Wednesday, June 5, 2019

"बेबसी"

लिखना नही जानते पर एक छोटी सी कोशिश है
आज के युग की मुहब्बत बच्चे समझना नही चाहते और माँ पिता समझा नही पाते,
बच्चे माँ पिता से बगावत करते हैं
और एक दिन धोखा खाते है
जिसका ख़ामियाज़ा नहीं भरा जा सकता
काश कोई इन पंक्तियों को पढ़ कर सही राह चुन ले तो लिखना सफल होगा..

ये मुहब्बत है जनाब ये कहा किसी का एतबार करती
ये तो इश्क़-ए-जुनूं में, बंद आँखें कर प्यार करती

ये कैसी मुहब्बत है यारों,चाहे दगा़ हो इसमे हजार
अपनों को करके गुनहगार,बंद आँखें कर प्यार करती

बड़ो की सीख पर नहीं ये एतबार करती
ये तो दोस्तों पर कर भरोसा,बंद आँखें कर प्यार करती

ये न समझे के जब दामन में दाग़ लग जाए एक बार
फिर मिटाना है दुष्वार, पर ये बंद आँखें कर प्यार करती

सिर्फ़ भरोसा ही नहीं,इज्जत भी हो जाए तार तार
दिल पे लगेंगे घाव हजार,पर ये बंद आँखें कर प्यार करती

ए-मुहब्बत कभी तो कर माँ बाप पे एतबार
कभी अपनों की करके देख दरकार,यूं न बंद आँखें कर प्यार

ये तेरी ही खुशियां सोचे हर बार यूं न बंद आँखें कर प्यार
बस एक प्रहार इस चार दिन की मोहब्बत पर, आंखे खुलती ही तब है जब सब कुछ बर्बाद हो जाये, काश इससे लोगो को ये बात समझ आये,, सच्चाई के साथ एंव विचार कर विषय चुना हमने, बस हकीकत से रूबरू कराने की कोशिश.. जिससे सभी को कुछ न कुछ शायद सीखने को मिले
प्यार की परिभाषा क्या है ये भी इन नौजवानों को नहीं पता होता, लेकिन फिर भी प्यार नाम की चिड़ियां के पीछे भागे जा रहे हैं।क्या माता पिता के प्यार से बढ़कर भी किसी का प्यार हो सकता है, नहीं न, फिर क्यों उनकी सीख को नज़रअंदाज़ कर ऐसे रास्तों पर चल पड़ते हैं जहां भविष्य निश्चित ही नहीं।
लेकिन एक बात ये भी है अगर भविष्य निश्चित हो,और सभी पक्ष मंजूरी दे तो प्रेम विवाह गलत नहीं हैं।आज समाज में प्रेम विवाह का बहुत प्रचलन है।
निष्कर्ष ये है कि भविष्य सुरक्षित रहे और सम्मान बना रहे चाहे प्रेम विवाह हो,या आयोजित विवाह।
प्रेम विवाह समस्या नही है... समस्या तो सही चुनाव है.. जो बच्चे जोश में गलत कर लेते हैं.. काश चुनाव के दौरान माँ पिता की राय लें...  और सही मार्गदर्शन मिले उस पर बच्चे सहमत हो... साथ ही प्यार की सीमाओं को समझे...
लेकिन आजकल सीमाएं पहले लांघते हैं, प्यार हमेशा रहे या नहीं।ये मनोदशा स्वस्थ समाज को चरमराने का काम कर रही है। इसलिए हमें बच्चों से खुल कर बात करनी चाहिए ..चाहे वो बेटा हो या बेटी... सही गलत हमें हर तरह का उन्हें समझाने की कोशिश करनी चाहिए... चाहे फिर कुछ लोग इसे फूहड़ पन कहे...
कुछ एहसास सांझा करने की कोशिश की है,गरआप तक पहुँचे तो लिखना सफल हुआ ..बस आप के और हमारे बीच से ही विषय लिए हैं..हम तर्क ही चाहते हैं ताकि सभी की राय सामने आए.. और बच्चों, बड़ो सभी को दिशा प्रदान हो...


"बेबसी" - प्रिया बतरा
"बेबसी" - प्रिया बतरा 

Priya Batra
(Nagpur)
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Gaurav Hindustani

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