Saturday, February 2, 2019

शोर शराबा शहर में ...( Ghazal )

शोर शराबा शहर में शब भर हुआ
कराहाता रहा इक शख्स पर नसीब न मरहम हुआ ।

की तो बहुत मेरे शहर ने गुफ्तगूँ फिर भी
अमन - ओ - चैन न मुकम्मल हुआ ।

दिल शीशों की तरह तोड़कर चल दिया
मेरा मेहबूब इतना संग दिल हुआ ।

बहा दिया सब तन्हाइयों में,
पैदा जब भी मेरी आँखों में समन्दर हुआ ।

क्यों चढ़ रहा है सीढ़ियाँ उस इश्क की “गौरव”
बदौलत जिसकी तू बद से बदतर हुआ ।
.
.
.
.

 गौरव हिन्दुस्तानी

#Ghazal, #Love, #Memory, #Her


शोर शराबा शहर में  ...
शोर शराबा शहर में  ...





Share This
Previous Post
Next Post
Gaurav Hindustani

My name is Gaurav Hindustani. I am web designer by profession, but I am author by heart so Hindustani Kranti is a platform for all Authors and poets who write GOLDEN words and have special stories and poetries. You can send any time your words to me at gauravhindustani115@gmail.com.

0 comments: