Tuesday, February 5, 2019

बुढ़ापा

उन बूँदो में भी सपने थे ,और प्रेम भरा आशीष भी था.,
वह साखाओ के न अपने थे और न उनमे जगदीश भी था,
हवा भी उस दिन थमा रहा सूरज उस दिन भी सोया था,
जब रिश्तो का रेशम का रेशम टूटा तब आसमान भी रोया था.!

पैर बड़े ही कोमल था ,पर पत्थर भी कहाँ अजूबा था..!
माघ की शीतल छाया में मानव भी उस दिन डूबा था ,
एक - एक पल की जो यादे थी पलको से टपक वो जाती थी,
साखाओ ने उन पल को भी आनंदित हो लहराती थी..!!

क्या इतना सा ही बंधन था क्या इतना सा ही नाता था,
क्या इसके लिए ही मै अपने सपनो की फेरी लगाता था,
प्रश्नो का उच्च हिमालय था , पर दुःखो का बोझा भी शेरो था ,
दिन के अगले ही फेरो में नेत्रो पर चीँटी टुकड़ी ढेरो था.।।।



best hindi kavitaye



कवि - शिवम् तिवारीshivam tiwari kavi
शहर - प्रयागराज
ईमेल - shivam9532096168@gmail.com
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Gaurav Hindustani

My name is Gaurav Hindustani. I am web designer by profession, but I am author by heart so Hindustani Kranti is a platform for all Authors and poets who write GOLDEN words and have special stories and poetries. You can send any time your words to me at gauravhindustani115@gmail.com.

3 comments:

  1. Bahut shaandar kavita hai chate.
    God bless u Move a head my brother keep it up.😍😘

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  2. Good SHIVAM move a head
    Bahut hi sundar or bhaavnatmak kavita hair 👌👌👌👌👌👌🤗😘👌👌

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