Wednesday, May 29, 2019

अपनी कमजोरियों से लड़े - मजबूत बनें

Fight with Your Weaknesses - Be Strong
संसार में कोई किसी को उतना परेशान नहीं करता, जितना कि मनुष्य के अपने दुर्गुण और दुर्भावनाएँ | दुर्गुण रूपी शत्रु हर समय मनुष्य के पीछे लगे रहते हैं, वे किसी समय उसे चैन नहीं लेते देते |

कहावत है कि "अपनी अकल और दूसरों की सम्पत्ति, चतुर को चौगुनी और मूरख को सौगुनी दिखाई पड़ती है |" संसार में व्याप्त इस भ्रम को महामाया का मोहक जाल ही कहना चाहिए कि हर व्यक्ति अपने को पूर्ण निर्दोष और पूर्ण बुद्धिमान मानता है | न तो उसे अपनी त्रुटियाँ सूझ पड़ती हैं और न अपनी समझ में दोष दिखाई पड़ता है |  इस एक ही दुर्बलता ने मानवजाति की प्रगति में इतनी बाधा पहुँचाई है,  जितनी संसार की समस्त अडचनों ने मिलकर भी न पहुँचाई होगी | 

सृष्टि के सब प्राणियों से अधिक बुद्धिमान माना जाने वाला मनुष्य जब यह सोचता है कि "दोष तो दूसरों में ही हैं, उन्हीं की निंदा करनी है, उन्हें ही सुधारना चाहिए | हम स्वयं तो पूर्ण निर्दोष हैं, हमें सुधरने की कोई जरुरत नहीं |" इस दृष्टिकोण के कारण अपनी गलतियों का सुधार कर सकना तो दूर कोई उस ओर इशारा भी करता है, तो हमें अपना अपमान दिखाई पड़ता है |  दोष दिखाने वाले को अपना शुभचिंतक मानकर उसका आभार मानने की अपेक्षा मनुष्य जब उलटे उस पर क्रुद्ध होता है, शत्रुता मानता है और अपना अपमान अनुभव करता है, तो यह कहना चाहिए कि उसने सच्ची प्रगति की ओर चलने के लिए अभी एक पैर उठाना भी नही सीखा | 

अपने सुखो को बर्बाद कर डालने की ज़िम्मेदारी मनुष्य पर ही है | उचित प्रयत्नों की बात भुलाकर मनुष्य असुरता की ओर बढ़ रहा है |  इसी से वह दुखी है | छुटकारे का उपाय एक ही है कि वह इन पतनोंमुख दुष्प्रवृत्तियों का परित्याग करे और सदाचारी जीवन में सुख और संतोष अनुभव करे |  हमे बाह्य व्यक्ति, पदार्थ और कारण बुरे दिखाई पड़ते हैं, पर यह नहीं सूझता कि अपना दृष्टिकोण ही तो कहीं दूषित नहीं है | आत्मनिरीक्षण इस संसार का सबसे कठिन काम है | अपने दोषों को ढूंढ सकना समुद्र के तल में से मोती ढूंढ लाने वाले गोताखोरों के कार्य से भी अधिक दुष्कर है | अपने दोषों को स्वीकार कर सकना किसी साहसी से ही बन पड़ता है और सुधारने के प्रयत्न तो कोई विरला ही शूरवीर करता है | यही कारण है कि हममे से अधिकांश व्यक्ति दोषदर्शी, छिद्रान्वेषी दृष्टिकोण अपनाएँ रहते हैं और हर किसी को दोषी, निंदनीय, घृणित एवं दुर्भावनायुक्त समझते रहते हैं | परिणामस्वरूप सर्वत्र हमे दुष्टता और शत्रुता ही दीखती है | निराशा और व्यथा ही घेरे रहती है | 

How to fight with your weakness
अतः हमे इन बुराइयों, अपने अन्दर के छुपे दोष रूपी दानव को दूर करना होगा | तभी हम एक सफल, खुशहाल जीवन की परिकल्पना कर सकते हैं | इन दानव रुपी बुराइयों, दोषों को दूर करने के लिए प्रतिदिन श्रीमद्भागवत गीता का पाठ करना चाहिए | भगवान् श्रीकृष्ण के अमृत वचनों का पान करना चाहिए | और प्रेरक कहानिया, उपन्यास आदि पढ़ना चाहिए | हमारी संस्कृति, वेद, पुराणों तथा उपनिषदों को पढ़ना चाहिए जिनमे प्रोत्साहन करने वाले हजारों, लाखों  पवित्र तथ्य, प्रसंग उपलब्ध हैं |

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Gaurav Hindustani

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