Tuesday, September 4, 2018

ये मेरा शहर ये मेरा घर

ये मेरा शहर ये मेरा घर,
बिना तेरे लगता जैसे गया हो बिखर ।

लो आवाज दी हमने चले आओ तुम,
जो रूठे हुए हो तो मनाएंगे हम,
जो रोका है तुमने अपनी बातों का मंजर,
रुकी मेरी धड़कन और दिल गया है ठहर ।
ये मेरा शहर ...

कसमें वादों को सब आर-पार कर,
चले थे जो राहें हम संग हाथ थाम कर,
जो आधा किया था तय तुमने सफर,
तन्हा नहीं कटता अब बचा जो सफर ।
ये मेरा शहर  ...

आइना समझकर तोडा मुझको चूर-चूर कर,
बनायी फिर खाई तुमने मुझको दूर-दूर कर,
मायूसियाँ ही चेहरे पर अब आठो पहर ,
दिल में नहीं उठती अब खुशी की लहर ।
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 गौरव हिन्दुस्तानी

ये मेरा शहर ये मेरा घर
ये मेरा शहर ये मेरा घर

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Gaurav Hindustani

My name is Gaurav Hindustani. I am web designer by profession, but I am author by heart so Hindustani Kranti is a platform for all Authors and poets who write GOLDEN words and have special stories and poetries. You can send any time your words to me at gauravhindustani115@gmail.com.

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