Tuesday, February 12, 2019

The Gesture Of Time

If I could arrest the gesture of time
The blooming flowers wouldn't droop down,
And the petals wouldn't fall off onto the ground.
The buds would continue the dream of tranquility
The charm of youth would claim forever
As the epitome of beauty.
If I could arrest the gesture of time,
Butterflies would continue embracing the flowers
Milky waves would kiss the beach forever,
The colorful petals would float in the air
The yellow leaves would add a beautiful hue to the nature.
The bold arms would not lose the ultimate strength
The children would not have to push the sunny days back
The aged people wouldn't have to burn the deep sighs
The brave fighters, fighting with death would get enough time
To win the unannounced crown of life.

The Gesture Of Time


Poetess : Sabina Sabnam AliaSabina Sabnam Alia
State : Assam
Qualification : M. A in English

Tuesday, February 5, 2019

प्रण से प्रेरणा ... Motivation Poem

वर्षा का वादन बरषे या गाज् गिरे अनुमानो पर,
लहरो पर बूँदें ठहरे या अंधकार परवानो पर,
निसदिन निशा का चादर ओढ़े ,मै राह नई ले आऊंगा ,
जबतक् रक्तो में संचार बचा तबतक मैं चलता जाऊँगा.!

सीमित सैन्य सुरक्षा का किंचित भी आकार बढे,
यूँ अंधकार में रोदन हो या भेड़ो की हुंकार बढे,
या बढे हुए उन गिद्धों बस विस्थापन को मानक हो,
अब लहर कोलाहल शान्त रहे या अग्रिम प्रलय भयानक हो.,
मैं ह्र्दय हौसले सीमा से लहरो पर राह बनाउंगा,
जबतक् रक्तो में संचार बचा तबतक मैं चलता जाऊँगा..!

हिम के आलय में आग जले, या बर्फ पड़े वो भारी हो.,
माँ की ममता नैनो से हो , या हाथ खून से क्यारी हो.,
पिता नयन की नीर भले या कौतुक काल का साया हो,
चीर ह्र्दय की व्यथा सही या मात्त्र् मोह की माया हो.,
कर्म फ़र्ज़ की होली में  , मै कण - कण तक जलता जाऊँगा.,
जबतक् रक्तो में संचार बचा तबतक मैं चलता जाऊँगा....
जबतक् रक्तो में संचार बचा तबतक मैं चलता जाऊँगा.!


best hindi kavitaye



कवि - शिवम् तिवारीshivam tiwari kavi
शहर - प्रयागराज
ईमेल - shivam9532096168@gmail.com

बुढ़ापा

उन बूँदो में भी सपने थे ,और प्रेम भरा आशीष भी था.,
वह साखाओ के न अपने थे और न उनमे जगदीश भी था,
हवा भी उस दिन थमा रहा सूरज उस दिन भी सोया था,
जब रिश्तो का रेशम का रेशम टूटा तब आसमान भी रोया था.!

पैर बड़े ही कोमल था ,पर पत्थर भी कहाँ अजूबा था..!
माघ की शीतल छाया में मानव भी उस दिन डूबा था ,
एक - एक पल की जो यादे थी पलको से टपक वो जाती थी,
साखाओ ने उन पल को भी आनंदित हो लहराती थी..!!

क्या इतना सा ही बंधन था क्या इतना सा ही नाता था,
क्या इसके लिए ही मै अपने सपनो की फेरी लगाता था,
प्रश्नो का उच्च हिमालय था , पर दुःखो का बोझा भी शेरो था ,
दिन के अगले ही फेरो में नेत्रो पर चीँटी टुकड़ी ढेरो था.।।।



best hindi kavitaye



कवि - शिवम् तिवारीshivam tiwari kavi
शहर - प्रयागराज
ईमेल - shivam9532096168@gmail.com

Saturday, February 2, 2019

शोर शराबा शहर में ...( Ghazal )

शोर शराबा शहर में शब भर हुआ
कराहाता रहा इक शख्स पर नसीब न मरहम हुआ ।

की तो बहुत मेरे शहर ने गुफ्तगूँ फिर भी
अमन - ओ - चैन न मुकम्मल हुआ ।

दिल शीशों की तरह तोड़कर चल दिया
मेरा मेहबूब इतना संग दिल हुआ ।

बहा दिया सब तन्हाइयों में,
पैदा जब भी मेरी आँखों में समन्दर हुआ ।

क्यों चढ़ रहा है सीढ़ियाँ उस इश्क की “गौरव”
बदौलत जिसकी तू बद से बदतर हुआ ।
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 गौरव हिन्दुस्तानी

#Ghazal, #Love, #Memory, #Her


शोर शराबा शहर में  ...
शोर शराबा शहर में  ...





