Thursday, May 23, 2019

भगवदगीता एक दिव्य साहित्य

भगवदगीता दिव्य साहित्य है, जिसको ध्यानपूर्वक पढ़ना चाहिए | गीता शास्त्रमिदं पुण्यं यः पठेत् प्रयतः पुमान् - यदि कोई भगवदगीता के उपदेशों का पालन करे तो वह जीवन के दुखों तथाचिन्ताओं से मुक्त हो सकता है | भय शोकादिवर्जितः | वह इस जीवन में सारे भय से मुक्त हो जायेगा और उसका अगला जीवन अध्यात्मिक होगा | 
एक अन्य लाभ भी होता है :
            गीताध्ययनशीलस्य प्राणायामपरस्य च |
            नैव सन्ति हि पापानि पूर्वजन्मकृतानि च |

"यदि कोई भगवदगीता को निष्ठा तथा गम्भीरता के साथ पढ़ता है तो भगवान् की कृपा से उसके सारे पूर्व दुष्कर्मों के फलों का उस पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता" | भगवान् श्री कृष्ण जोर देकर कहते हैं :
           सर्वधर्मान्परित्यज्य मामेकं शरणं व्रज |
                   अहं त्वां सर्वपापेभ्यों मोक्षयिष्यामि मा शुचः ||

"सब धर्मों को त्याग कर एकमात्र मेरी ही शरण में आओ | मैं तुम्हे समस्त पापों से मुक्त कर दूँगा | तुम डरो मत | " इस प्रकार अपनी शरण में आये भक्त का पूरा उत्तरदायित्व भगवान् अपने ऊपर ले लेते हैं और उसके समस्त पापों को क्षमा कर देते हैं | 
                 मलिनेमोचनं पुंसां जलस्नानं दिने दिने | 
                 सकृदगीतामृतस्नानं संसारमलनाशनम ||

"मनुष्य जल में स्नान करके नित्य अपने को स्वच्छ कर सकता है, लेकिन यदि कोई भगवदगीता-रूपी पवित्र गंगा-जल में एक बार भी स्नान कर ले तो वह भौतिक जीवन (भवसागर)  की मलिनता से सदा-सदा के लिए मुक्त हो जाता है |" 
        गीता सुगीता  कर्तव्या किमन्ये: शास्त्रविस्तरै: |
        या स्वयं पद्मनाभस्य मुखपदामाद्विनि: सृता ||

चूँकि भगवदगीता भगवान् के मुख से निकली है, अतएव किसी अन्य वैदिक साहित्य को पढने की आवश्यकता नही रहती | उसे केवल भगवदगीता का ही ध्यानपूर्वक तथा मनोयोग से श्रवण तथा पठन करना चाहिए | 

भगवदगीता एक  दिव्य साहित्य
भगवदगीता एक  दिव्य साहित्य



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Gaurav Hindustani

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