Sunday, September 9, 2018

उसको पता था ..

उसको पता था मुझको, किताबें पढ़ना पसंद हैं
वो मेरी ज़िन्दगी में किताब बनकर आई
मैं उसको पढ़ता गया जैसे उसमे खोता गया
मैं उसके एक एक अक्षर, एक एक शब्द को पढ़ता गया |

उसके शब्दों के जाल में फंसता गया
जिस दिन उसको न देखता था छूकर
लगता था ऐसा ख़ुद से जुदा हो गया हूँ रूठकर
उसको भी रहता था मेरा इन्तजार
कब आयेगा मेरा पढ़ने वाला
कब मैं उसका करूँगी दीदार |

उसको रोज़ाना पढ़ना मेरी कमजोरी बन गयी
न पढूं तो मौत पढ़ने के बाद जैसे ज़िन्दगी मिल गयी
उस किताब की तस्वीर मेरी आँखों में
और बातें दिल में ठहर गयी
पूरा पढ़ने के बाद उसको मेर ज़िन्दगी बदल गयी |

एक दिन उसे दुनिया की नजरों से चुराना चाह
हमेशा के लिए उसे अपनाना चाह
उसने मुझे तो बदल दिया लेकिन ख़ुद
मुझे छोड़कर खिन दूर चली गयी
अब दिल से न पढूंगा कभी ऐसी किताब को
मेरे लिए ये किताब एक सबक बन गयी |


उसको पता था ..
उसको पता था ..


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Gaurav Hindustani

My name is Gaurav Hindustani. I am web designer by profession, but I am author by heart so Hindustani Kranti is a platform for all Authors and poets who write GOLDEN words and have special stories and poetries. You can send any time your words to me at gauravhindustani115@gmail.com.

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