Monday, April 29, 2019

समाज में सच्चे प्रेम और वैश्या की भूमिका

जो लोग सिर्फ अट्रैक्शन को प्यार कहते है या इंसान  किसी काम आएगा सिर्फ इस जरूरत को प्यार समझते है उनकी थिंकिंग गलत  है स्टार्टिंग में कोई उनके लिए सब कुछ और लास्ट में कुछ भी नही ; जो लोग फिजिकल रिलेशन बनाने को प्यार कहते है वो भी गलत है  फिजिकल रिलेशन कुछ मायनो में प्यार का सिंबल जरूर है लेकिन सिर्फ फिजिकल रिलेशन बनना ही प्यार होने का प्रूफ देना हो तब सबसे ज्यादा आशिक़ प्रोस्टीटूट्स के  होने चाहिए  |

 लेकिन इन गर्ल/लेडीज के 45-50 वर्ष  के बाद कोई हालचाल पूछने वाला नही होता मज़बूर होकर उनको भीख  मांगकर काम चलाना पड़ता है जो बॉयज/जेंट्स फिजिकल नीड  पूरी करने वहां  जाते है  उनमे इंसानियत भी हो तो वैश्यों और उनके किड्स को भीख मांगते हुए नहीं  दिखते क्योंकि उनको कोई काम पर भी नही रखता इसके अलावा प्यार वो है जो इंसान की आत्मा से हो जो लड़के सच्चा प्यार करते है वो डायरेक्टली  प्रोपोज़ करते है लड़की मना करे शादी करने या रिलेशन बनाने से तब भी लड़का उस लड़की की न बोलने की भी रेस्पेक्ट करता है  |

 वैसे भी किसी भी इंसान  की  रियलिटी तब पता चलती है जब हम उसकी जरूरत या इम्पोर्टेन्ट काम को न कर दे, लड़का बार बार फ़ोर्स करता है रिलेशन बनाने को शादी करने की बात कहकर मेरी नज़र में  ऐसे  लड़के दोस्ती के लायक भी नहीं होते ; ऐसे लड़के सिर्फ लड़की का उपयोग  ही करते है जब मन भर जाता है टाइम पास  करके छोड़ देते है किसी और के साथ भी ऐसा ही करने की तैयारी में रहते है, स्टार्टिंग में शायरी  और अच्छे मैसेज  सेंड करेंगे अपनी दुःख भरी झूठी  कहानी भी बताएंगे अट्रैक्ट करने के लिए | लेकिन ये भी सच है की सब बॉयज ऐसे नही होते ।  जो लोग हमेशा आजमाते रहते है रियल में उनको मालूम नहीं होता कि रियल लव होता क्या है  ? प्यार आजमाने का नाम नही केयर करने का, हमेशा साथ निभाने या दूसरे की ख़ुशी के लिए कुछ करने या दूर होने का एक नाम भी प्यार है | आजमाने के बाद ही जब वो इंसान  रिक्वायरमेंट्स /डिमांड्स पूरी करने लायक लगे तब लास्ट में कहते है कि प्यार हो गया |

 प्यार  वो नही होता ऐसे लोगो ने ही प्यार वर्ड को बिसनेस्स /फरमाइश / जरूरत  बनाकर रख दिया है प्यार तो वो एहसास है जो इंसान की आत्मा से हो जाये इस बात से फर्क नहीं पड़ता कि इन्सान अच्छा है या बुरा है दिखने में भी इंसान कैसा भी हो लेकिन सच्चा प्यार हर किसी से नही होता आजमाने वाले लोगो को रियल लव जल्दी से समझ नही आता और जैसे हर छोटे बच्चे को ईश्वर का रूप माना जाता है ऐसे ही किसी वैश्या की कोख से जन्म लिये बच्चे को घृणित नज़रों से नहीं देखना चाहिए उनमे भी ईश्वर के रूप को स्नेह पूर्वक देखना चाहिए कोई वैश्या भी माता रानी का रूप है दुर्गा, सरस्वती  में स्त्री के किसी भी रूप को अपमान करने योग्य नहीं बताया गया है वो भी देवी का रूप है लोगों को लगता है वैश्या लोगों का घर खराब करती है जबकि ऐसा नहीं घर खराब वो लड़कियां/महिलाएं करती है

