Saturday, January 19, 2019

तेरा हाथ थाम लेता ( Ghazal )


तेरा हाथ थाम लेता मैं दुनिया के सामने
कुछ आगयी मजबूरियाँ पर मेरे सामने |

करता रहा मैं बारिशें आँखों से रात भर
सुबहा मुस्कुरा के आया मैं तुमसब के सामने |

झूठा नहीं हूँ मैं प्रिय कर लो मेरा यकीं
अपनाता कैसे तुमको माँ-पिता के सामने |

देनी है गर सज़ा तो मुस्कुरा दो प्रिय
लगता हूँ वेबफ़ा तो कह दे सबके सामने |

देह है तुम्हारे सामने मन मर चुका प्रिय
ख़ुद को मिटा के आया हूँ दर्पण के सामने |

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गौरव हिन्दुस्तानी

तेरा हाथ थाम लेता


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Gaurav Hindustani

My name is Gaurav Hindustani. I am web designer by profession, but I am author by heart so Hindustani Kranti is a platform for all Authors and poets who write GOLDEN words and have special stories and poetries. You can send any time your words to me at gauravhindustani115@gmail.com.

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