Tuesday, January 29, 2019

जब मैं स्वार्थ से मिला

अभी कदम – दो कदम चला ही था, किसी ने पीछे से आवाज दी ...सुनो ..अरे रुकिये तो.. मैंने पीछे मुड़कर देखा ...एक अजीब, कुरूप शख्स मेरे सामने खड़ा था |
जी कहिये – मैंने कहा
आपका नाम क्या है ? मैं आपसे मित्रता करना चाहता हूँ – प्रतिउत्तर में शख्स ने कहा |
जी मेरा नाम गौरव ...और आपका ?
गौरव जी, मेरा नाम स्वार्थ है |
मैं सकुचाते हुए – फिर मैं आपसे मित्रता कैसे कर सकता हूँ ? आपसे मित्रता करने का अर्थ है, अपने गौरव(मान) पर बट्टा(मान की हानि) लगाना | तुमसे मित्रता करने के बाद लोग तो मुझसे घृणा करने लगेंगे | जितने तुम तन से कुरूप दिखते हो उतना ही मैं मन से कुरूप हो जाऊंगा |

जब मैं स्वार्थ से मिला

स्वार्थ – नहीं , गौरव जी , ऐसा बिल्कुल नहीं है | मित्रता तो कैसी भी हो, बस सही से निभाना आनी चाहिए | मैं आपको विश्वास  दिलाता हूँ आपके मान की हानि नहीं होगी | बस जो लोग मुझे गलत समय पर याद करते हैं वो अक्सर ख़ुद को लोगों से दूर कर लेते हैं लेकिन इसमें मेरा दोष नहीं है मैं तो अपनी मित्रता ही निभाता हूँ |
गौरव – पर मैं तो आपको जानता भी नहीं ..थोड़ा बहुत सुना है आपके बारे में ..वो भी सिर्फ़ निंदा करते हुए आपकी |
स्वार्थ – मैं तो एक बार हर शख्स के पास जाता हूँ अपनी मित्रता  का प्रस्ताव  लेकर सो आपके पास भी आ गया |
देखिये गौरव जी, जब आपके देश के हित , मान – सम्मान या अन्य चीजों की तुलना दूसरे देशों से हो तब आप मुझे अर्थात् इस स्वार्थ को आवाज़  देना आपका देश के हित में यह स्वार्थ आपकी निंदा नहीं बल्कि आपकी प्रशंसा  बनेगा |   
जब आपके धर्म, आपके सत कर्म पर आँच आये तब इस स्वार्थ को याद करना और पूरे स्वार्थ के साथ अपने धर्म , अपने कर्म की रक्षा करना, मुझे पूर्ण विश्वास है इससे आपके गौरव को बट्टा नहीं लगेगा |
और अन्तिम बात .. "जब आपके मन में कभी अपने अकेले के फ़ायदे के लिए मुझे याद करने की या मुझसे सहायता माँगने की इच्छा जागृत हो तो निस्वार्थ  की तलवार से मेरा वध कर देना और अपने मान की रक्षा करना "|
यहीं हैं मेरे गुण , अब तो मुझसे मित्रता कर लो – स्वार्थ ने मुस्कुराकर कहा |
मैंने उसका हाथ थाम लिया और फिर अपने रास्ते उस सकरात्मक स्वार्थ के साथ चल पड़ा |

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Gaurav Hindustani

My name is Gaurav Hindustani. I am web designer by profession, but I am author by heart so Hindustani Kranti is a platform for all Authors and poets who write GOLDEN words and have special stories and poetries. You can send any time your words to me at gauravhindustani115@gmail.com.

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