी उदास रहते हों | कर्मशील और उदासी दोनों साथ-साथ नहीं रहतीं |  - बोबी 

➽ काम को आरम्भ करो और अगर काम शुरु कर दिया है, तो उसे पूरा कर के ही छोड़ों | - विनोबाभावे 

➽ कर्मशील व्यक्ति के लिए हवाएँ मधु बहाती हैं, नदियों में मधु बहता है और औषधियां मधुमय हो जाती हैं | - ऋग्वेद 

➽ कर्म ही मनुष्य के जीवन को पवित्र और अहिंसक बनाता है | - विनोबाभावे 

➽ जो निष्काम कर्म की राह पर चलता है, उसे उसकी परवाह कब रहती है कि किसने उसका अहित साधन किया है | - बंकिमचन्द्र चटर्जी

➽ फलासक्ति छोडो और कर्म करो, आशा रहित होकर कर्म करो, निष्काम होकर कर्म करो यह गीता की वह ध्वनि है जो भुलाई नहीं जा सकती है | जो कर्म छोड़ता है वह गिरता है | कर्म करते हुए भी जो उसका फल छोड़ता है वह चढ़ता है | - महात्मा गाँधी | 

➽ भविष्य चाहे कितना ही सुन्दर हो विश्वास न करो, भूतकाल की भी चिंता न करो, जो कुछ करना है उसे अपने पर और ईश्वर पर विश्वास रखकर वर्तमान में करो | - लांगफेलो 

➽ निष्काम कर्म ईश्वर को ऋणी बना देता है और ईश्वर उसे सूद सहित वापस करने के लिए बाध्य हो जाता है | स्वामी रामतीर्थ 

➽ जैसे तेल समाप्त हो जाने से दीपक बुझ जाता है, उसी प्रकार कर्म के क्षीण हो जाने पर दैव नष्ट हो जाता है | - वेद व्यास 


➽ फल मनुष्य के कर्म के अधीन है, बुद्धि कर्म के अनुसार आगे बढने वाली है, तथापि विद्वान और महात्मा लोग अच्छी तरह विचारकर ही कोई काम करते हैं |- चाणक्य 

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Gaurav Hindustani

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