Saturday, February 2, 2019

कोई दिल में जब उतरता है ...( Ghazal )

कोई दिल में जब उतरता है
क्या खबर थी फिर दिल नहीं संभलता है ।

रौशन रहे मेहबूब का घर हर लम्हा
अब दिल शाम - ओ- सहर चिराग सा जलता है ।

तुम्हारी याद में इस तरह से रिसते हैं अश्क मेरे
जिस तरह से जलकर मोम पिघलता है ।

तुम आओ तो थम जाये ये वक्त मेरा
अकेला हूँ इसलिये बेवजह हाथों से फिसलता है ।

लाख छुपा ले रात उसको अपनी पनाह में, लेकिन
सुबह की आवाज पर सूरज फिर निकलता है ।

क्यों परेशां है इश्क में इतना कि रात भर
कभी हाथ तो कभी आंख मलता है ।

आ बैठ घड़ी भर बातें करें कि बात से
हर बात का हल निकलता हैं ।

उछाले कीचड़ मोहब्बत में कोई तो ये ज़हन में रख
खुशबुओं का कमल कीचड़ में ही खिलता है ।

हकीकत जानना हो “गौरव” तो सीरत देख ,
सूरत से शख्सियत का पता कहाँ चलता है ।

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 गौरव हिन्दुस्तानी

#Ghazal, #Love, #Memory


कोई दिल में जब उतरता है  ...

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Gaurav Hindustani

My name is Gaurav Hindustani. I am web designer by profession, but I am author by heart so Hindustani Kranti is a platform for all Authors and poets who write GOLDEN words and have special stories and poetries. You can send any time your words to me at gauravhindustani115@gmail.com.

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