 जो किसी शादीशुदा पुरुष की जिंदगी में आकर उन्हें अपने स्वार्थ के लिए फंसाने की पूर्णतः कोशिश करती है; पुरुष चाहे अपनी पत्नी से प्रेम करे या न करे लेकिन किसी लड़की /महिला को किसी दूसरी  औरत का घर खराब करने की कोशिश नहीं करनी चाहिए  ऐसा करने से उन्हें किसी के आंसुओं से बददुवाएं मिलती हैं और जो लड़कियां  शरीफ मासूम लड़कों को दवाब बनाकर उनकी निजी जिंदगी में आने की इसलिए कोशिश करती है कि अपने ऐश आराम पूरे हो पाएं जबकि वो लड़कियां दिल से लड़के का सम्मान भी नही करती सच्चा प्यार होना तो दूर की बात और जो लड़कियां /महिलाएं छोटी सी बात पर सबके सामने अपने पति का अपमान करती है इन तमाम महिलाओं/ लड़कियों से ज्यादा इज्जत में किसी वैश्या को करती हूँ वैश्या यानि जो मज़बूरी में नर्क में धकेल दी गई जिन्हें दूसरा कोई काम नहीं मिलता उनके घरवाले और समाज उन्हें अपनाता नहीं ; जबकि कॉल गर्ल अक्सर वो लड़कियां होती है जो शिक्षित होती है जिनके पास और विकल्प होते है पैसे कमाने को लेकिन वो कम समय में ज्यादा पैसे के लिए या अपनी वासना की गुलाम होकर अपनी इच्छा से धन्दा करती हैं ये पड़े लिखे समाज पर कलंक हैं मेरी नज़र में इन सभी के सामने वेश्या(देह व्यापार की शिकार महिलाएं) पूजनीय है सम्माननीय है पवित्र है क्योंकि वो मज़बूरी में करती हैं उनकी ज़िंदगी एक संवेदनशील  दयनीय है ऐसी सिर्फ 2% देह व्यापार की शिकार लड़की /महिला को कोई अपनाता है वरना 98% लड़कियों/महिलाओं को आजीवन सच्चे प्रेम का एक कतरा भी नसीब नहीं होता इनका सम्मान करना चाहिए और रोजगार के अवसर में इन्हें भी मौका मिलना चाहिए जिससे ये नर्क जैसी जिंदगी जीने को मजबूर न रहें !

