Friday, February 1, 2019

आँसूं पत्थरों की आँखों में ...( Ghazal )

आँसूं पत्थरों की आँखों में भी छलक आये,
जब इक मन्नत की खातिर नंगे पाँव मीलों निकल आये ।

शोर करते शहर ने खामोशी से कहा “गौरव”
चलता रह, साँस भी तब लेना जब नज़र मंजिल आये ।

शौक से बिछा मेरी राह में इतने पत्थर,
कि हर टक्कर पर खुदा, हर ठोकर पे अकल आये ।

मुफलिसी की चादर उघारना फिर
जब भी कभी घर-गाँव ख्याले दिल आये ।

फटे लित्ते देखता है पागल आवरू बचा,
दौलत के धागों से लित्ते फिर सिल जाये ।

खुशियों के लाखों समन्दर भी इक कतरा लगे,
जब-जब तेरी आँखों में माँ पानी की बूँदें आयें ।

बुजुर्गों की दुआओं से जला इक चराग तू,
मुसीबतों का काला घना जब कोई जंगल आये ।

ठण्डे आँसुओं में बस इतनी गर्मी रख,
ऐ खुदा कि हर पत्थर पिघल जाये ।

बुजुर्ग की इक रोटी में खींचा-तानी क्यों,
जबकि उसकी रोटी पर हर बच्चा पल जाये ।

वक्त के इस खेल को अंगुर पे रख “गौरव”
इसमें जवानी - बचपन सब मिट्टी में मिल जाये ।
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 गौरव हिन्दुस्तानी

#Ghazal, #Love, #Sad, #Gaurav



आँसूं पत्थरों की आँखों में ...




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Gaurav Hindustani

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