Friday, February 1, 2019

उसमे मिश्री के कुछ दाने थे..( Lost her )

(बैग खो जाने के सन्दर्भ में ....)

उसमे मिश्री के कुछ दाने थे,
कवितायें, गज़ल और कुछ गाने थे ।
मम्मी की मीठी बातें थी,
और पापा के कुछ तानें थे ।

एक बर्तन में खीर थी जिसमें,
गोले ताल मखाने थे ।
एक कागज में दो लड्डू थे जो,
मंजिल पर जाकर खाने थे ।

उसमे बचपन की एक फोटो थी,
जिसे हर बार देख हर्षाने थे ।
उसमे दादा-दादी के सपने थे जो
हमको अपनी आँखों में बसाने थे ।

उसमे किसी कि कसमें थीं, वादे थे
जो हमको उम्र भर निभाने थे ।
कुछ नयी नयी यादें थी और कई
उसके खत रखे पुराने थे ।

जगी-जगी कई रातें थी और
कई दिन रखे सुहाने थे  ।
वो खत भी उसमे चले गये, हर रात
जो रखे हमने सिराहने थे ।

उसमे वफा के मरहम भी थे,
जो वेबफाई की चोटों पर लगाने थे ।
कई अनसुलझे सवाल भी थे,
जो तन्हाई में बैठ लगाने थे ।

एक पॉकेट में महके फूल भी थे
जो उसके बालों में सजाने थे ।
कुछ तरल से पिघलते रिश्ते थे ,
जो सांचों में ढाले जाने थे ।

उसमे मिश्री के कुछ दाने थे,
कवितायें, गजल और कुछ गाने थे ।
मम्मी की मीठी बातें थी,
और पापा के कुछ ताने थे ।

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 गौरव हिन्दुस्तानी

#Memories, #Safar, #Relations


उसमे मिश्री के कुछ दाने थे..



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Gaurav Hindustani

My name is Gaurav Hindustani. I am web designer by profession, but I am author by heart so Hindustani Kranti is a platform for all Authors and poets who write GOLDEN words and have special stories and poetries. You can send any time your words to me at gauravhindustani115@gmail.com.

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