कोई दिल में जब उतरता है ...( Ghazal )

कोई दिल में जब उतरता है
क्या खबर थी फिर दिल नहीं संभलता है ।

रौशन रहे मेहबूब का घर हर लम्हा
अब दिल शाम - ओ- सहर चिराग सा जलता है ।

तुम्हारी याद में इस तरह से रिसते हैं अश्क मेरे
जिस तरह से जलकर मोम पिघलता है ।

तुम आओ तो थम जाये ये वक्त मेरा
अकेला हूँ इसलिये बेवजह हाथों से फिसलता है ।

लाख छुपा ले रात उसको अपनी पनाह में, लेकिन
सुबह की आवाज पर सूरज फिर निकलता है ।

क्यों परेशां है इश्क में इतना कि रात भर
कभी हाथ तो कभी आंख मलता है ।

आ बैठ घड़ी भर बातें करें कि बात से
हर बात का हल निकलता हैं ।

उछाले कीचड़ मोहब्बत में कोई तो ये ज़हन में रख
खुशबुओं का कमल कीचड़ में ही खिलता है ।

हकीकत जानना हो “गौरव” तो सीरत देख ,
सूरत से शख्सियत का पता कहाँ चलता है ।

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 गौरव हिन्दुस्तानी

#Ghazal, #Love, #Memory


कोई दिल में जब उतरता है  ...

अँधेरा मिट जायेगा ...( Ghazal )

अँधेरा मिट जायेगा जीवन का,
सूरज सी अगन तो पैदा कर ।

चिंगारियाँ उम्मीदों की पनपेंगी जरुर,
किस्मतों के पत्थरों में रगड़ तो पैदा कर ।

मंजिलें तेरी मुट्ठी में होंगी,
चाह का छोटा सा समन्दर तो पैदा कर ।

राहों के कांटें सब मखमल हो जायेंगे,
नंगें पाँव चलने की हिम्मत तो पैदा कर ।

आसमां  के सितारे बेशख टूटेंगे,
ज़हन में शिद्दत से ख्वाहिश तो पैदा कर ।

बुत भी खूबसूरत चेहरे होंगे,
कारीगरी का खुद में हुनर तो पैदा कर ।

राधा बैठेगी ओढ़े चुनरी तेरे आंगन में,
प्रेम बाँसुरी के स्वर में गोपाला, धुन तो पैदा कर ।

बहुत आसाँ है दौलत-शौहरत कमाना “गौरव”
अपनी रूंह में इक मुफलिस तो पैदा कर ।

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 गौरव हिन्दुस्तानी

#Ghazal, #Love, #Motivational


अँधेरा मिट जायेगा ...

बेवफाई के दौर में ...( Ghazal )

बेवफाई के दौर में ...
हमने वफा का चलन कर दिया ।

लिखी थी जुदाई तेरे - मेरे प्यार में,
फिर भी हमने मिलन कर दिया ।

था भी नहीं मैं इक टुकड़ा जमी का,
तुमने छू कर गगन कर दिया ।

मुर्झा गये थे कंवल मेरे अधर से ,
तुमने आकर चमन कर दिया ।

मर ही चुका था मैं एक जनम में
पर तुमने इक और जनम कर दिया ।

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 गौरव हिन्दुस्तानी

#Ghazal, #Geet, #Love, #Emotions



बेवफाई के दौर में ...




यूँ तड़पता हूँ ...( Ghazal )

यूँ तड़पता हूँ तुम्हारी याद में
जैसे जलता है कोई जलती आग में ।

हाँ दबाकर हैं रखे मेरे आँसूं पलक में
आओ भिगो दूँ अश्कों की बरसात में ।

जब से गये हो छोड़कर उस रात में
तन्हाई है और है बेबसी बस साथ में ।

दिल से दिल को जोड़ा है प्रेम के हर छोर में
जग वाले उलझा रहे तुझको - मुझको जात में ।

उम्र भर जलता रहे तेरे मेरे इश्क में
“गौरव” तेल भरता फिर रहा उस प्रेम के चिराग में ।
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 गौरव हिन्दुस्तानी

#Ghazal, #Love, #Memory


यूँ तड़पता हूँ  ...



इक प्रीति की प्रीत ने मुझको ... (Love Poem in Hindi)

इक प्रीति की प्रीत ने मुझको
प्रीतम की परिभाषा दी ।

कदम प्रेम चलना सिखलाया
मधुर वीणा सी भाषा दी ।

सितारों में लिपटी निशा
खुशियों में डूबी सुबहा सा दी ।

विरह - पीड़ा का दमन कर
मिलन राग अभिलाषा दी ।

जटिल पहेली सरल कर
जीवन की दुनियाँ आसां दी ।

इक प्रीति की प्रीत ने मुझको
प्रीतम की परिभाषा दी ।

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 गौरव हिन्दुस्तानी

#Love, #She, #Memory


इक प्रीति की प्रीत ने मुझको ...



कुछ इस तरह से गुजर जाती हैं ... (Love Poem)

कुछ इस तरह से गुजर जाती हैं
सप्तेह की छुट्टियाँ
कभी तेरी तस्वीर बनाकर
कभी लिखकर तुझे चिट्ठियाँ ।

लाया तो कई बार तेरे खत
अपने हाथों में,
दीदार होते ही तेरा
मैंने बंद कर लीं अपनी मुट्ठियां ।

जब किया वादा कभी
तुमने मुझसे मिलने का
जलती रहीं आँखें मेरी
बस बुझ गयीं थीं बत्तियाँ ।

याद हो तुमने कहा था
मेरे दिल को मोहब्बत का शज़र
तेरी कमी से रो रहीं हैं
मेरी धड़कनों की पत्तियाँ ।

आया था तू जब भी कभी
नाचा था दिल-मन मोर सा
अब तेरे इंतजार में
खण्डहर हैं दिल की बस्तियां ।

जला दीं हैं उसने मेरी
सारी मोहब्बत की निशानियाँ
आज भी रख्खी हैं मेरी जेबों में
जिसकी कड़ी हुयीं दस्तियाँ ।
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 गौरव हिन्दुस्तानी

#Love, #Poem, #She, #Memory, #Love


कुछ इस तरह से गुजर जाती हैं ...



