Friday, February 1, 2019

हकीकत ऐ जिन्दगी ...( Ghazal )

हकीकत ऐ जिन्दगी में हूँ मशरूफ इतना,
फिर फसानों में वक्त क्यों ज़ाया करूँ ।

गम करता है जब सगों सा बर्ताव,
बेफिजूल दरवाजा खुशी का खटखटाया करूँ ।

उछाले टोपियाँ जो शाख-ऐ-शज़र,
वर्षात-ऐ-नमी से क्यों इसे पाला करूँ ।

चैन-सुकूं मिलता है तन्हाइयों में,
दुश्मन-ऐ-दिल तो नहीं जो अब भी महफिल में जाया करूँ ।

उसने कहाँ ली खैरो-खबर तेरी,
दीवाना मैं भी नहीं अब जो उसकी फिक्र किया करूँ ।
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 गौरव हिन्दुस्तानी

#Ghazal, #Love, #Feelings


हकीकत ऐ जिन्दगी ...

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Gaurav Hindustani

My name is Gaurav Hindustani. I am web designer by profession, but I am author by heart so Hindustani Kranti is a platform for all Authors and poets who write GOLDEN words and have special stories and poetries. You can send any time your words to me at gauravhindustani115@gmail.com.

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