Wednesday, May 22, 2019

दुनिया को प्रोत्साहित करने वाला पहला दिव्य ग्रन्थ : श्रीमद्‍भगवद्‍गीता

वर्तमान आधुनिक युग में लोग कस्तूरी मृग के समान यहाँ - वहाँ  भागे जा रहें हैं |  किन्तु सफलता की सोंधी ख़ुश्बू हमारे (मानव ) अन्दर ही है | परन्तु प्रश्न यह उठता है कि इस ख़ुश्बू को पहचाने कैसे ? कोई तो बताये इस सफलता की ख़ुश्बू के लक्षण के बारे में |  आज हम सफलता के , और आधुनिकता के आडम्बर में इतना आगे निकल आये कि अपनी संस्कृति , सभ्यता को दिन - प्रतिदिन  बहुत पीछे छोड़ते जा रहें हैं | किन्तु इस नयी पीढ़ी को ये ज्ञात भी नहीं है कि भारतीय संस्कृति में, भारतीय सभ्यता में , भारत के वेदों में , भारत के उपनिषदों में समुद्र रूपी विशाल ज्ञान-विज्ञान  छुपा है | हिन्दू संस्कृति में माणिक मोती वेदों के रुप में छुपे हुए हैं | और ये पश्चिमी सभ्यता और नए उपक्रमों में अपना ज्ञान और अपनी सफलता खोज रहें हैं |

 जागो, पढ़ो और पहचानों  अपनी सभ्यता को, अपनी संस्कृति को और अपने वेदों को |  "हिन्दू संस्कृति का सबसे पहला प्रोत्साहित करने वाला दिव्य ग्रंथ  श्रीमद्भगवद्गीता " जिसमें पहले पृष्ठ से ही ज्ञान की अमृत वर्षा प्रारम्भ हो जाती है और जैसे जैसे गीता के दिव्य पृष्ठों उलटते हैं ज्ञान की रिमझिम बारिश  और तेज हो जाती है |  ऐसे दिव्य ज्ञान की बारिश में सराबोर होने के पश्चात् किसी और ज्ञान सामग्री की आवश्यकता ही नहीं रहेगी और न ही किसी और के प्रोत्साहन की आवश्यकता होगी |  

      विश्व धनुर्धर अर्जुन युद्धक्षेत्र में अपने सगे -संबन्धियों को देखते ही ऊर्जाहीन हो गया था, उसके भौतिक ज्ञान का दीपक बुझ सा गया था | और अज्ञानताबस  उसने अपना प्रिय धनुष गाण्डीव किनारे रख दिया | तब भगवान्  श्री कृष्ण ने उस के लिए  स्वयं से  हारे हुए अर्जुन को ये दिव्य ज्ञान की अमृत वर्षा की जो हमारे लिए आज इस कलयुग में भी सहज ही उपलब्ध है किन्तु हम पढ़ना नहीं चाहते है | और आश्चर्य की बात ये है कि पश्चिमी सभ्यता के लोग गीतासार का बहुतायत में पाठन कर रहें हैं परन्तु भारत के लोगो सिर्फ आडम्बर को गृहण कर रहें हैं | 
 
विश्व साहित्य में श्रीमद्भगवद्गीता का अद्वितीय स्थान है | यह साक्षात् भगवान् के श्रीमुख से निःसृत परम् रहस्यमयी दिव्य वाणी है | इसमें स्वयं भगवान् ने अर्जुन को निमित्त बनाकर मनुष्यमात्र के कल्याण  उपदेश दिया  है | इस पवित्र ग्रन्थ में भगवान् ने अपने हृदय  के बहुत ही विलक्षण भाव भर दिए हैं, जिनका आजतक  कोई पार नहीं पा सका  और न ही पा सकता है |  


दुनिया को प्रोत्साहित करने वाला पहला दिव्य ग्रन्थ : श्रीमद्‍भगवद्‍गीता
दुनिया को प्रोत्साहित करने वाला पहला दिव्य ग्रन्थ : श्रीमद्‍भगवद्‍गीता

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Gaurav Hindustani

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2 comments:

  1. जय श्री कृष्ण 🙏
    हमारी संस्कृती को आज के बच्चों तक पहुँचाना का काम कर रहे हैं आप... बहुत बहुत बधाई गौरव जी

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    Replies
    1. जी बहुत बहुत धन्यवाद कि आपने भगवान् श्री कृष्ण को पढ़ा ...जी हमारी एक छोटी सी कोशिश है कि जो वर्तमान पीढ़ी जिस संस्कृति को पीछे छोड़ रही है वही हमारी पहचान है और रहेगी ....
      यदि आप अपना परिचय भी देते तो हमे बहुत ख़ुशी होती |
      हमने कुछ और भी लिखा है, और गीता के संदेश को निरंतर पहुंचाते रहेंगे ...आप पढ़ते रहेंगे आशा है हमे और अपनी बहुमूल्य प्रतिक्रिया लिखते रहेंगे ..आपका बहुत बहुत आभार |

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