Friday, February 1, 2019

मैं काँटों का हमराही हूँ ...(Love Poem)

मैं काँटों का हमराही हूँ,
तुम हो पुष्प पथिक,
तुम ही बतलाओ कैसे रख्खूँ प्रेम प्रस्ताव,
मैं तुम्हारे सम्मुख ।

महल-कोठियाँ दास तुम्हारे,
मैं झोपड़ियों का सेवक,
तुम पूर्णिमा की श्वेत चाँदनी,
मैं अधजली राख की सम्पूर्ण कालिख,
तुम ही बतलाओ कैसे रख्खूँ प्रेम प्रस्ताव,
मैं तुम्हारे सम्मुख ।

तुम प्रभात की पहली किरन,
मैं संध्या का अस्त सूरज,
तुम मन्द सुगंधित खुशबू हो,
मैं गुमनाम हवाओं का रुख
तुम ही बतलाओ कैसे रख्खूँ प्रेम प्रस्ताव,
मैं तुम्हारे सम्मुख ।

तुम सतरंगी सावन हो,
मैं रंगहीन मौसम हूँ,
तुम वेद-पुराण सी ज्ञानी हो,
मैं तो निरा हूँ मूरख
तुम ही बतलाओ कैसे रख्खूँ प्रेम प्रस्ताव,
मैं तुम्हारे सम्मुख ।

तुम संयोग श्रृंगार की सुन्दर नायिका हो,
मैं वियोग श्रृंगार का भटकता हूँ नायक,
तुम उत्सवों का हर्ष-विनोद हो,
मैं मृत्यु-शैय्या का केवल दुःख
तुम ही बतलाओ कैसे रख्खूँ प्रेम प्रस्ताव,
मैं तुम्हारे सम्मुख ।

तुम पवित्र बहने वाली गंगा-जमुना हो,
मैं स्थायी जलाशय-पोखर हूँ,
 तुम गीता-सी पवन पुस्तक हो,
मैं तो हूँ बस कोरा एक बरख
तुम ही बतलाओ कैसे रख्खूँ प्रेम प्रस्ताव,
 मैं तुम्हारे सम्मुख ।
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 गौरव हिन्दुस्तानी

मैं काँटों का हमराही हूँ ...

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Gaurav Hindustani

My name is Gaurav Hindustani. I am web designer by profession, but I am author by heart so Hindustani Kranti is a platform for all Authors and poets who write GOLDEN words and have special stories and poetries. You can send any time your words to me at gauravhindustani115@gmail.com.

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