Tuesday, June 25, 2019

हाँ. मैं मजदूर हूँ

हाँ. मैं मजदूर हूँ
हाँ मैं मजदूर है
दुखी जीवन जीने को मजबूर हूँ।
आधी पेट खाना और आंसू बहाना
यही मेरा दस्तूर है

सबके घर त्योहारों का मौसम है
सबका घर खुशियों से रौशन है
क्यों कि मैं मजदूर हूँ
मेरे घर मे छाया मातम है

एक अन्न को तरसता है
तो दूजा नए कपड़े की रट रटता है
क्यों कि मैं मजदूर हूँ
मेरा दिन तनख्वाह के इंतजार मे हि कटता है।

दिन भर मन से खटता  हूँ
धूप और बारिश की चोट भी सहता हूँ
क्यों कि मैं मजदूर हूँ
बच्चों की मांगे पुरी न कर
सिर्फ आह भर कर रहता हूँ।

बच्चों की मांगे पूरी न कर
रात अंधेरे चोरों सा घर ढुकता हूँ
सूरज से भी पहले काम पर निकलता हूँ।
क्यों कि मैं मजदूर हूँ
दूखियों सा मेरा संसार है।


ज्योति झा
ज्योति झा






ज्योति झा
शिक्षा-एम.ए (हिन्दी)
साहित्यिक उपलब्धि-विभिन्न साहित्यिक मंच पर काव्य पाठ।
निवास-कोलकाता।
Share This
Previous Post
Next Post
Gaurav Hindustani

My name is Gaurav Hindustani. I am web designer by profession, but I am author by heart so Hindustani Kranti is a platform for all Authors and poets who write GOLDEN words and have special stories and poetries. You can send any time your words to me at gauravhindustani115@gmail.com.

0 comments: