Tuesday, January 29, 2019

वो हमसे प्यार करते हैं..

वो हमसे प्यार करते हैं, क्यों फिर हमसे छुपाते हैं
पहले दीदार करते हैं, क्यों फिर नजरें चुराते हैं
उनकी नजरों में भी हमने, देखा है प्यार को अपने
दिल से इजहार करते हैं, लवों से इन्कार करते हैं |

हम उनके पास जाते हैं, वो हमसे दूर जाते हैं
छोड़ दे उनको तन्हा हम, तो मिलने की दुआयें करते हैं
कभी आँखों में हैं आँसू, कभी दिल से वो रोते हैं
जब हमसे प्यार नहीं उनको, क्यों फिर वो आहें भरते हैं |

भीड़ न हमको भाती है, सिर्फ़ अब तन्हा रहते हैं
होते हैं जब हम तन्हा, उन्हें ही याद करते हैं
आँखों में तस्वीर है उनकी लवों पर नाम उनका है
लगता है अब शायद हमकों, हम भी उनसे प्यार करते हैं |

हम उनको देखा करते हैं, वो हमको देखा करते हैं
वो इतने शर्मिलें हैं कि कुछ न बोला करते हैं
न वो रह पायेंगे हमारे बिन न हम उनके बिन रह पायेंगे
फिर भी न वो इकरार करते हैं, न हम कुछ कह पाते हैं |


वो हमसे प्यार करते हैं..

एकाकी जीवन..

एकाकी जीवन की क्यों कहूँ सिर्फ व्यथा
जब हो रही ही हो विकसित कोई नई कथा।

जीवन डगर का सूनापन लगे जैसे ढलता सूरज है
अगला ही क्षण स्वर्निम किरण लिए उगता सूरज हैं ।

सच हैं कि ,उजाले से दूर अंधेरे मे उलझते हैं
फिर  तारा बन अम्बर मे  वहीं तो चमकते हैं।

जब अकेला मन लेता है हृदय मे अंगड़ाई
तभी मन मे नवीन स्वप्न भरती है किलकारियां।

जब जिंदगी सिकुड़ती है स्वयं के अंत:स्थल मे
द्वंद है कि छू लूँ आसमां  या खो जाउ अनंत धरातल मे।

हाँ तन्हा जीवन मे आया  जरूर कोई ठहराव है
सच मानो दु:खद नहीं ये सुखद कोई  पड़ाव है।

जहाँ आकर होता है हर कोई स्वयं से रूबरू
जान लूँ स्वयं को इससे बङा न कोई आरजू।

जिंदगी के हर पड़ाव पर मिलती सीख विशेष हैं
हारी नहीं हूँ तब तलक मैं जब तक साँसे आशेष है।


ज्योति झा
शिक्षा-एम.ए (हिन्दी)
साहित्यिक उपलब्धि-विभिन्न साहित्यिक मंच पर काव्य पाठ।
निवास-कोलकाता।


ज्योति झा



प्यार वह दलदल है ...........

प्यार वह दलदल है जिससे जितनी कोशिश
करोगे निकलने की उतने ही धसते जाओगे
भीड़ से बचोगे हमेशा तन्हा रहना चाहोगे
न दिल को चैन होगा न रात को नींद होगी
फिर भी सोना चाहोगे |

तुम करते हो प्यार जिससे
वह तुमसे करे या न करे
पर तुम हमेशा उसे ही चाहोगे
हर अदा उसकी लगेगी तुमको अच्छी
ख्याल उसका हर वक्त होगा तुम्हारे जहन में
उसके दिल में अपनी मोहब्बत का
आशियाँ करना चाहोगे |
प्यार वह दलदल है .............|

वह जलादे चाहे कितनी भी बारे
तुम्हारे आशियानें को
लेकिन बार बार तुम उसका
आशियाना बनाना चाहोगे
भले ही छोड़ दे वह तुम्हें लहरों के सहारे
लेकिन तुम उसे किनारे तक पहुचाना चाहोगे
तुम को याद न करे कभी वो ,
उसकी हर अदा हर बात को
भुलाना न चाहोगे |
प्यार वह दलदल है .............|

वह वेबफाई करे या सितम करे तुम पर
उसे तोहफे में वफा देना चाहोगे
गर मौत आये उसको तो
करोगे ख़ुदा से दुआ
वक्श से दे उसको और ख़ुद मौत
को मांगना चाहोगे |
प्यार वह दलदल है .............|


प्यार वह दलदल है ...........

उनके साथ गुजरा ......

पहली बार मिलने का ठिकाना लिख रहा हूँ
मन्दिर के बहाने उनका आना लिख रहा हूँ
यूँ छुप छुपके मिलने का नज़ारा लिख रहा हूँ
उनके साथ गुजरा जमाना लिख रहा हूँ |

मोहब्बत का स, रे, ग, म, हमें न था मालूम
उनका सिखाया वो तराना लिख रहा हूँ
अपनी जुल्फों की छाँव में मुझको छिपाना लिख रहा हूँ
इस तरह उनका मुझमें समाना लिख रहा हूँ |
उनके साथ गुजरा ...............


उनके साथ गुजरा ......

जुल्फों से चाँद से चेहरे को छुपाना लिख रहा हूँ
खुबसूरत ख्वाबों में उनका आना जाना लिख रहा हूँ
शर्माकर हमसे उन नजरों का मिलाना चुराना लिख रहा हूँ
उनके इश्क में हुआ मैं दीवाना लिख रहा हूँ |
उनके साथ गुजरा ...............

अपने दर्द को लवों की मुस्कराहट से छुपाना लिख रहा हूँ
अंक दर्द लेकर बदले में ख़ुशी का नजराना लिख रहा हूँ
उनकी याद का मैं एक फसाना लिख रहा हूँ
उनके साथ गुजरा जमाना लिख रहा हूँ |

आँखों के सहारे उस काजल को दिल में बसा लिया
उसके आने से इस दिल को औरों की नजरों से बचा लिया
उसका अपने दिले मोहब्बत का आशियाना लिख रहा हूँ
उसके इश्क में हुआ मैं दीवाना लिख रहा हूँ |
उनके साथ गुजरा ...............

..तुमसे प्यार वाली बात नहीं कहता

गर मालूम होता मुझे दोस्ती टूट जायेगी हमारी
तो प्यार का इजहार नहीं करता
तुम्हारी तस्वीर को छिपाकर इन आँखों में
तुम्हारी यादों में ही जी लेता
मगर तुमसे प्यार वाली बात नहीं कहता |

चूमने होते तुम्हारे होठ तो गुलाब
की पंखुड़ियों को चूम लेता
देखनी होती तुम्हारी आँखें
तो शराब की बोतल देख लेता
मगर तुमसे प्यार वाली बात नहीं कहता |

तुम्हारे बदन की ख़ुशबू को चन्दन में सूंघ लेता
तुम्हारी तिरछी चाल को हिरनी में देख लेता
तुम्हारे गुस्से को सूरज की गर्मी में देख लेता
तुम्हारी मीठी बोली को कोयल की आवाज में सुन लेता
मगर तुमसे प्यार वाली बात नहीं कहता |

गर नहीं होती मुलाकात हमारी हकीकत में
तो मैं तुमसे ख्वावों में ही मिल लेता
याद आती अगर तुम्हारी तो काजल को देख लेता
प्यार का इजहार करने पहुचेगी ठेस तुम्हारे दिल को
तो प्यार वाली बात को मैं ख़ुद से भी नहीं कहता |


गर मालूम होता मुझे

जब मैं स्वार्थ से मिला

अभी कदम – दो कदम चला ही था, किसी ने पीछे से आवाज दी ...सुनो ..अरे रुकिये तो.. मैंने पीछे मुड़कर देखा ...एक अजीब, कुरूप शख्स मेरे सामने खड़ा था |
जी कहिये – मैंने कहा
आपका नाम क्या है ? मैं आपसे मित्रता करना चाहता हूँ – प्रतिउत्तर में शख्स ने कहा |
जी मेरा नाम गौरव ...और आपका ?
गौरव जी, मेरा नाम स्वार्थ है |
मैं सकुचाते हुए – फिर मैं आपसे मित्रता कैसे कर सकता हूँ ? आपसे मित्रता करने का अर्थ है, अपने गौरव(मान) पर बट्टा(मान की हानि) लगाना | तुमसे मित्रता करने के बाद लोग तो मुझसे घृणा करने लगेंगे | जितने तुम तन से कुरूप दिखते हो उतना ही मैं मन से कुरूप हो जाऊंगा |

जब मैं स्वार्थ से मिला

स्वार्थ – नहीं , गौरव जी , ऐसा बिल्कुल नहीं है | मित्रता तो कैसी भी हो, बस सही से निभाना आनी चाहिए | मैं आपको विश्वास  दिलाता हूँ आपके मान की हानि नहीं होगी | बस जो लोग मुझे गलत समय पर याद करते हैं वो अक्सर ख़ुद को लोगों से दूर कर लेते हैं लेकिन इसमें मेरा दोष नहीं है मैं तो अपनी मित्रता ही निभाता हूँ |
गौरव – पर मैं तो आपको जानता भी नहीं ..थोड़ा बहुत सुना है आपके बारे में ..वो भी सिर्फ़ निंदा करते हुए आपकी |
स्वार्थ – मैं तो एक बार हर शख्स के पास जाता हूँ अपनी मित्रता  का प्रस्ताव  लेकर सो आपके पास भी आ गया |
देखिये गौरव जी, जब आपके देश के हित , मान – सम्मान या अन्य चीजों की तुलना दूसरे देशों से हो तब आप मुझे अर्थात् इस स्वार्थ को आवाज़  देना आपका देश के हित में यह स्वार्थ आपकी निंदा नहीं बल्कि आपकी प्रशंसा  बनेगा |   
जब आपके धर्म, आपके सत कर्म पर आँच आये तब इस स्वार्थ को याद करना और पूरे स्वार्थ के साथ अपने धर्म , अपने कर्म की रक्षा करना, मुझे पूर्ण विश्वास है इससे आपके गौरव को बट्टा नहीं लगेगा |
और अन्तिम बात .. "जब आपके मन में कभी अपने अकेले के फ़ायदे के लिए मुझे याद करने की या मुझसे सहायता माँगने की इच्छा जागृत हो तो निस्वार्थ  की तलवार से मेरा वध कर देना और अपने मान की रक्षा करना "|
यहीं हैं मेरे गुण , अब तो मुझसे मित्रता कर लो – स्वार्थ ने मुस्कुराकर कहा |
मैंने उसका हाथ थाम लिया और फिर अपने रास्ते उस सकरात्मक स्वार्थ के साथ चल पड़ा |

Wednesday, January 23, 2019

दांत में दर्द रहता है

मित्रों हिन्दुस्तानी क्रान्ति में इस बार हम एक नयी श्रृंखला शुरू करने जा रहे हैं | जहाँ आपको विभिन्न बीमारियों, उनके लक्षण तथा उनके उपचार की जानकारी दी जाएगी | थोड़ी सी देखभाल आपको आपकी बीमारी से निजाद दिला सकती है |

इस पोस्ट में हम बताएंगे दांतो के दर्द के उपचार के बारे में | अक्सर देखा गया है लोग दांतो के दर्द से परेशान रहते हैं, विभिन्न प्रकार के टूथपेस्ट इस्तेमाल करने से भी कोई लाभ नहीं होता है, कभी कभी तो इंग्लिश मेडिसिन से भी लाभ नहीं मिलता है और ये अंग्रेजी दवाइयाँ शरीर के लिए हानिकारक भी हैं | दांत के दर्द को हल्के में नहीं लेना चाहिए क्योंकि अगर एक भी दांत खराब हुआ तो “वह हमारी मुस्कान छीन सकता है” 


दांत में दर्द



हम बात करेंगे आयुर्वेदिक इलाज की, जो कि बिलकुल नेचुरल तरीके से आपके दांतो को दर्दरहित करेगा चमकदार मोती जैसे बनाये रखेगा हमेशा | चलिए जानते हैं दांतो के दर्द की शुरुआत कहाँ से होती है अर्थात लक्षण |

⇒ लक्षण :
१. जब दांत अथवा दाड में कालापन दिखने लगे  अर्थात दांतो में कीड़ा लग जाना |
२. दांतो में कीड़ा लगने से दांत से बदबू आना |
३. दांतो में पीलापन बने रहना रोजाना ब्रश करने के बाद भी पीले तथा काला दिखना |
४. दांतो से खून (ब्लड) आना |
५. मसूड़े (गम) का फूल जाना तथा उनसे खून आना | 
६. मुँह से बदबू आना |

⇒ उपचार : चलिए जानते हैं कैसे हम घर में ही दांतो का इलाज कर सकते हैं  दादी माँ के नुस्खे जो कि बहुत कारगर होते हैं  शत प्रतिशत सटीक इलाज |
१. लौंग 
२. लहसुन 
३. नमक पानी 
४. अमरुद की पत्तियां 
५. चिरचिटा के पत्ते

घरेलु नुस्खे


१. लौंग :  दोस्तों दांतो के दर्द में लौंग बहुत कारगर औषधि है जो हमारे घर में ही उपलब्ध होती है  लौंग दांत के इलाज का पारम्परिक नुस्खा है | जब कभी दांतो में दर्द हो तब एक या दो लौंग दांत के नीचे दवा लेने से दांत के दर्द में राहत मिलती है | मित्रों हम दांत के दर्द में लौंग का तेल (क्लोव आयल) था लौंग पाउडर भी उसे कर सकते हैं | जो की मार्किट में बहुत आसानी से मिल जाता है |

२. लहसुन :  मित्रो लौंग की तरह लहसुन भी बहुत गुणकारी औषधि है लहसुन की २-४ कलियों को कूटकर इसमें नमक और काली मिर्च मिला कर दांत के दर्द में बेहद फायदे मंद है | लहसुन में एंटीबायोटिक गुण पाए जाते हैं |

३. नमक का पानी : गरम पानी में नमक मिलकर उसे उपयोग करने से ये नमक का घोल एक माउथ वाश की तरह काम करता है | नमक के इस पानी से दिन में २-३ बार कुल्ला करने से दांत के दर्द में बहुत आराम मिलता है |

४. अमरुद की पत्तिया :  अमरुद की पत्तिया भी दांतो के उपचार में बहुत लाभदायक है | अमरुद की कोमल पत्तिया चुटकी भर नमक के साथ मुँह में रखने से दांत के दर्द में लाभ मिलता है | अमरुद की पत्तियों को उबाल कर भी प्रयोग में ला सकते हैं |

५. चिरचिटा का रस :  चिरचिटा  एक पौधा होता है जिसके पत्तो से रस निकालकर प्रयोग करने से दांत के दर्द में बहुत लाभ मिलता है | चिरचिटा के रस से जिनके दांत में कीड़ा लग जाता है वह भी ठीक हो जाता तथा दांत की जगह भी भर जाती है |

मित्रो ये सभी नुस्खे प्रयोग किये हुए है और बहुत ही कारगर है | इनका प्रयोग पूर्णतया नेचुरल हर्बल है | इनका कोई भी साइड इफ़ेक्ट नहीं है | दोस्तों उम्मीद करते हैं आपको ये जानकारी लाभकारी सिद्ध होंगी | हमे अपने कमेंट करके जरूर बताये आपको ये जानकारी कैसी लगी | जुड़े रहिये और कुछ औषधियों के बारे में जाने के लिए |

हमने पाठकों की सुविधा के लिए पोस्ट को हिन्दी (Hindi), और हिंग्लिश ( Hinglish ) दोनों में उपलब्ध कराया है | 

⇒ हिंग्लिश ( Hinglish ) में पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक कीजिये |
⇒ हिन्दी (Hindi) में पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक कीजिये |

Tuesday, January 22, 2019

Dant Me Dard hai (Tooth pain)

Mitron Hindustani Kranti me is bar ham ek nayi shrinkhla shuru krne jarhe hain. Jahan apko vibhinn bimariyon, unke lakshan tatha unke upchar ki jaankari di jayegi. Thodi si dekhbhal apko apki bimari se nijad dila sakti hai.

Is post me ham btayenge Danto ke dard ke upchar ke bare me. Aksar dekha gya hai log danto ke dard se pareshan rhte hain. Vibhinn prakar ke toothpaste istmal krne se bhi koi labh nhi hota hai kabhi kabhi to English Medicine se bhi labh nhi milta hai aur ye sharir ke liye hanikarak bhi hain.  Dant ke dard ko halke me nhi lena chahiye kyuki agar ek bhi dant khrab hua to “vah hmari muskan cheen skta hai” . 

Dant me dard hai

Hm baat krenge ayurvedic ilaaj ki jo ki bilkul natural tarike se apke danto ko dardrahit krega, chamakdar moti jaise bnaye rkhega hmehsa. Chaliye jante hain danto ke dard ki shuruat kaha se hoti hai arthat lakshan .

⇒ LAKSHAN :  

1. Jab dant athva daar me kalapan dikhne lage ( arthat danto me keeda lag                          jana).
       2.     Danto me keeda lgne se dant se badbu aana.
     3.     Danto me peelapan bne rhna rojana brush krne ke baad bhi pile tatha kale  dikhna .
        4.     Danto se khoon (Blood) ana .
        5.     Masude (Gum) ka fool jana tatha unse khoon aana.
        6.     Muh se badbu ana.

⇒ UPCHAAR

 Chaliye jante hain kaise hm ghar me hi danto ka ilaaj kar skte hain . Dadi ma ke        nuskhe jo ki bahut kargar hote hain. Shat pratishat sateek ilaj.

