Friday, February 1, 2019

कफ़न बाँध लो देशवासियों ...(Deshbhakti Poem)

कफ़न बाँध लो देशवासियों दो मेरा कर्ज़ उतार,
ले लो हांथो में तिरंगा और तेज करो तलवार ।

दागो गोली उनकी छाती पर, जो हैं सरहद के पार,
कलम कर दो सर उन सब के अब जो उठायें सिर इस पार ।

हमारी खामोशी को वो न समझे कमजोरी,
सीना छलनी हो जायेगा, जो हमने खींची बन्दूक की डोरी ।

चंद धमाकों से डर जाये हम इतने नहीं कमजोर,
जीना मुश्किल कर देंगे उनका, जो देखा तिरंगे की ओर ।

अपने तिरंगे के रंग से उनके पोता है कपड़ों को,
अपनी ज़मीन को देकर उनकी सींचा है नींवों को ।

कर दो बेघर अब उनको, उखाड़ो ये जमीनी तार,
ले लो हांथो में तिरंगा और तेज करो तलवार ।

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 गौरव हिन्दुस्तानी

कफ़न बाँध लो देशवासियों ...



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Gaurav Hindustani

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