Wednesday, January 16, 2019

माँ और पिता की ...


माँ और पिता की , मैं लाठी बनूँगी  ..-2 मैया और पिता की 
भईया की कलाई पर, मैं राखी बनूँगी |
छंट जायेगा अँधेरा, धीरे-धीरे से  .. -2 हौले- हौले से
हर गम को जो जला दे, वो ज्योति बनूँगी |


न गीत – न ग़ज़ल मैं, न वानी बनूँगी
न फूल ख़ुशबुओं के, न पुर्वा सुहानी बनूँगी | ..2
रहती है जो हर पल, कान्हा के अधर पर,
गाती-मुस्कुराती वो बन्सी बनूँगी |


न भावुक – न कोमल, फुलवारी बनूँगी
न निर्बल – न अवला, मैं नारी बनूँगी | ..2
रहती थी जिसके हाथों में ढाल और तलवार
वीरांगना झाँसी की रानी बनूँगी |


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गौरव हिन्दुस्तानी

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Gaurav Hindustani

My name is Gaurav Hindustani. I am web designer by profession, but I am author by heart so Hindustani Kranti is a platform for all Authors and poets who write GOLDEN words and have special stories and poetries. You can send any time your words to me at gauravhindustani115@gmail.com.

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