Monday, May 27, 2019

विद्यार्थी जीवन में ही अपना लक्ष्य निर्धारित करें

In the student life decide your Aim.
विद्यार्थी जीवन, जीवन का सुनहरा काल है | Student life is the Golden period of life.  कुछ सीखने, कुछ जानने, कुछ बनने का सतत सार्थक प्रयास इसी समय में होता है | (The best five qualities of good student.) एक विद्यार्थी के क्या लक्षण होते हैं, वह नीचे श्लोक में दिये हुए हैं | 

  काकचेष्टा वकोध्यानं श्वानिद्रा तथैव च |
 अल्पाहारी गृहत्यागी विद्यार्थी पंचलक्षणम ||

1. काक (कौआ )  चेष्टा - कौआ दूर आसमान में स्वछंद उड़ान भरते हुए भी अपनी तीव्र दृष्टि द्वारा जमीन पर पडे किसी खाद्य पदार्थ को देख चपलतापूर्वक वहाँ पहुँच जाता है तथा अपना लक्ष्य प्राप्त कर लेता है | उसी प्रकार विद्यार्थी भी ज्ञान की प्राप्ति हेतु तीव्र जिज्ञासा रखे तथा अपने लक्ष्य को प्राप्त करता चले | 

2. वकोध्यानं - वगुला तालाब या नदी के किनारे एक पैर पर खड़े रहकर ध्यानमग्न रहता है | मछली आने पर तुरंत उन्हें अपना ग्रास बनाकर पुनः ध्यानस्थ हो जाता है | विद्यार्थी भी विद्या अध्ययन में लगा रहे तथा ज्ञान-विज्ञान की बातों को ग्रहण करते हुए निरंतर प्रगति पथ पर बढ़ता रहे | 

3. श्वान (कुत्ता)  निद्रा- जैसे सोये हुए कुत्ते के पास से धीरे से गुजरने पर भी वह जग जाता है, उसी प्रकार विद्यार्थी भी अपने जीवन लक्ष्य को प्राप्त करने में सदैव सावधान व जागरूक रहे | उसकी नींद सात्विक होनी चाहिए | 

4. अल्पाहारी - विद्यार्थी जीवन साधना एवं तपस्या का जीवन है | एक अध्ययनशील विद्यार्थी सदा सादा -सात्विक तथा अल्प भोजन लेने वाला होता है | तामसिक, राजसिक तथा अधिक आहार वाले विद्यार्थी की जीवनी-शक्ति का बड़ा भाग भोजन पचाने में, नींद, आलस्य तथा तन-मन की बीमारियों का सामना करने में खर्च हो जाता है | विद्यार्थी जीवन की सफलता के लिए स्वास्थ्य के प्रकृतिक नियमों का पालन अति आवश्यक है | जो विद्यार्थी बार बार बीमार होता है वह पढ़ाई में व्यवधान के कारण विषयों के अध्ययन में पिछड़ जाता है | पढ़ाई  नियमित चलनी चाहिए | पढ़ाई में व्यवधान आने से छात्र पढ़ाई में कमजोर रह जाता है | अतः स्वास्थ्य के नियमों का पालन करते हुए उसे स्वस्थ रहना चाहिए | 

5. गृहत्यागी- एक आदर्श विद्यार्थी विद्यार्जन हेतु गृह-त्याग में संतोष करता है विद्या प्राप्त करना तप करने जैसा है, न कि मौज-मस्ती करना | सुखों का त्याग आवश्यक है | विद्यार्थी को सुख और सुखार्थी को विद्या नहीं मिल सकती है | विद्यार्थी जीवन तपस्या का जीवन है | इसमें सुख-सुविधाओं की इच्छा रखना उचित नहीं है | इस आयु में अभावों में, बिना सुख-सुविधाओं के जीवन जीने का अभ्यास कर लेना चाहिए ताकि जीवन में कष्ट आने पर उन्हें सहने का अभ्यास बना रहे | 

एक लड़का सड़क के लैम्प के सहारे पढ़ रहा था | एक परिचित ने कहा, "इतना कष्ट उठाने से तो नौकरी कर लो |" विद्यार्थी बोला, "महोदय ! आप नहीं जानते, यह मेरी साधना का, कसौटी का समय है | कठिनाई है तो क्या, बौद्धिक क्षमताएँ अब न बढ़ाई गई तो फिर ऐसा अवसर कब मिलेगा ?" इस तरह का उत्तर देने वाले महान शिक्षा शास्त्री ईश्वरचंद्र विद्यासागर थे | 

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Gaurav Hindustani

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