Friday, May 31, 2019

"नारी"

मै नारी का सम्मान करती हूँ अपने शब्दों से और सोच से नारी को परिभाषित करने की कोशिश की है, नारी तो प्रेम और समर्पण के लिये ही जानी जाती है, लेकिन कुछ अपवाद छोड़कर, विडंबना ही है कि, कई मायनो में आज भी वह धोखे, छलावा और अपमान की शिकार होती हे ,नि:संदेह नारी स्वयं ये बदलाव ला सकती है,  लेकिन समाज, लोकलाज ,और परिवार नाम की बेड़ियां उसे बाँध देती हैं कटु सत्य है किसी और की क्या बात करें.. हममे से ही कुछ नारियाँ इस एक कप चाय के फैसलों पर आपना जीवन जला चुकी है पर चुप्पी है कि टूटती नहीं... और... जिसने चुप्पी तोड़ना चाहा.. समाज उसे तोड़ देता है.. निगाहों से या तानों और व्यवहार से.. हमने जो समझौते किये हैं अपनी बेटियों को नहीं करने देंगे... जिन्हें हम पढ़ा लिखा समाज समझते हैं वह लोग वास्तव में क्या स्त्री को सामान्य दर्जा देते हैं? हमारे समाज के सामने बहुत बड़ा सवाल है जिसका जवाब देने से ये शिक्षित लोग ही घबराते हैं.. नारी के घर की मालकिन, ग्रहमंत्री, होममिनिस्टर और न जाने किन किन नामों से नवाज़ा जाता है..पर क्या हकीकत में ऐसा है? दीपक तले अँधेरा जैसा किस्सा है.. जो पूरे घर की ताकत कहलाती है कही न कही वही अबला बनाई जाती है | उड़ान भरने की सलाह तो दी जाती है साथ ही पंख काट दिये जाते हैं.. बस एक भ्रम दे दिया जाता है नारी को कि ये रौशनी तुम्हारी सिर्फ तुम्हारी है.. और रितीरिवाज़ो की बेडी पहनाकर संस्कारों की कैद में दफ़न कर दी जाती है |
   "ऐसे आसमान में उड़ाने से बेहतर ज़मी है  |"
  ऐसे उजालों से बेहतर एक चिराग़ की रौशनी है | स्त्रियों को बहुत सी उपाधी दे दी जाती है, किंतु धरातल पर ये उपाधी बिल्कुल भी  सटीक नहीं बैठता,, कहीं कहीं तो आजीविका कमाते हुए भी उसे अपनी ही आमदनी खर्च करने की आजादी नहीं होती,, परम्पराओं के नाम पर बहुत सी बेड़ियां पहना दी जाती है,,सच कहूं तो चाहे शिक्षित समाज हो या अशिक्षित सभी जगह स्त्रियों की स्थिति दयनीय है । बेहद बेबाक़ी से समकालीन परिदृश्य में नारी की वास्तविक स्थिति का वर्णन किया है हमने । कथनी और करनी के विरोधाभास को बेहद संज़ीदगी से रेखांकित करने का प्रयास किया है, वस्तुतः,वर्तमान में नारी के समक्ष अनेक चुनौतियां हैं...सदियों की घिसी-पिटी मान्यताओं और वर्जनाओं को तोड़ने की...जड़ता को हिलाने की..और बुलंदियों को छूने की ! देखते हैं...ज़मीनी हक़ीक़त कब बदलती है?  रचना का मूल अर्थ  रचना को लिखने का उद्देश्य यही है कि ज़मीनी हकीकत को बदलने के लिए शुरूआत और सभी का साथ.. कुछ प्रतिशत योगदान हैं हमारा.. देश का नागरिक और नारी का फर्ज़ अदा करने की छोटी सी कोशिश ..

नारी - प्रिया बतरा
नारी - प्रिया बतरा

Priya Batra 
(Nagpur)
Share This
Previous Post
Next Post
Gaurav Hindustani

My name is Gaurav Hindustani. I am web designer by profession, but I am author by heart so Hindustani Kranti is a platform for all Authors and poets who write GOLDEN words and have special stories and poetries. You can send any time your words to me at gauravhindustani115@gmail.com.

3 comments: