Sunday, April 14, 2019

ईश्वर हर जगह होते हैं

ईश्वर हर जगह होते हैं लेकिन उनका एहसास वहां ज्यादा होता है जहाँ सिद्दत होती है |  मै उनके आकार निराकार साकार सब रूप को मानती हूँ , जिन्हे देखकर या महसूस करके वो हमे बताते हैं कि  वो सब जगह हैं | कर्म करना हमारे हाथ में है हमारा ऐसा सोचना कि ये बुरा  कर्म कर भी दिया तो किसी को क्या पता चलेगा ऐसा सोचना गलत है | किसी ने नहीं देखा लेकिन ईश्वर ने देखा अच्छे - बुरे दोनो कर्मों का फल देते है समय समय पर सकारात्मक  विश्वास में ईश्वर को देखती हूँ , प्रकृति की खूबसूरती में देखती हूँ , जिस काम में इंसानियत नज़र आये उस काम में ईश्वर को देखती  हूँ |  ऐसे वो सब काम जिन्हे करते हुए या करने से हम किसी को कोई नुकसान नहीं कर रहे (  किसी को सिर्फ पर्सनल  इरिटेशन  हो तो वो उसकी अपनी थिंकिंग की प्रॉब्लम है  जिसको चेंज नहीं किया जा सकता जबकि उसका या किसी और का वैसे काम करने से कोई भी नुकसान नहीं होता इसमें )   ईश्वर तो वहां नज़र आते हैं जहां किसी  रोते हुए को हसाया जाए जहां जहां किसी की  कोई   ऐसी प्रॉब्लम सॉल्ब की जाये जिसकी वजह से इंसान सही होते हुए भी डिप्रेसन में हो क्योंकि  सोलूशन  न होने से  कोई बड़ा नुकसान होना हो ईश्वर वहां  भी है जहां बुराई पर अच्छाई की जीत हो | इसके अलावा हर अच्छे काम ,अच्छी सोच में ईश्वर है किसी बुरे इंसान को मानवता को शर्मसार करने जैसे बुरे कर्म के लिए , अनुसार फल देने में भी ईश्वर है, ईश्वर उस शब्दों या उस संगीत में भी है हर उस स्टोरी में है जो किसी को बुरे रस्ते से अच्छे रस्ते पर ले आये ईश्वर उस रौशनी में है जो डेली आशा की किरण जगाए मैं  ईश्वर को मां  दुर्गा, गणेश , शिव , कृष्ण  के रूप और उनके अपने कर्मो के बताए हुए संदेश में है ऐसे में गीता पढ़ना पूजा करना ईश्वर  का सन्देश रोज ध्यान में जो मिला है उसका शुक्रिया करना ऐसे ही सही है जैसे गुरुवाणी , नमाज़ पढ़ना, ईशू  के सामने कैंडल जलाकर प्रेयर करना इंसान के सच्चे मन कर्म वचन से ऐसा करना आत्मा का परमात्मा से मिलने जैसा है |

ईश्वर हर जगह होते हैं
ईश्वर हर जगह होते हैं


प्रियंका भण्डारी
    देहरादून
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Gaurav Hindustani

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