Monday, September 3, 2018

तुम क्यों रूठ जाती हो...

तुम क्यों रूठ जाती हो बात-बात में
मना-मना के हारा सारी रात-रात में ।

थाम हाथ मेरा बंध वचन-सात में
न उलझ तू दुनियाँ की जात-पात में ।

खामोशियों की उँगलियाँ तुम रखो लवों पर
कर बयाँ कहानी बस आँख-आँख में ।

आ बैठ प्यार सीखे तारों की रात में
क्या रखा मोहब्बत की सह-मात में ।

तुम क्यों रूठ जाती हो बात-बात में
मना-मना के हारा सारी रात-रात में ।
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 गौरव हिन्दुस्तानी

तुम क्यों रूठ जाती हो...
तुम क्यों रूठ जाती हो...

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Gaurav Hindustani

My name is Gaurav Hindustani. I am web designer by profession, but I am author by heart so Hindustani Kranti is a platform for all Authors and poets who write GOLDEN words and have special stories and poetries. You can send any time your words to me at gauravhindustani115@gmail.com.

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