Saturday, June 1, 2019

धर्म ( Religion )

धर्म क्या है ? (What is religion ?)  धर्म का उद्देश्य क्या है ? (What is aim of religion ?) आज हम जिस धर्म के लिए लड़ते दिखाई दे रहें हैं, क्या वह वास्तव में मनुष्य का सच्चा धर्म है ? आइये देखें महान विचारकों की दृष्टि में धर्म क्या है ? मानव का धर्म क्या होना चाहिए -

सच्चा धर्म सकारात्मक होता है, नकारात्मक नहीं | अशुभ एवं असत से बने रहना ही केवल धर्म नहीं, वास्तव में शुभ एवं सत्कार्यों को करते रहना ही धर्म है | सच्चे धर्म की कसौटी तो पवित्र पुरुषार्थ है | - स्वामी विवेकानन्द 

सारे ही धर्म एक ही बात कहते हैं | मनुष्यता के गुणों को विकसित करना ही धर्म का उद्देश है | - हरिकृष्ण प्रेमी 

जितने धर्म प्रचलित किए गए, सब अपनी व्यापकता और सहृदयता के बल पर ही फैले - बंकिमचन्द्र चट्टोपाध्याय

धर्म का पालन करते हुए जो धन प्राप्त होता है, वही सच्चा धन है | जो अधर्म से प्राप्त होता है, वह धन तो धिक्कार देने योग्य है | धन की इच्छा से कभी शाश्वत धर्म का त्याग नहीं करना चाहिए | - वेदव्यास

धर्म की शक्ति ही अनेक जीवन की शक्ति है, धर्म कि दृष्टि ही जीवन की दृष्टि है - डॉ. राधाकृष्णन

जीवन में आनन्द को प्राप्त करने की प्यास ही धर्म है | - योगिराज नानक

विश्व्यापी धर्म तो एक ही है, यद्यपि उसके सैंकड़ों रूपान्तर हैं - जी.बी.शॉ

सावधान होकर धर्म का वास्तविक रहस्य सुनो और उसे सुनकर उसी के अनुसार आचरण करो | जो कुछ तुम अपने लिए हानिप्रद और दुःखदायी समझते हो वह दूसरों के साथ मत करो - वेदव्यास 

धर्म सचमुच बुद्धि-ग्राह्य नहीं, हृदय ग्राह्य है - महात्मा गाँधी 

जो ग्राह्य शुद्ध अर्थ का विरोधी है वह धर्म नहीं है | जो धर्म राजनीति का विरोधी है वह धर्म नहीं है | धर्म रहित अर्थ त्याज्य है | धर्म-रहित राज्य्सना राक्षसी है - महात्मा गाँधी

धर्म तो मानव समाज के लिए अफीम है - कार्ल मार्क्स 

भारतवर्ष का धर्म उसके पुत्रों से नहीं, सुपुत्रियों के प्रताप से ही स्थिर है | भारतीय देवियों ने यदि अपना धर्म छोड़ दिया होता तो देश कब का नष्ट हो चुका होता | - महर्षि दयानन्द 

संसार में धर्म ही सबसे श्रेष्ट है | धर्म में ही सत्य की प्रतिष्टा है  - बाल्मीकि 

धर्म होने पर जब मनुष्य इतने नीच हैं , तो धर्म न होने पर वे क्या होंगे - फ्रैंकलिन 

धर्म परमेश्वर की कल्पना कर मनुष्य को दुर्बल बना देता है, उसमे आत्मविश्वास उत्पन्न नहीं होने देता और उसकी स्वतंत्रता का अपहरण करता है - आचार्य नरेंद्र देव 

➠ धर्म सेवा का नाम है, लूट और कत्ल का नहीं | - प्रेमचन्द

➠ धर्म दे देश चिन्ह हैं | अर्थात जिसमें यह दश चिन्ह - धैर्य, क्षमा, दमन करना, अस्तेय, शौच, इन्द्रियनिग्रह, धी, विद्या, सत्य और अक्रोध पाये जावें वह मनुष्य धार्मिक है | - मनु 

➠ सच्चा धर्म तो पापों की जड़ काटकर मुक्ति का मार्ग - प्रदर्शन करता है, पर मिथ्या धर्म में मुक्ति टकों के बल बिकती है | - रस्किन 

➠ धर्म से केवल मोक्ष की ही नहीं अर्थ और काम की भी सिद्धि होती है | - वेदव्यास

➠ मानव और ईश्वर की कसौटी पर जो जीवन खरा उतरे, वही सच्चे धर्म का एकमात्र प्रमाण पत्र है | - डॉ. जॉन्सन 

➠ मृत्यु में अनेक एक हो जाता है, जीवन में एक अनेक रहता है | धर्म एक हो जायेगा जब ईश्वर का अंत होगा | - रविन्द्र

➠ जहाँ धर्म नहीं, वहाँ विद्या, लक्ष्मी, स्वास्थ्य आदि का भी अभाव होता है | धर्म रहित स्थिति में बिल्कुल शुष्कता होती है, शुन्यता होती है |- महात्मा गाँधी

➠ धर्म से अर्थ उत्पन्न होता है | धर्म से सुख होता है | धर्म से मनुष्य सब कुछ प्राप्त करता है | धर्म जगत का सार है | - बाल्मीकि

➠ सच्चा धर्म हमे अपने आश्रितों का सम्मान करना सिखाता है और मानवता, दरिद्रता, विपत्ति, पीड़ा एवं मृत्यु को ईश्वरीय दें जानता है | - गेटे

➠ धर्म की पवित्रता शरत्कालीन जल श्रोत के सदृश हो, उसकी उज्ज्वलता शारदीय गगन के नक्षत्रलोक से भी कुछ  बढ़कर और शीतल हो | - जयशंकर प्रसाद 

➠ धर्म ही व्यक्ति और समाज की प्रगति का मार्ग है | यह शाश्वत, आधारभूत और मौलिक है | यह माता के समान है जिसे स्वीकार करना ही होगा, पत्नि की तरह नहीं जिसे चाहे स्वीकार या अस्वीकार करें | - सत्य साईं बाबा 

➠ धर्म का उद्देश्य है कि मनुष्य के चरित्र में अटल बल प्राप्त हो | - स्वामी रामतीर्थ


➠ धर्म उस अग्नि की, जो प्रत्येक व्यक्ति के अन्दर जलती है, ज्वाला को प्रज्जवलित करने में सहायता करता है | - डॉ, राधाकृष्णन

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Gaurav Hindustani

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