Sunday, September 2, 2018

हे ज्ञान की देवी ...

हे ! ज्ञान की देवी,
मेरे जीवन का लक्ष्य प्रदान कर,
खड़ा अज्ञानी मैं इन ज्ञान के पथों पर,
जो हो सही वही “विकल्प” प्रदान कर ।

हे ! हंस वाहिनी माँ,
हर लो मेरे मन के अँधियारेे को,
“शरद” पूर्णिमा की शीतल “चाँदनी” प्रदान कर,
उड़ सकूँ जहाँ मैं अनन्त पंखों को लेकर,
ऐसा विशाल “आकाश” प्रदान कर ।

हे ! वीणा वादिनी माँ,
मेरी वाणी हो “सविता” के कलरव जैसी,
मन्द-मन्द वो संगीत प्रदान कर,
हजारों कामदेव फीके हों तुलना में मेरी,
ऐसी मुझको “प्रियंका” प्रदान कर ।

हे ! कमल वासिनी माँ,
सुगन्ध फैलाये बस तेरे नाम की,
ऐसा “नीरज” पुष्प प्रदान कर,
फैलाये ज्योति तेरी भक्ति की,
ऐसी “अंशु” प्रदान कर ।

हे ! ज्ञान दायिनी माँ,
जगमगाता रहूँ “कहकशाँ” सा गगन दीप में,
ऐसी पूनम प्रदान कर,
न भूलूँ कभी तेरा वंदन करना,
ऐसा मुझको “मनीष” प्रदान कर ।

हे ! श्वेताम्वरी माँ,
तेरा चित्र बनाऊँ “मोनालिषा” से सुन्दर,
मेरे करों को ऐसा समृध प्रदान कर,
तन में हो वीरता “राजपूत” जैसी,
बस ऐसा तन को रक्त प्रदान कर ।

हे ! विश्व स्वरूपा माँ,
न रहूँ अछूता अमर प्रेम से,
ऐसा सरल “प्रेमी” प्रदान कर,
नियतांक रहे सदा उसका प्रेम,
ऐसा मुझको वो “चन्द्र” प्रदान कर ।

हे ! सुर स्वरूपा माँ,
बोलूँ मैं सदा “अमित” “सत्य”,
ऐसा मुझको विश्वास प्रदान कर,
बनूँ सबका मैं “सुमित”,
ऐसी मुझको प्रकृति प्रदान कर ।

हे ! सरस्वती माँ,
तेरा ही दास बनूँ मैं,
ऐसा वो “शुभम” दिवस प्रदान कर,
इतना सब कुछ पाकर भी
न हो मुझको खुद पर “गौरव”
ऐसी शक्ति प्रदान कर ।

हे ! ज्ञान की देवी,
मेरे जीवन का लक्ष्य प्रदान कर,
खड़ा अज्ञानी मैं इन ज्ञान के पथों पर,
जो हो सही वही “विकल्प” प्रदान कर ।

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 गौरव हिन्दुस्तानी

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Gaurav Hindustani

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