रब खुदा, फरिश्ता ...( Best Ghazal )

रब, खुदा, फरिश्ता उसको क्या-क्या समझा
वो बेवफाई का मासूम बुत निकला ।

खोजा, खटखटाया, ठहरा और क्या-क्या करता
उस पत्थर दिल का हर दरवाजा बन्द निकला ।

गम, शराब, अश्क फिर बढ़ते चले गये
जब उसके लवों पे नाम गैर का निकला ।

जख्मी, घायल, पागल दिल होता जायेगा
गर किसी जुबाँ से हरूफ मोहब्बत निकला ।

अशरफी, सिक्के, दौलत से मुफलिस थे “गौरव”
इसलिए छोड़ गया तुमको वो रहीस खानदानी निकला ।

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 गौरव हिन्दुस्तानी

#Ghazal, #Love, #Emotions #Her

रब खुदा, फरिश्ता  ...



चन्द शब्दों को ढूँढने ...( Hindi Poem )

चन्द शब्दों को ढूँढने
मैं घूमने निकला,
खुशनसीबी देखो
मुझे गज़ल मिल गई ।

कुछ बिखरी यादों को
मैं जोड़ने बैठा,
इस काम को साझा करने में
उन्हें भी फुर्सत मिल गई ।

कब से बैठा था
गरीबी का खाली बर्तन लिए,
तुम आयीं तो
मोहब्बत की दौलत मिल गई ।

दरवाजे सब बन्द थे
तेरे दीदार पाने के,
खुशनसीबी देखो
कमरे की खिड़की खुली मिल गई ।

कुछ इस तरह हुआ
दीदार तेरा
भटके हुए मुसाफिर को
मंजिल मिल गई ं।

सुबह-शाम देखता बाट राधा की
यमुना तट पर,
बाँसुरी की धुन सुनकर
कान्हा की राधा को सुध मिल गई ।

वो उसके सितमों को
लवों पे लिये बैठी रहती
उम्दा है ज़ालिम से
उसके होठों पे तबस्सुम मिल गई ।

वो उतर जाती मेरी धड़कनों में
कुछ तरानों की तलाश में,
नफरत में मुझ वेबफा से
उसको सीठी तरन्नुम मिल गई ।

हार जाता आशिक मोहब्बत में
घर के हर शख्स को,
अच्छा हुआ जो
वेबफा की हकीकत मिल गई ।

दीवाना ज़िद लिये बैठा रहता
काँटों पर चलकर तेरे घर आने को,
अच्छा हुआ जो तेरे गाँव की सड़क
उसके शहर से मिल गई ।

सबकी चाहत थी
कोई तो खेले इस क्वाँरे आँगन में,
करिश्मा कुदरत का देखो
सूने आँगन को बेटी मिल गई ।

ज्यादा नहीं एक युग बीता होगा
तेरे इन्तजार में,
थोड़ा इन्तजार और करूँगा तेरे आने का
तेरे कदमों की मुझको आहट मिल गई ।

अरसे से बैठा है मासूम
एक निवाले की आस में,
तकदीर की सौगात देखो
आज उसको पूरी रोटी मिल गई ।

बेटा है सरहद पर
बन्दूकों के साये में,
पर वो जिन्दा है सुनकर
माँ को तसल्ली मिल गई ।

सहमी रहती है बेटी
ससुराल के जुल्मों सितम से,
कितना खुश है पिता
उसके आने की खबर मिल गई ।

सरे बाजार में लुट जाती
इज्ज़त उसकी,
शुक्र है कि उसको
ज़हर की शीशी मिल गई ।

बेंच देता वो खुद को
घर की गरीबी मिटाने में,
वक्त सही घूमा कि
उसको नौकरी मिल गई ।

जल जाती बहू
दहेज की आग में,
खुश हूँ ससुराल को
दहेज की देवी मिल गई ।

कब से खड़ा है
दरवाजे पर इक खुराक की खातिर,
रहमत है खुदा की
भिखारी को भीख मिल गई ।

अकेली ही सिसकती
वो बन्द कमरे में,
शुक्र है उसको
नयी सहेली मिल गई ।

बुझ जाते वो चराग
हमेशा के लिए,
किस्मत है चरागों को
रौशनी मिल गई ।

फिर मर जाता किसान
सूखे खेतों को देखकर,
प्रकृति की देन से
प्यासी फसल को वारिश मिल गई ।

बदसूरती की बदौलत
लड़की क्वाँरी ही रह जाती
लेकिन शिव के व्रतों से
उसे डोली मिल गई ।

सड़जाती वो लाश
किसी चैराहे पर,
देर से ही सही
पर सजी अर्थी मिल गई ।

सदियों से सोता रहा परिवार
सर्दी भरी खुली रातों में,
सुकूं है कि अब जाकर
इसे एक छत मिल गई ।

अभी और काला करता मुँह
भ्रष्टाचार की कालिख से,
बदनसीबी जनता की
नेता को कुर्सी मिल गई ।
     
कहाँ भटकता मैं नमाज़ी
अल्लाह की तलाश में
बेहतर हुआ रास्ते में
मेरी अम्मी मिल गई ।

मार-पीटकर निकाल देते
घर से सब उसको ,
 चलो पहली तारीख में
बूढ़ी दादी को पेन्शन मिल गई ।

थोड़ी देर और होती तो
चेहरा न देख पाता पिता का,
गनीमत है बेटे को
दर्द भरी चिट्ठी मिल गई ।

हफ्तों से लगा है कर्फ्यू, कैद
बच्चे भूखे बिलखते नजर आये
कुछ पल की पुलिस की सख्ती में
घरों से निकलने की मौहलत मिल गई ।

सलाखों में है सास, बहू
जलाने के झूठे आरोप में,
गवाही से न सही पर रिश्वत से
बेगुनाह को जमानत मिल गई ।

कैसे लिखती सूखी कलम
गीता के श्लोक और कुरान की आयाते,
पाक-ऐ-मजहब से
कलम को दवात मिल गई ।

टूट जाते तार साँसों के
नन्ही भ्रूण के अस्पताल में,
अचानक औरत को अपनों से
लड़ने की ताकत मिल गई ।

घुमाती रहती कुम्हारिन
सूना चाक अपना,
इसकी ज़िद से कुम्हार को
चिकनी मिट्टी मिल गई ।

आज भी चूल्हा
बुझा का बुझा रह जाता,
पड़ोसी के चूल्हे से
अधजली लकड़ी मिल गई ।

गिर-गिरकर बूढ़ा यूँ ही
जख्मी हो जाता,
लड़खड़ाते की सहारा
उसको लाठी मिल गई ।

आज भी नहीं बचा पाती
माँ, बेटी को बाप की मार से,
गनीमत है बेटी के सीने पर
पड़ी चुन्नी मिल गई ।

बाज झपट लेता
मासूम फाख्ता को,
कर्म है कि अपने झुण्ड को पाकर
उसे लड़ने की हिम्मत मिल गई ।

बार-बार गश खाकर
गिर जाती वो मासूम की याद में,
मुद्दत के बाद उसको
खोई हुई बच्ची मिल गई ।

मंहगाई में तड़पता रह जाता
कैंसर का मरीज,
रहम है सरकारी अस्पताल में
दवा सस्ती मिल गई ।

मशरूफ रहता वो ताउम्र
अपनी मुफलिसी में,
हसरत-ऐ-कामयाबी में
उसको शौहरत मिल गई ।

 सारे लड़के छोड़ जाते गाँव
अपनी तरक्की की खोज में,
शुक्रिया प्रधान का लड़कों को
गाँव में ही तरक्की मिल गई ।

माँ की तरह वो भी
अनपढ़ रह जाती,
खुशी है पिता से स्कूल जाने की
बेटी को इजाज़त मिल गई ।

धुँधली आँखे कैसे देखती
चेहरा अपने लहू का,
पोते की दुआओं से
दादा को ऐनक मिल गई ।

बददुयायें अपनों की
उसका जीना दूभर कर देतीं,
सदाओं में गैरों से उसको
जीने की दुआ मिल गई ।

सूख जाता वो पौधा
काले अँधियारों में,
शुक्र है कुदरत से
उसे धूप मिल गई ।

तड़पती आत्मा बन्द अलमारी की
सजी मटकी में,
धन्यवाद पवित्रता का
अस्थियों को गंगा मिल गयी ।
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 गौरव हिन्दुस्तानी

#Feelings, #Love, #Emotions, Reality, #Wish, #Memory, #Daughter, #Mother


चन्द शब्दों को ढूँढने ...



गलतफ़हमी थी जो रिश्तों को ...( Ghazal )

गलतफ़हमी थी जो रिश्तों को
मजबूत समझा,
ये तो रेशम से भी
नाजुक निकले ।

कसूर बस इतना कि
अपना हक माँग बैठे
पता चला अपनों के
लिवाज़ में साँप निकले ।

साफ - सुथरे तन
बस देखने के
सीनों में सब दिल
काले निकले ।

उनकी नियत बदलना
काबिले तारीफ है,
रंग बदलने में अपने
गिरगिट से भी माहिर निकले ।

खंजर घोंपने का अंदाज भी
निराला है अपनों का
न उखड़ती है साँस
कम्बख्त न ही दम निकले ।

कैसे करूं ऐतबार
इन अपनों पर
झाँक कर देखा इनके दिलों में
उफ्फ...ये सब दुश्मन निकले ।
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 गौरव हिन्दुस्तानी

#Poem, #Feelings, #Emotions


गलतफ़हमी थी जो रिश्तों को ...

Friday, February 1, 2019

उसमे मिश्री के कुछ दाने थे..( Lost her )

(बैग खो जाने के सन्दर्भ में ....)

उसमे मिश्री के कुछ दाने थे,
कवितायें, गज़ल और कुछ गाने थे ।
मम्मी की मीठी बातें थी,
और पापा के कुछ तानें थे ।

एक बर्तन में खीर थी जिसमें,
गोले ताल मखाने थे ।
एक कागज में दो लड्डू थे जो,
मंजिल पर जाकर खाने थे ।

उसमे बचपन की एक फोटो थी,
जिसे हर बार देख हर्षाने थे ।
उसमे दादा-दादी के सपने थे जो
हमको अपनी आँखों में बसाने थे ।

उसमे किसी कि कसमें थीं, वादे थे
जो हमको उम्र भर निभाने थे ।
कुछ नयी नयी यादें थी और कई
उसके खत रखे पुराने थे ।

जगी-जगी कई रातें थी और
कई दिन रखे सुहाने थे  ।
वो खत भी उसमे चले गये, हर रात
जो रखे हमने सिराहने थे ।

उसमे वफा के मरहम भी थे,
जो वेबफाई की चोटों पर लगाने थे ।
कई अनसुलझे सवाल भी थे,
जो तन्हाई में बैठ लगाने थे ।

एक पॉकेट में महके फूल भी थे
जो उसके बालों में सजाने थे ।
कुछ तरल से पिघलते रिश्ते थे ,
जो सांचों में ढाले जाने थे ।

उसमे मिश्री के कुछ दाने थे,
कवितायें, गजल और कुछ गाने थे ।
मम्मी की मीठी बातें थी,
और पापा के कुछ ताने थे ।

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 गौरव हिन्दुस्तानी

#Memories, #Safar, #Relations


उसमे मिश्री के कुछ दाने थे..



... कि वो दुल्हन बन जाये (Sad Poem)

बहुत ख्वाहिशें तेरी थी,
कि वो दुल्हन बन जाये ,
आज बनी वो दुल्हन है
फिर क्यों नीर आँख में लाए ।

कजरारी आँखों को देख,
जैसे अम्बर पर बदरी छाये ,
अधरों पर मुस्कान उतरकर
इंद्रधनुष बन जाये ।

उसके माथे के टीके पर ,
पूर्णिमा का चाँद लजाये  ,
उसकी लौंग के लश्कारे पर,
सितारे फीके पड़ जाए ।

उसके खुशियों के उत्सव पर गौरव
क्यों राग दुखद का गाये,
आज बनी वो दुल्हन है ,
फिर क्यों नीर आँख में लाये ।

खुशियों का संसार मिले उसे ,
हर दिन उत्सव बन जाये ,
उसकी खुशियाँ हैं तेरी भी गौरव,
चल यही सूक्ति फिर दोहराएँ ।
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 गौरव हिन्दुस्तानी

#Poem, #Sad, #Love


... कि वो दुल्हन बन जाये

नामुमकिन कुछ भी नहीं ...( Motivational Ghazal )

नामुमकिन कुछ भी नहीं, मैंने कहा
जब पानी पर तैरता इक पत्थर देखा ।

लडखडाकर सम्भला मैं भी बहुत,
तूफां से लड़ता जब इक पंछी देखा ।

बचपन-जवानी सब पानी-पानी हुए,
उस बुजुर्ग को चलते जब नंगे पाँव देखा ।

वो बहाता है अश्क इक आंशियाँ के जलने पर,
मुस्कुराता हूँ जबकि मैंने जलता हुआ पूरा गाँव देखा ।

किसका कसूर है खुदा से पूछा यही,
मासूम ने अपने वालिद का गर साया तलक न देखा ।
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 गौरव हिन्दुस्तानी

#Ghazal, #Emotions, #Reality


नामुमकिन कुछ भी नहीं  ...

हकीकत ऐ जिन्दगी ...( Ghazal )

हकीकत ऐ जिन्दगी में हूँ मशरूफ इतना,
फिर फसानों में वक्त क्यों ज़ाया करूँ ।

गम करता है जब सगों सा बर्ताव,
बेफिजूल दरवाजा खुशी का खटखटाया करूँ ।

उछाले टोपियाँ जो शाख-ऐ-शज़र,
वर्षात-ऐ-नमी से क्यों इसे पाला करूँ ।

चैन-सुकूं मिलता है तन्हाइयों में,
दुश्मन-ऐ-दिल तो नहीं जो अब भी महफिल में जाया करूँ ।

उसने कहाँ ली खैरो-खबर तेरी,
दीवाना मैं भी नहीं अब जो उसकी फिक्र किया करूँ ।
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 गौरव हिन्दुस्तानी

#Ghazal, #Love, #Feelings


हकीकत ऐ जिन्दगी ...

आँसूं पत्थरों की आँखों में ...( Ghazal )

आँसूं पत्थरों की आँखों में भी छलक आये,
जब इक मन्नत की खातिर नंगे पाँव मीलों निकल आये ।

शोर करते शहर ने खामोशी से कहा “गौरव”
चलता रह, साँस भी तब लेना जब नज़र मंजिल आये ।

शौक से बिछा मेरी राह में इतने पत्थर,
कि हर टक्कर पर खुदा, हर ठोकर पे अकल आये ।

मुफलिसी की चादर उघारना फिर
जब भी कभी घर-गाँव ख्याले दिल आये ।

फटे लित्ते देखता है पागल आवरू बचा,
दौलत के धागों से लित्ते फिर सिल जाये ।

खुशियों के लाखों समन्दर भी इक कतरा लगे,
जब-जब तेरी आँखों में माँ पानी की बूँदें आयें ।

बुजुर्गों की दुआओं से जला इक चराग तू,
मुसीबतों का काला घना जब कोई जंगल आये ।

ठण्डे आँसुओं में बस इतनी गर्मी रख,
ऐ खुदा कि हर पत्थर पिघल जाये ।

बुजुर्ग की इक रोटी में खींचा-तानी क्यों,
जबकि उसकी रोटी पर हर बच्चा पल जाये ।

वक्त के इस खेल को अंगुर पे रख “गौरव”
इसमें जवानी - बचपन सब मिट्टी में मिल जाये ।
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 गौरव हिन्दुस्तानी

#Ghazal, #Love, #Sad, #Gaurav



आँसूं पत्थरों की आँखों में ...




आज तुम्हारे जन्म दिवस पर ...(Birthday Poem in Hindi)

आज तुम्हारे जन्म दिवस पर
अभिलाषा थी कुछ भेंट करूँ
किन्तु सकुचित है मेरा मन
क्या भेंट करूँ, क्या भेंट करूँ ।

अर्धचन्द्र या पूर्णचन्द्र या
झिलमिल तारों को भेंट करूँ
शीत छाँव या गुनगुनी धूप या
जलते सूरज को भेंट करूँ ।

झर - झर झरते मधुरिम कलरव
या वीणा सुर को भेंट करूँ
चंचल वषंत या भीगे सावन या
नृत्य करती ऋतु को भेंट करूँ ।

धरा-भूमि को भेंट करूँ या
नभ - अम्बर को भेंट करूँ
क्षण - क्षण विचलित है मेरा मन
क्या भेट करूँ, क्या भेंट करूँ ।

ये उपहार क्षणिक - भौतिक हैं
एक अमर चिन्ह को भेंट करूँ
तुम खुशहाल रहो आयु भर
मैं यही वन्दन करूँ, वंदन करूँ ।

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 गौरव हिन्दुस्तानी

#Birthday #Poem, #Birthday #Gift


आज तुम्हारे जन्म दिवस पर  ...



बहुत याद आता है वो ...( Ghazal )

बहुत याद आता है वो,
भुलाऊँगा उसको रुलाता है वो ।
बहुत याद ....

जी रहा है अब तक वो अपने बचपने में,
धूप को आइना दिखाता है वो ।
बहुत याद ....

करेगा अँधेरा वो जीवन में मेरे,
जलते चरागों को बुझाता है वो ।
बहुत याद ....

सीखूंगा उससे मैं मोहब्बत के नुस्खे,
करके वेबफाई, बफा को सिखाता है वो ।
बहुत याद ....

ख़त मैं मोहब्बत के न भेजुंगा उसको,
बिना ही पढ़े उनको, जलाता है वो ।
बहुत याद ....

न देखुंगा उसके मैं सपने सुनहरे ,
ख्वाबों में आकर जगाता है वो ।
बहुत याद ....
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 गौरव हिन्दुस्तानी

#Memories, #Love, #Poems

बहुत याद आता है वो ...

...नमन करें उनके लिए (Deshbhakti Poem)

आओ नमन करें उनके लिए
जो हुए हैं न्योछावर वतन के लिए
हो जाते हैं शहीद, आर्यवृत की
सुख शान्ति - अमन के लिए ।

हमें कुछ नहीं है उनकी परवाह फिर भी
वे लड़तें हैं दुश्मनों से हमारी रक्षा के लिए
वे बांध लेते हैं सिर पर कफन
भारत माँ की सुरक्षा के लिए ।

इन वीरों की बहादुरी को देखकर
मेरी रुंह काँप जाती है, ये न होते तो
हम भीख माँग रहे होते दुश्मनों से
अपनी स्वतंत्रता के लिए ।

कर्ज़दार हैं हम उस माँ के
जो देती है जन्म ऐसे सपूतों को
जो अपने प्राणों को देने से भी
नहीं चूकते हिन्दुस्तान के लिए ।
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 गौरव हिन्दुस्तानी

#Patriotism, #Deshbhakti, #India

...नमन करें उनके लिए



कफ़न बाँध लो देशवासियों ...(Deshbhakti Poem)

कफ़न बाँध लो देशवासियों दो मेरा कर्ज़ उतार,
ले लो हांथो में तिरंगा और तेज करो तलवार ।

दागो गोली उनकी छाती पर, जो हैं सरहद के पार,
कलम कर दो सर उन सब के अब जो उठायें सिर इस पार ।

हमारी खामोशी को वो न समझे कमजोरी,
सीना छलनी हो जायेगा, जो हमने खींची बन्दूक की डोरी ।

चंद धमाकों से डर जाये हम इतने नहीं कमजोर,
जीना मुश्किल कर देंगे उनका, जो देखा तिरंगे की ओर ।

अपने तिरंगे के रंग से उनके पोता है कपड़ों को,
अपनी ज़मीन को देकर उनकी सींचा है नींवों को ।

कर दो बेघर अब उनको, उखाड़ो ये जमीनी तार,
ले लो हांथो में तिरंगा और तेज करो तलवार ।

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 गौरव हिन्दुस्तानी

कफ़न बाँध लो देशवासियों ...



मुस्कुराते हुये मुझको दफन करना (Deshbhakti Poem)

लाश-ऐ-तिरंगा मुझको कफन करना यारो,
राष्ट्रगान की धुन पर मुझको नमन करना यारो,
और पोंछ लेना अपनी आँख से आँसू,
मुस्कुराते हुये मुझको दफन करना यारो ।

मेरे जनाज़े की खबर मेरी माँ को न करना,
वो मेरी खरोंच पर भी सिसक जाती है,
संभाल लेना उसको
बस इतना मुझ पर करम करना यारो ।

मेरे हिस्से की राखी छुटकी से छोटे को बंधा देना,
उसके आँसुओं को पल्कों में छुपा देना यारो,
ले ले वो माँ के कांधों की जिम्मेदारी,
बस इतना कहकर मुझ पर एहसान करना यारो ।

कांधे हों बस सिपाहियों के,
ऐसा नसीब मुझको अन्तिम सफर करना यारो,
फिर बनूँ हिन्दुस्तान का सिपाही,
बस इतना जतन करना यारो ।

लाश-ऐ-तिरंगा मुझको कफन करना यारो,
राष्ट्रगान की धुन पर मुझको नमन करना यारो,
और पोंछ लेना अपनी आँख से आँसू,
मुस्कुराते हुये मुझको दफन करना यारो ।
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 गौरव हिन्दुस्तानी


मुस्कुराते हुये मुझको दफन करना यारो ...


मैं काँटों का हमराही हूँ ...(Love Poem)

मैं काँटों का हमराही हूँ,
तुम हो पुष्प पथिक,
तुम ही बतलाओ कैसे रख्खूँ प्रेम प्रस्ताव,
मैं तुम्हारे सम्मुख ।

महल-कोठियाँ दास तुम्हारे,
मैं झोपड़ियों का सेवक,
तुम पूर्णिमा की श्वेत चाँदनी,
मैं अधजली राख की सम्पूर्ण कालिख,
तुम ही बतलाओ कैसे रख्खूँ प्रेम प्रस्ताव,
मैं तुम्हारे सम्मुख ।

तुम प्रभात की पहली किरन,
मैं संध्या का अस्त सूरज,
तुम मन्द सुगंधित खुशबू हो,
मैं गुमनाम हवाओं का रुख
तुम ही बतलाओ कैसे रख्खूँ प्रेम प्रस्ताव,
मैं तुम्हारे सम्मुख ।

तुम सतरंगी सावन हो,
मैं रंगहीन मौसम हूँ,
तुम वेद-पुराण सी ज्ञानी हो,
मैं तो निरा हूँ मूरख
तुम ही बतलाओ कैसे रख्खूँ प्रेम प्रस्ताव,
मैं तुम्हारे सम्मुख ।

तुम संयोग श्रृंगार की सुन्दर नायिका हो,
मैं वियोग श्रृंगार का भटकता हूँ नायक,
तुम उत्सवों का हर्ष-विनोद हो,
मैं मृत्यु-शैय्या का केवल दुःख
तुम ही बतलाओ कैसे रख्खूँ प्रेम प्रस्ताव,
मैं तुम्हारे सम्मुख ।

तुम पवित्र बहने वाली गंगा-जमुना हो,
मैं स्थायी जलाशय-पोखर हूँ,
 तुम गीता-सी पवन पुस्तक हो,
मैं तो हूँ बस कोरा एक बरख
तुम ही बतलाओ कैसे रख्खूँ प्रेम प्रस्ताव,
 मैं तुम्हारे सम्मुख ।
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 गौरव हिन्दुस्तानी

मैं काँटों का हमराही हूँ ...

मेरी प्रीत को ...(Love Poem)

मेरी प्रीत को
भूल न जाना तुम प्रीति ।

बिसराकर तो देखो
रोकर अँखियाँ कर देंगे हम रीती ।

मास बीते, वर्ष बीते
तुम्हारे आने की खुशी में मेरी रात न बीती ।

यादों की बरसातों ने हालत कर दी है ऐसी
बिन पानी कोई मछली जैसे है मरती जीती ।

तोड़ बन्धन खुद को मुक्त करो
मुझपे बन्धन कर बदलो तुम ये नीति ।

ऐसे प्यास बुझा दो मेरी
मृग नैनी झीलों में जैसे है पानी पीती ।

मेरी प्रीत को
भूल न जाना तुम प्रीति ।

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 गौरव हिन्दुस्तानी

मेरी प्रीत को ...

मैं तुझसे प्रीत रखता हूँ ...(Love Poem)

मैं तुझसे प्रीत रखता हूँ,
तू मुझसे प्रीत रख लेना
तू मेरी साँसों में रहती है,
मुझे धड़कन में रख लेना ।

तुझे मैं दिल में रखता हूँ,
मुझे तू दिल में रख लेना
मुझे देकर ग़मों का शहर,
ख़ुशी का गाँव रख लेना ।

मुझे देकर तपन और धूप,
शरद की छाँव रख लेना
जब आये आँखों में आँसू,
मेरी आँखों को रख लेना ।

मेरे ख्वाबों में तू हर पल है,
मेरा एक ख्वाब रख लेना
मैं तुझसे प्रेम करता हूँ,
मेरा इज़हार रख लेना ।

मैं तेरे गीत लिखता हूँ,
तू मेरे गीत रख लेना
अमर मेरा गीत हो जाये,
अधर पर गीत रख लेना ।
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 गौरव हिन्दुस्तानी



मैं तुझसे प्रीत रखता हूँ  ...

