Sunday, May 26, 2019

स्वयं के अन्दर की शक्ति को पहचाने

आप में भी असाधारण शक्तियों का, मन, शरीर, आत्मा की असंख्य शक्तियों का भण्डार छिपा है | खेद है कि आप अपने को असाधारण प्राणी मानते हैं | आप कभी भी ऐसा विचार नही करें कि हम में कहाँ दिव्य और आश्चर्यमयी शक्तियाँ छिपी पड़ी होंगी | सच मानिये, आप शक्तियों का वृहद् भण्डार है |  घोड़ों को यदि शारीरिक शक्ति का ज्ञान हो जाये तो वे हमारे वाहन न रहें | हाथी अपनी शारीरिक ताक़त से विश्व को अपने वष में ही कर लें | शेर, चीता, रीछ, भैंसे, बैल, खच्चर इत्यादि पशुओं को अपनी शक्तियों का ज्ञान हो जाए तो हम पर राज्य ही करने लगे | यदि हमे अपनी शक्तियों का ज्ञान हो जाये तो हमे दुःख, भय, चिंता, आपत्ति, शोक, द्वेष आदि का बिल्कुल भी भान न हो | ये दुष्ट मनोविकार हमारा कभी भी कुछ न बिगाड़ सकें | हमारे स्वास्थ्य, मन और जीवन पर इनका कोई भी बुरा प्रभाव न हो | खेद है कि हम इन दुष्टों के आसानी से वश में आ जाते हैं और अपना सर्वनाश कर लेते हैं |

वास्तविक कमजोरी यह है कि अभी हमें स्वयं अपने ऊपर विश्वास नही है | हम दूसरों को धनवान और शान-शौक़त से रहते देख उन्हें सुखी समझते हैं, पर यदि हम उन्हें अन्दर से देखें, तो हमारे विचार बदल जाएँ | आप पूछेंगे कि लोगों के पास बहुत - सा धन है, सुख है, इतना वैभव, बड़प्पन और अधिकार है, फिर भी दुःख कैसे ? उस पर ईश्वर की बड़ा कृपा है, पर हम प्रकोप या ईश्वर कि अकृपा कैसे ? हमारे पास एश्वर्य के साधन नहीं है,  उनके बिना हम दुखी हैं और उनके पास सब साधन हैं, इसलिए वे सुखी हैं | यह आपका केवल भ्रम है | ईश्वर का इसमें कोई पक्षपात नही है | ईश्वरीय शक्तियाँ, विपुल ताकतों, मानसिक-शारीरिक-आत्मिक संपदाओं का जो अंश उनमे हैं, वही वास्तव में आप में भी मौजूद है | यह याद रखिये कि सतत परिश्रम और एक लक्ष्य सिद्धि से ही भाग्य बनता है | जनता की सतत इच्छा-साधना से देश उठता है | इच्छा एक प्रबल शक्ति है जो अपना मार्ग ख़ोज ही निकालती है | मूर्खों का प्रारब्ध एक बहाना मात्र है | वास्तव में प्रारब्ध या तकदीर कोई वस्तु नहीं है | 

जहाँ कार्य-कारण का अटूट सम्बन्ध है | वहां प्रारब्ध और तकदीर मानना मूर्खता के अतिरिक्त क्या है ? किसे विचार करने का मार्ग मालूम नहीं है ? कौन प्रत्येक कार्य के पीछे काम करने वाले कारण को नहीं जानता है ? जो अपने कल्पित भूत-प्रेतों और जीवन के तूफानों से सदा डांवाडोल रहता है, वही अपने कल्पित भूत - प्रेतों और बुरे ग्रहों का दास बना रहता है | 

इस सन्दर्भ में एक रोचक घटना याद आरही है --
राजा वसुसेन का ज्योतिष पर बड़ा विश्वास था | वे हर काम मुहूर्त से करते और हर समय अपने साथ एक ज्योतिषी सदा रखते | उन दिनों कहीं यात्रा पर जा रहे थे | रास्ते में एक किसान बीज बोने हल-बैल लेकर जा रहा था | ज्योतिषी ने कहा, "मुर्ख ! आज इस दिशा में ग्रह दशा ठीक नही  है | लौट जा नहीं तो हानि होगी |" किसान ने कहा, "मैं तो ऱोज ही खेत पर जाता हूँ | बुरी ग्रह दशा मेरा क्या कर लेगी ?" 
इस ज्योतिषी ने हस्तरेखा दिखाने के लिए कहा तो किसान ने बोला, "हाथ वह पसारे जिसे कुछ माँगना हो | मै तो आप जैसों को देकर खाता हूँ |" ज्योतिषी और राजा उसका मुँह देखते रह गये |

कभी भी विकट परिस्तिथि से हार न मानों, बल्कि जितनी भी कठिन परिस्तिथि हो, उतना ही अधिक धैर्य और उत्साह अन्दर से प्रकट करो | तरह-तरह की कोशिशें करो, कई-कई जगह काम करो | कहीं न कहीं से सफलता प्राप्त हो ही जाएगी | 

स्वयं के अन्दर की शक्ति को पहचाने
स्वयं के अन्दर की शक्ति को पहचाने



Share This
Previous Post
Next Post
Gaurav Hindustani

My name is Gaurav Hindustani. I am web designer by profession, but I am author by heart so Hindustani Kranti is a platform for all Authors and poets who write GOLDEN words and have special stories and poetries. You can send any time your words to me at gauravhindustani115@gmail.com.

0 comments: