Thursday, March 28, 2019

"बेटी बचाओ"

"बेटी बचाओ"
बेटी मानो माँ के गर्भ में कह रही हो..
माँ मुझे मत मारे,मुझे भी दुनियां देखना है..
माँ मेरा क्या कसूर है..
जन्म लेने से पहले ही मुझे मारने की सोच रहे हो..
माँ एक बार मुझे इस संसार में आने दे माँ..
मै आपका गर्व बनूंगी...
मुझे खुली हवा में सांस लेने दो..
माँ मत मारे मुझे मत मारो..
बेटी बचाओ..वंश बढाओ

भ्रूण हत्या न करें.. बेटी को जन्म दे.. कल किसी की बेटी आप के परिवार की बहू बनेगी..जो आप के वंश को आगे बढ़ाएगी.. नहीं तो बेटा कुँवारा रखे.. वंश की बेल सूख जाएगी..बेटी,बेटों से किसी बात में कम नहीं है.. सोचो गर हर कोई बेटी को जन्म देने से कतराता रहा तो आप के बेटों से शादी कौन करेगा.. शायद पढ़ने में आप को हमारी बातें बेवकूफी भरी लग रही होगी.. पर ये कडवी सच्चाई है बस एक पल सोच कर देखो.. बेटियाँ बहोत प्यारी होती हैं.. बेटी बचाओ... मेहरबानी करें बेटी बचाएं..
#बेटी_बचाओ_वंश_बढाओ ...सच बेटियाँ होती ही प्यारी हैं.. हमारी शान है.. हमारा सम्मान हैं बेटियाँ..... दहेज हम देंगे नही.. रेप के डर से गर्भपात नहीं करेंगे ...बेटी के जन्म को नहीं रोकना है हमें ..रेप को रोकना है.. दरिंदों को सबक देना है उस चींज को ही कांट देंगे..जिसे वो मर्दानगी समझता है.. जब ऐसा दो चार के साथ होगा तब अकल ठिकाने आयेगी.  
    बस बेटियों को जन्म दिजिए.. वो अपना भविष्य बनाने में सक्षम है.. साथ ही बेटियाँ ही मरहम है, संजीवनी है... बेटी बचाए 
🙏🙏🙏🙏🙏


"बेटी बचाओ"
"बेटी बचाओ"

Priya Batra
(Nagpur)

Thursday, March 21, 2019

"बेटियों की नहीं कोई जात "

बेटियों के साथ गलत न हो... ये ज़रूरी है ना की किसकी बेटी और कहा गलत हुआ... जात पात से उपर उठे बेटियों की रक्षा करें..

एक एक कविता हमारे संस्कारों को दृढ़ बनाती है। कोई कह सकता है कि बेटियों पर कविताएँ लिखने से समाज में बेटियों को वह सम्मान मिल जाएगा क्या। लेकिन ऐसा हरगिज़ नहीं है हमारा लिखा हुआ एक भी शब्द बेकार नहीं जाता क्योंकि वह शब्द कम से कम हम पर तो असर करता ही है। हम से समाज का निर्माण होता है।
तो आइए बेटियों के लिए आज अपने शब्दों से प्रेम वर्षा करें|

बिटिया के जन्म की..
 ख़ुशी कैद भी न हुई आँखों में के,
विदाई की तस्वीर नज़र आने लगी
नम आँखों में बाबुल की,
तकदीर कैद नज़र आने लगी
अजब सी कशमकश थी,
बेटी के जन्म की
खुशी से होंठ मुस्कुराए
विदाई सोच मनभरमाए
और आँखे अश्क बहाने लगी
बेटियों की नहीं कोई जात
बेटियाँ तो हैं रब की सौगात
जात पात से उपर उठे,बेटियों की रक्षा करें|

"बेटियों की नहीं कोई जात "
"बेटियों की नहीं कोई जात "
Priya Batra
(Nagpur)

Saturday, March 16, 2019

बचपन

बचपन

कुछ मंजिले मिल जाती है , जीवन के अनोखे राहो पर
कुछ कलिया भी खिल जाती है, पत्तो के प्यारे बाहों पर
नैनो की चंचलता थी , जो अब पतझड़ की वो बात है,
यारो की यारी में बीते , बस वही रात ही रात है...
हलचल सी मच जाती थी ,और ख़ुशी छलक सी जाती थी
गायो की मधुर आवाजे थी, और कोयल भी तो गाती थी
क्या मनमोहक वो दिन थे जब चिड़िया स्वर चिल्लाते थे
मिट्टी  के पर्वत में खोकर  हम मस्त मगन और गाते थे...
कोई फिकर नहीं था जीवन का , बस वर्तमान में जीते थे
जीवन की डोरे छोटी थी , सम जूते जैसे फीते थे
ऊँचा बनने की ख्वाईश थी , और कंधो पर भार उठाना था
कहाँ पता था आगे हम , पीछे की सोच जमाना था
भूत रहित हम भूल चले , बस भविष्य से अब आँख मिलाता हूँ
मनमौजी बचपन की यादे लेकर , मै बड़ा बना पछताता हूँ...!!!


प्रतिकूल प्रेम

पीर समीर व्यथा का हो तुम तो एक ऐसी सार प्रिये !
उज्ज्वल -  उत्तम  प्रेम प्यार का हो तुम तो व्यापार प्रिये!!
अनुपम ऋणि हुआ मै तो बस तेरी दृष्टित छाया से!!
प्यार - मोह का बंधन समझो ,बस उलझ गया मै माया से!!
तेरा निसदिन रूप देखकर अंतर मन में उलझा हूँ,
वाणी - वाक् देख मै टिकता रेशम जैसे सुलझा हूँ.!!


बचपन
बचपन



कवि - शिवम् तिवारीshivam tiwari kavi
शहर - प्रयागराज
ईमेल - shivam9532096168@gmail.com


Thursday, March 14, 2019

"बेटी बोझ नही "

क्या बेटी की विदाई के बाद हमारी कोई जिम्मेदारी नही ??? बेटी पर तो ये जिम्मेदारी शब्द का बोझ आ जाता है कि अब वो ही तुम्हारा घर है. माँ पिता की इज्ज़त पर आंच न जाने देना... क्या हम विदा करके मुक्त हो जाते हैं कि चलो एक जिम्मेदारी ख़त्म ???? जब बेटी पापा कह कर आवाज़ दे..
ये मुमकिन नही उस सुकूं के एहसास को अल्फाज़ दे...मन के भावों से सुसज्जित कर मासूम सी रचना पेश करने की कोशिश है !

सचमुच बेटियों के बिना घर खंडहर प्रतीत होता है!
एक दिन नन्ही कली अपने ससुराल चली जायेगी...
यह सोचकर मन व्यथित हो उठता है।
नन्हीं प्यारी बेटियाँ कब बड़ी हो जाती हैं...
पता ही नहीं चलता!
अपने ज़िगर के टुकड़े को कुछ सालों बाद 
अनजान हाथों में बिलकुल नये परिवेश में भेजने की कल्पनामात्र से हीं दिल भारी हो जाता है....
ढेर सारे संशय मन में घर कर जाते हैं....!
बेटी को विदा करने का विचार ही भावनाओं के तार झंकृत कर देता है  
ये भाव वो ही समझ सकता है जिन्होंने बेटी को जन्म दिया है... 
लिखते वक्त भी यूं प्रतीत हो रहा है 
जैसे आज ही हमारी बच्ची की विदाई हो... 
मन भर आया.. विडंबना है अपने ही हाथों से अपने कलेजे के टुकड़े को हम अंजान हाथों में सोप देते हैं.. 
कहते हैं बेटी पराई है... 
दिल के टुकड़े को खुद से अलग करें ये रीत किसने बनाई??

Priya Batra
"बेटी बोझ नही "
Priya Batra
(Nagpur)

Saturday, March 9, 2019

"जी चाहता है तुम्हारा बलात्कार करूं. ."..

बात शर्म की है पर करनी तो पड़ेगी
आप सभी शीर्षक पढ़ कर अचंभित होंगे की ये कैसा विषय.. साथ ही सोच रहे होंगे की बेहद अश्लील औरत हैं हम.. कोई भी होगा तो यही सोचता... ये सब लिखते वक़्त हमारी भी रूह कांपी साथ ही मन भी कचोटने लगा.... फिर सोचा हम बस इस विषय में सोचते ही पीछे हट जाते हैं.. जिस किसी बच्ची, औरत मां, बहन के साथ ये सब होता है वो किस तकलीफ़ से गुज़रती होगी.. जिसका हम अंदाज़ा भी नहीं लगा सकते.. शरीर तो शरीर आत्मा भी घायल हो जाती होगी.. घायल क्या ज़िंदा लाश बन जाती होगी. शीर्षक लिखते वक़्त हमारी चेतना को झकझोर गया जैसे काटो तो खून न ..सोचना ,लिखना मात्र ऐसी स्थिति बना देता है तो ये विकृत कृत्य क्या दुर्दशा करता होगा उस मासूम की।
ऐसे पुरुष समाज में जीने लायक तो छोडि़ए मरने लायक भी नहीं होते।इन्हें भरे चौराहे पर गर्म लोहे से जख्म दे देकर मार देना चाहिए।
एक सलाह उन मां पिता के लिए भी जो बेटी को कमजोर बनाकर रखते हैं।बेटियों को सशक्त, मजबूत, स्वावलंबी बनाने की आवश्यकता है।जब भी समाचार सुनो तो 100 खबरों में से 6 तो नाबालिग के साथ बलात्कार  की होती हैं..
तो................... ..
जी चाहता है तुम्हारा बलात्कार करूं
सरेआम चौराहे पर मर्दानगी तार तार करूं
तेरे अंगों पर मधुमक्खी छोड़ तेरा बलात्कार करूं
ये ना सोच की तुम संग हमबिस्तर होना है
बस तुझे आखिरी और गहरी नींद सुलाना है
जैसे तुम लड़की देख डस लेते हो ठीक वैसे ही सांप बिच्छुओं से तेरे जिस्म को लहू लुहान करूं
जी चाहता है तुम्हारा बलात्कार करूं
राह गुज़रती लड़की को जिन वहशी निगाहों से देखते हो उन आँखों को अपने नाख़ूनों से नोच दूं तुझे नग्न कर तेरे यौनांग पर अंगार रख दूं..बलात्कार करूं
तेरी निगाहों की भूख को गर्म सलाखों से मिटा दूं
लड़की हूं कोई चाट कचौड़ी नहीं की झपट लो.. लाल मिर्च तुम्हारे अंगों में भर दूं.. जब अपनी आबरु बचाती है औरत गर करती इंनकार तो तुम्हारी जीभ से बरसते है अंगार.. ऐसी जीभ का तेजाब से संहार करूं
जी चाहता है तुम्हारा बलात्कार करूं
तेरी मर्दानगी के कर टुकड़े टुकड़े चील कौओं कै आहार करूं... ..
औरत को कमज़ोर न समझ एक सुई से तेरा बलात्कार कर तेरा पुरूषार्थ जार जार करूं.....



हम औरतें वॉलपेपर पर अपनी तस्वीर लगाते हैं
तस्वीर तो वही रहेगी तुम अपनी नज़र और नज़रिया बदलो...नहीं तो....
साथ कुछ मामले हमारे सामने आए हैं.. जिनमें लड़को के साथ भी गलत होता है जो नादान होने की वज़ह से अपनी पीडा सांझा नहीं करते.. नाम तो बता सकतें पर एक उधारन  के तौर पर लिख सकतें हैं.. साथ कम उम्र के लड़को को  सचेत कर सकते हैं. युवा वर्ग में भी कुछ चीज़े सामने आई हैं ..माताओं को भी जागरूक होना चाहिए कि सिर्फ बेटी नहीं बेटों का भी ख़्याल रखें...  जान पहचान  या रिश्तेदार के घर छोड़ कर न जाए या बच्चे की मनोदशा को समझे.. जाने..
 सलाम आप सब को जो.. इतना नग्न शीर्षक होने के बावजूद.. आप सब ने इस रचना को वक्त दिया बस गर सब मिलकर अपने इर्द गिर्द नज़र रखे की कोई इस तरह की हरकत न कर सके.. समाज के प्रति हमारे भी फर्ज हैं.. साथ ही हम ये सोचे की हमारी बच्चियां भी बाहर अकेली जाती हैं तो कोई ना कोई उनकी रक्षा कर रहा होगा... हमारे सामने जो बहन बेटी है वो हमारी ही है ..बस गर हर कोई ऐसा करे तो एक दिन ऐसा आएगा की इस विषय पर लिखने का मौका ही नहीं मिलेगा.. तब जाकर हमारा लिखना सफल होगा..  हम सबसे पहले खुद को सुधार सकते हैं.. हम कभी ऐसा न करें और न ऐसा होने दें...

🙏🙏हाथ जोड़ कर विनती है रचना की गहराई को समझे.. साथ दिजिए ..... जागृति में साथ बनाए रखें... 🙏🙏

Priya Batra
"जी चाहता है तुम्हारा बलात्कार करूं. ."..
Priya Batra
(Nagpur)

Sunday, March 3, 2019

एयर स्ट्राइक से पहले मोदी ने खरीदा भारतीय मीडिया ?

दिन प्रतिदिन मोदी की बढती लोकप्रियता मोदी विरोधियों ( कांग्रेस, सपा, बसपा और आम आदमी पार्टी) के गले का काँटा बनी हुई है | मोदी का हर एक काम इतिहास रच देता है और विजय ध्वजा लहराता देता है | आज मोदी का नाम गाँव के बच्चे से लेकर अमेरिका के डोनाल्ड ट्रम्प तक की जुबाँ पर बना हुआ है | जो विरोधियों को बेहद आश्चर्यजनक और शोध का विषय है | अपने पहले दिन से ( जब  शपथ ग्रहण की ) ही देश विदेशों में अपने नाम का डंका बजाने वाले मोदी दुनिया के लिए एक मार्ग दर्शक के रूप में बहुत तेजी से उभर के आये हैं | आज दुनिया के वे नेता भारत के इस अनोखे प्रधानमंत्री की अगवानी के लिए उत्सुक रहते हैं जो कल तलक भारत को अनदेखा करते थे | 

 हिन्दुस्तान के इस नये रूप को मोदी विरोधी पचा नहीं पा रहें हैं और यहाँ तक कह देते हैं कि मोदी ने मीडिया भारतीय को खरीद लिया है इसलिए मीडिया मोदी का बखान करती रहती है | पर सच तो ये है कि उनके काम करने का ढंग बेहद अलग है जो देश तो देश विदेशों को भी अपनी ओर आकर्षित करती है | मोदी ने पहले सर्जिकल स्ट्राइक की तब भी लोगों ने उनसे प्रमाण मांगे और अभी एयर स्ट्राइक की तब भी मंदबुद्धि नेता सराहनीय कार्य का भी प्रमाण माँग रहें हैं और आलोचना कर रहें हैं | जब तक भारत में ऐसी राजनीति रहेगी, ऐसे मुर्ख नेता रहेंगे तब तक भारत के माथे पर शर्मिंदगी के दाग लगते रहेंगे | 

एयर स्ट्राइक से पहले मोदी ने खरीदा भारतीय मीडिया ?


पाकिस्तान में घुसकर एयर स्ट्राइक कर  वीरों ने जो साहस का परिचय दिया वो एतिहासिक है इस पर भी कुछ मुर्ख नेताओं ने अपनी गन्दी जुबान का प्रयोग किया | जो पूरे भारत के लिए निंदनीय है | पाकिस्तान से  अभिनन्दन को महज दो दिन में वापस बुलाना मोदी की बजह से ही सम्भव हो सका है | वरना कांग्रेस सरकार ने 70 साल भारत पर शासन किया और पाकिस्तान के हमलों पर सिर्फ़ शोक किया उनके जबाब में सिर्फ़ पत्राचार किया | हमने कई बार अपने वीर जवानो को खो दिया और कांग्रेस मौन साधे रही |  भारतीय जनता पार्टी पहली सरकार है जो पाकिस्तान को उसी की भाषा में जबाब देती है |

लेकिन  यदि मीडिया मोदी , बीजेपी की सराहना करता है तो विरोधी  और पप्पूवादी कहते हैं कि मोदी ने मीडिया को खरीद लिया है

Saturday, March 2, 2019

मोदी के आने से भारत को हुआ भारी नुकसान

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के आने से भारत को भारी नुकसान हुआ है | मोदी जी के प्रधानमंत्री शपथ लेने के बाद बस दो ही चीजे तेजी से बढ़ीं |  पहला मोदी भक्त और दूसरा मोदी विरोधी | मोदी जी चाहें कितना भी बुरा करें लेकिन मोदी भक्त उसको बढ़ा चढ़ा कर ही पेश करते हैं | मोदी जी के छोटे से छोटे काम को भी आसमान पर चढ़ाकर ढिढोरा पीटने लगते हैं वहीँ दूसरी ओर मोदी कुछ भी अच्छा कर लें  कितना भी अच्छा क्यों न कर लें परन्तु मोदी विरोधी उनके प्रत्येक काम की आलोचना ही करतें हैं | जैसे यदि उनकी प्रशंसा कर देंगे तो मानों वे लोग नरक  भेज दिये जायेंगे |

मोदी विरोधी और मोदी भक्त दोनों ही देश के लिए तथा समाज के लिए नुकसानदायक हैं ; मोदी भक्त और मोदी विरोधी दोनों ही जातिवाद को बढ़ावा देते हैं धर्मवाद को बढ़ावा देते हैं | मोदी विरोधी हमेशा यही राग अलापते नज़र आते हैं कि ये सरकार सामान्य जाति , पिछड़ी जाति की सरकार हैं ; भाजपा सरकार हिन्दूवादी सरकार है | विरोधी यही कहते दिखते हैं कि  मोदी सरकार अनुसूचित जाति के लिए कुछ नहीं कर रही है, मुसलमानों के लिए कुछ भी नहीं कर रही है | वे तो यहाँ तक कह देते हैं कि मुसलमान भयभीत हैं और सुरक्षित नहीं हैं इस सरकार में | 

यदि मोदी भक्तों की मानें तो भाजपा सरकार सबका साथ सबका विकास की सरकार है | लेकिन यदि ये सत्य है फिर बाकी जातियों, धर्मो के लोग सन्तुष्ट क्यों नहीं हैं ; आखिर कहाँ है खोंट ? मोदी भक्तों को लगता है कि पुरानी सरकारें (मायावती, अखिलेश) सिर्फ़ और सिर्फ़ जातिवाद फैलाकर गयीं | उनके अनुसार मायावती जी को पूरे प्रदेश में सिर्फ़ अनुसूचित जाति ही गरीब, असहाय दिखाई देते थे वहीं अखिलेश सरकार को केवल मुसलमान गरीब और लाचार दिखाई दिये | इनके लिए बाकि जातियां और धर्म सम्पन्न प्रतीत होते थे | इसलिए शेष जातियों  के लिए कुछ नहीं किया |

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी


किन्तु दोनों ही सन्दर्भ में देश ही गर्त में जा रहा है देश की एकता खत्म होती दिख रही है | दोनों ही (मोदी भक्त और मोदी विरोधी) देश में जातिवाद तो फैला रहे हैं | सोशल मीडिया (facebook, twitter and whatsapp) पर ये लोग एक दूसरे पर खूब कीचड़ उछालते हैं ; मन माने पोस्ट शेयर करने, उन पर भद्दे कमेंट करने से भी नहीं चूकते हैं | जरा भी नहीं सोचते हैं कि इनकी ऐसी हरकतों से देश पर क्या प्रभाव पड़ेगा ?