ऐ ख़ुदा ले अपनी पनाह में ...(Girl wish)

जन्म से ही मुझसे मेरी माँ रूठ गयी,
उनकी हँसी की प्याली शायद मेरे आने से टूट गयी,
बेटी हूँ जब ये जाना इस कदर रो पड़ी थी,
जैसी उनकी कश्ती मैंने डुबो थी ।

पापा को तो केवल बेटा ही चाहिए था,
मेरे लिए उनका दिल पत्थर सा हो गया था,
मेरी खिल-खिलाहट उनकी खुशी छीन रही थी,
मेरी नींद शायद उनकी नींद ले रही थी ।

दादी माँ से मानों पहले की दुश्मनी थी,
देखकर वो मुझको आधी जल गयीं  थी,
भायी न मैं उनको, सिर्फ नाती की चाहत थी,
न लिया गोद में कभी जैसे मैं कोई बीमारी थीं ।

आवाज मेरी सुनकर दादा जी ने मुँह फेर लिया,
न नज़र पड़ जाये मुझ पर इसलिए काला चश्मा पहन लिया,
न पड़ जाये किसी पर मेरी परछाई,
इसलिये मुझ तक धूप को भी न आने दिया ।

बेटी नहीं मैं सबको नागिन सी लग रही थीं,
इसलिये घर की हर कोई शख्सियत न मुझको छू रही थी,
क्या करूँगी जी कर ऐसे आशियाँ में,
मौत दे खुदा मुझको ले अपनी पनाह में ।

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 गौरव हिन्दुस्तानी

ऐ ख़ुदा ले अपनी पनाह में ...


माँ और पिता ... ( A little Girl's Feeling )

माँ और पिता की, मैं लाठी बनूँगी .. -2
भईया की कलाई पर, मैं राखी बनूँगी ।
छंट जायेगा अँधेरा, धीरे-धीरे से .. -2
हर गम को जो जला दे, वो ज्योति बनूँगी ।


न गीत - न गज़ल मैं, न वानी बनूँगी
न फूल खुशबुओं के, न पुर्वा सुहानी बनूँगी । -2
रहती है जो हर पल, कान्हा के अधर पर,
गाती-मुस्कुराती वो बन्सी बनूँगी ।


न भावुक - न कोमल, फुलवारी बनूँगी
न निर्बल - न अवला, मैं नारी बनूँगी । -2
रहती थी जिसके हाथों में ढाल और तलवार
वीरांगना झाँसी की रानी बनूँगी ।
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 गौरव हिन्दुस्तानी


माँ और पिता  ...

सिर पर चढ़ाया बेटे को ...

सिर पर चढ़ाया बेटे को कदमों में बेटियाँ थीं
वो बन गया है राक्षस वो बनीं देवियाँ हैं
लहू देकर हमने सींचा था जिस पौधे को
आज वही जड़ को उखाड़ने चला है,
आज बेटा ही माँ-बाप को मारने चला है ।

बेटियों को धिक्कार दिया था हमने,
दर्द के सिवा कुछ ताने दिये थे हमने
इतने सितम लेकर भी इस बोझ को ढो रहीं हैं
वो आज भी हमको भगवान सा पूज रहीं हैं ।

ऐ खुदा तू सबको इक बेटी जरूर देना
बेटा न पोंछेगा आँसू तो बेटी तो पोंछ देगी
हर दर्द को सहकर भी वो सबको खुशी देगी
बेटी है जैसी आज वैसी ही कल रहेगी ।

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 गौरव हिन्दुस्तानी

सिर पर चढ़ाया बेटे को ...



खुशियाँ तो हैं इस जहाँ में ...

खुशियाँ तो हैं इस जहाँ में, पर गम भी तो हैं
लाख होठों पर मुस्कराहट है हमारे पर आँखें नम भी तो हैं,
कैसे छुपायें यारो गरीबी इस जहाँ से,
चैखट पर पर्दे तो हैं हमारी पर कम्बख्त हवा के रुख भी तो हैं ।

अकेला होता तो सिर्फ पानी से भी भूख मिटा लेता,
पर मासूम बच्चे भी तो हैं
बस आज भूखे रहते तो ये भी खुशी से सो जाते,
पर आने वाले कल भी तो हैं ।

होली पर न रंग हैं न दीवाली पर दिये हैं,
हमारे घर के सिवा बाकी सब के घर सजे हैं,
जलता नहीं मैं किसी के ऐशो आराम से,
बिखर जाता हूँ मैं बिटिया के सवाल से
जब पूछती है पापा अभी गरीबी के कितने दिन और बचे हैं ।
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 गौरव हिन्दुस्तानी

खुशियाँ तो हैं इस जहाँ में ...