वैश्या और समाज


प्रियंका भण्डारी
    देहरादून

Sunday, April 14, 2019

ईश्वर हर जगह होते हैं

ईश्वर हर जगह होते हैं लेकिन उनका एहसास वहां ज्यादा होता है जहाँ सिद्दत होती है |  मै उनके आकार निराकार साकार सब रूप को मानती हूँ , जिन्हे देखकर या महसूस करके वो हमे बताते हैं कि  वो सब जगह हैं | कर्म करना हमारे हाथ में है हमारा ऐसा सोचना कि ये बुरा  कर्म कर भी दिया तो किसी को क्या पता चलेगा ऐसा सोचना गलत है | किसी ने नहीं देखा लेकिन ईश्वर ने देखा अच्छे - बुरे दोनो कर्मों का फल देते है समय समय पर सकारात्मक  विश्वास में ईश्वर को देखती हूँ , प्रकृति की खूबसूरती में देखती हूँ , जिस काम में इंसानियत नज़र आये उस काम में ईश्वर को देखती  हूँ |  ऐसे वो सब काम जिन्हे करते हुए या करने से हम किसी को कोई नुकसान नहीं कर रहे (  किसी को सिर्फ पर्सनल  इरिटेशन  हो तो वो उसकी अपनी थिंकिंग की प्रॉब्लम है  जिसको चेंज नहीं किया जा सकता जबकि उसका या किसी और का वैसे काम करने से कोई भी नुकसान नहीं होता इसमें )   ईश्वर तो वहां नज़र आते हैं जहां किसी  रोते हुए को हसाया जाए जहां जहां किसी की  कोई   ऐसी प्रॉब्लम सॉल्ब की जाये जिसकी वजह से इंसान सही होते हुए भी डिप्रेसन में हो क्योंकि  सोलूशन  न होने से  कोई बड़ा नुकसान होना हो ईश्वर वहां  भी है जहां बुराई पर अच्छाई की जीत हो | इसके अलावा हर अच्छे काम ,अच्छी सोच में ईश्वर है किसी बुरे इंसान को मानवता को शर्मसार करने जैसे बुरे कर्म के लिए , अनुसार फल देने में भी ईश्वर है, ईश्वर उस शब्दों या उस संगीत में भी है हर उस स्टोरी में है जो किसी को बुरे रस्ते से अच्छे रस्ते पर ले आये ईश्वर उस रौशनी में है जो डेली आशा की किरण जगाए मैं  ईश्वर को मां  दुर्गा, गणेश , शिव , कृष्ण  के रूप और उनके अपने कर्मो के बताए हुए संदेश में है ऐसे में गीता पढ़ना पूजा करना ईश्वर  का सन्देश रोज ध्यान में जो मिला है उसका शुक्रिया करना ऐसे ही सही है जैसे गुरुवाणी , नमाज़ पढ़ना, ईशू  के सामने कैंडल जलाकर प्रेयर करना इंसान के सच्चे मन कर्म वचन से ऐसा करना आत्मा का परमात्मा से मिलने जैसा है |

ईश्वर हर जगह होते हैं
ईश्वर हर जगह होते हैं


प्रियंका भण्डारी
    देहरादून

Tuesday, April 9, 2019

भारत माता - ज्योति झा

 काली घनी रातों मे
उपर आकाश मे चांद इतराते हैं
और तारे बेखौफ चमचमाते हैं
और यहाँ
लम्बी सुनसान सड़क
संसार के लिए ही है
लेकिन संसार से वंचित है
अपने अकेलेपन की गिरोह मे
जकड़ित है
मानो उसके अकेलेपन को बांटने के लिए
उसी राह पर सिसकियां भरती हुई
एक औरत नजर आती है
दोनों की वेदना कुछ एक सी
औरत जो समर्पित है
लेकिन वंचित है
भयभीत और अकेली उस औरत का रुप
भारत के मानचित्र मे बनी
बीचो-बीच खड़ी
भारत माता की तस्वीर जैसी है
जो अपनी आज की स्थिति पर
करूणालाप कर रही हैं।
उसकी ज्योतिर्मय नेत्रो मे
अब वेदना और धिक्कार का भाव है
स्नेहमयी रूप पर अब
क्रोध और घृणा का छाव है
आदर्श और संस्कृति के बल पर
जो खड़ी थी कभी,
अब किसी सहारे की  खोज मे हैं।
उसकी चोट खाइ अक्स और
केसरीया ,सफेद, और हरे रंग की सारी
जो चिथरो मे बटी हुई हैं,यही !
आज हमारे यहाँ की नारी की
सम्पूर्णतम स्वरूप है
उसकी क्रंदन किसी एक की नहीं
उसकी वेदना किसी एक की नहीं
उसके दामन पर आई खरोंच
किसी एक की नहीं
यह हमारे यहाँ
तकरीबन नारी की कहानी है
जिसका रुप कुछ भारत माता से
मिलता जुलता है

भारत माता
भारत माता

कवियत्री - ज्योति झाjyoti jha
शहर - कोलकाता
शिक्षा - एम.ए (हिन्दी)