"हां औरत हूं पुरूष कहा हो पाती "

हां औरत हूं, पुरुष कहा हो पाती
मासूम हूं, पत्थर दिल कहा से लाती
ऐसा नहीं की मुझ में समझ नहीं
पर पुरूष को कहा समझा पाती
माना के पुरूषार्थ है तुम में
पर पुरूष को जन्म एक औरत ही दे पाती
औरत हूं घर पर जान लुटाती
सबके लिए अपना भविष्य दांव लगाती
हां औरत हूं, पुरूष कहा हो पाती
मासूम हूं पत्थर दिल कहा से लाती
सबकी जरूरतों के लिए,ख़्वाहिशों की बली चढ़ाती
तिल तिल कर खुद की ख़ुशी मार जाती
बिना गलती के हर वक़्त क्षमा चाहती
पर पुरूष के गुनाह पर अग्नि परीक्षा कहां ले पाती
हां औरत हूं,कहा पुरुष को जुए में हार पाती
परिवार के सम्मान की ख़ातिर चंडी बन जाती
बच्चों पर आये आंच तो अभय खड़ी हो जाती
औरत हूं,..हां औरत हूं पुरूष कहा हो पाती
पुरूष को दांव कहा लगाती? खुद मिट जाती
हां औरत हूं.... पुरूष कहा हो पाती.....

"हां औरत हूं पुरूष कहा हो पाती "
"हां औरत हूं पुरूष कहा हो पाती "

Priya Batra
(Nagpur)

Friday, March 1, 2019

"गर ना मुस्कुराते तो लोग तमाशा बना देते "

गर ना मुस्कुराते तो लोग तमाशा बना देते
दुनिया बाज़ार है यहां जज़्बात भी बिकता है
जो चेहरे पे चमकता दिखता है
वो हर आँसू भी बिकता है
तसल्ली तो बेहिसाब मिलती है यहां
दिल में दबी चुटकी होठों तले दिखती
मज़ाक बन गया दर्द पर हम मुस्कुरा गए
गर ना मुस्कुराते तो लोग तमाशा बना देते
दुअाए देने वालों का यकीन क्या करें
हर दुआ में छिपा खंजर
बना गया यकीं की ज़मी बंजर
गर बुत बन खडे रह जाते
गर ना मुस्कुराते तो तमाशा बन जाते
कोई थपथपा गए पीठ
कोई पीछे से वार कर गये मेरे
कोई और नही ये जाने पहचाने थे चेहरे
तब.. हां तब बस खुद को तन्हा ना बनाया
और खुद पर ही मुस्कुराया
गर ना मुस्कुराते तो लोग तमाशा बना देते
हमारी मुस्कुराहट से देखने के नज़रियें बदल जायेंगे
कभी किसी पर यकीन नही आया बस तन्हाईयो को अपनाया
ये वक्त मेरा सिर्फ मेरा रह गया
आज मेरी हार ही मुझे जीने की वज़ह देती
मेरी मुस्कुराहट लोगों के सीने में वार करती
इसलिए तो कहती हूं मुस्कुराए जनाब..
वरना लोग तमाशा बना देंगे
हमारे दर्द से कहा किसी को फर्क पड़ता
गर ना मुस्कुराते तो लोग तमाशा बना देते....

Priya Batra
"गर ना मुस्कुराते तो लोग तमाशा बना देते "

Priya Batra
(Nagpur)