Friday, September 7, 2018

अक्सर तुम्हे पुकारा करता हूँ


अक्सर तुम्हे पुकारा करता हूँ
इस तरह से दिन गुजारा करता हूँ ।

 जब भी नींद रात में आती नहीं
अश्कों से तकिया भिगोया करता हूँ ।

 तुम मुझे चाहती कहाँ कतरा भी
फिर क्यों तुम्हीं पर हक जताया करता हूँ ।

 हाँ लौटोगी तुम इक रोज इसी की आस में
उम्मीदों का दिया जलाया करता हूँ ।

 हमदर्द, हमराही बनों “गौरव” के तुम,
बस इस दुआ में हाथ उठाया करता हूँ ।
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 गौरव हिन्दुस्तानी

अक्सर तुम्हे पुकारा करता हूँ
अक्सर तुम्हे पुकारा करता हूँ



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Gaurav Hindustani

My name is Gaurav Hindustani. I am web designer by profession, but I am author by heart so Hindustani Kranti is a platform for all Authors and poets who write GOLDEN words and have special stories and poetries. You can send any time your words to me at gauravhindustani115@gmail.com.

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