Tuesday, April 9, 2019

भारत माता - ज्योति झा

 काली घनी रातों मे
उपर आकाश मे चांद इतराते हैं
और तारे बेखौफ चमचमाते हैं
और यहाँ
लम्बी सुनसान सड़क
संसार के लिए ही है
लेकिन संसार से वंचित है
अपने अकेलेपन की गिरोह मे
जकड़ित है
मानो उसके अकेलेपन को बांटने के लिए
उसी राह पर सिसकियां भरती हुई
एक औरत नजर आती है
दोनों की वेदना कुछ एक सी
औरत जो समर्पित है
लेकिन वंचित है
भयभीत और अकेली उस औरत का रुप
भारत के मानचित्र मे बनी
बीचो-बीच खड़ी
भारत माता की तस्वीर जैसी है
जो अपनी आज की स्थिति पर
करूणालाप कर रही हैं।
उसकी ज्योतिर्मय नेत्रो मे
अब वेदना और धिक्कार का भाव है
स्नेहमयी रूप पर अब
क्रोध और घृणा का छाव है
आदर्श और संस्कृति के बल पर
जो खड़ी थी कभी,
अब किसी सहारे की  खोज मे हैं।
उसकी चोट खाइ अक्स और
केसरीया ,सफेद, और हरे रंग की सारी
जो चिथरो मे बटी हुई हैं,यही !
आज हमारे यहाँ की नारी की
सम्पूर्णतम स्वरूप है
उसकी क्रंदन किसी एक की नहीं
उसकी वेदना किसी एक की नहीं
उसके दामन पर आई खरोंच
किसी एक की नहीं
यह हमारे यहाँ
तकरीबन नारी की कहानी है
जिसका रुप कुछ भारत माता से
मिलता जुलता है

भारत माता
भारत माता

कवियत्री - ज्योति झाjyoti jha
शहर - कोलकाता
शिक्षा - एम.ए (हिन्दी)
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Gaurav Hindustani

My name is Gaurav Hindustani. I am web designer by profession, but I am author by heart so Hindustani Kranti is a platform for all Authors and poets who write GOLDEN words and have special stories and poetries. You can send any time your words to me at gauravhindustani115@gmail.com.

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