       1.     Laung
       2.     Lahsun
       3.     Namak pani
       4.     Amrud ki pattiyan
       5.     Chirchita ke patte 


Gharelu Dvaiyan




1. LAUNG : Dosto danto ke dard me laung bahut kargar aushadhi hai, jo hmare ghar me hi uplabhd hoti hai . LAUNG dant ke ilaaj ka paramparik nuskha hai. Jab kabhi danto me dard ho tab ek ya do  LAUNG dant ke niche dva lene se dant ke dard me rahat milti hai. Mitron hm dant ke dard me LAUNG ka tel (Clove Oil) tha LAUNG powder bhi use kar skte hain. Jo ki market me bahut asani se miljata hai.

2. LAHSUN : Mitro laung ki tarah LAHSUN bhi bahut gunkari aushadhi hai, LAHSUN Ki 2-4 kaliyo ko kootkar isme namak or kali mirch mila kar dant ke dard me behad fayde mand hai.  LAHSUN me Antibiotic gun paye jate hain.

3. NAMAK KA PANI :  Garam pani me namak milakar use krne se ye namak ka ghol ek mouth wath ki trh kaam karta hai. Namak ke is pani se din me 2-3 bar kulla karne se dant ke dard me bahut aaram milta hai.

4. AMRUD KI PATTIYA : Amrud ki pattiya bhi danto ke upchar me bahut labhdayak hai. Amrud ki komal pattiya chutki bhar namak ke sath muh me rkhne se dant ke dard me labh milta hai. Amrud ki pattiyon ko ubal kar bhi pryog me la skte hain.

5. CHIRCHITA KE RAS : Chirhita ek paudha hota hai jiske patto se ras nikalkar pryog krne se dant ke dard me bahut labh milta hai. Chirchita ke ras se jinke dant me keeda lag jata hai vah bhi thik ho jata tatha dant ki jagh bhi bhar jati hai.

Mitro ye sabhi nuskhe prayog kiye huye hai or bahut hi kargar hai. Inka prayog purntaya Natural, Herbal hai. Inka koi bhi side effect nhi hai.  Dosto ummed karte hu apko ye jankari labhkari siddh hongi. Hme apne comment krke jrur btaye apko ye jankari kaisi lagi. Jude rhiye or kuch aushdiyo ke bare me jaane ke liye.

Hmne pathko ki suvidha ke liye post ko Hindi (हिन्दी) aur Hinglish (हिंग्लिश) dono me uplabhd karaya hai.

 Hindi (हिन्दी)  me pdhne ke liye yha Click kijiye.
 Hinglish (हिंग्लिश)  me pdhne ke liye yha Click kijiye.






Saturday, January 19, 2019

तेरा हाथ थाम लेता ( Ghazal )


तेरा हाथ थाम लेता मैं दुनिया के सामने
कुछ आगयी मजबूरियाँ पर मेरे सामने |

करता रहा मैं बारिशें आँखों से रात भर
सुबहा मुस्कुरा के आया मैं तुमसब के सामने |

झूठा नहीं हूँ मैं प्रिय कर लो मेरा यकीं
अपनाता कैसे तुमको माँ-पिता के सामने |

देनी है गर सज़ा तो मुस्कुरा दो प्रिय
लगता हूँ वेबफ़ा तो कह दे सबके सामने |

देह है तुम्हारे सामने मन मर चुका प्रिय
ख़ुद को मिटा के आया हूँ दर्पण के सामने |

.
.
.
.
.
.
गौरव हिन्दुस्तानी

तेरा हाथ थाम लेता


Thursday, January 17, 2019

क्योंकि हम है सच्चे हिंदूस्तानी !!!!

हम लोगो को समझ सको तो समझो दिलबर जानी
जितना तुम समझगो उतनी होगी हैरानी
क्योंकि हम है सच्चे हिंदूस्तानी !!!!
कुंभ --- जूना अखाड़ा --- मुल्ला जी लाईट वाले
WHAT A COMBINATION. दोस्तो धर्म कभी भी नफरत नही फैलाता, नफरत फैलाती है राजनिति। धर्म का मतलब ही है प्यार, एक दूसरे को इज्जत और सबसे ऊपर मानवता। यह सब करके दिखाया जूना अखाडे ने। 33 साल पहले हरिद्वार कुंभ मे जूना अखाडे को बिजली से सजाने के लिए मुजफ्फर नगर के मुल्ला जी को बुलाया जाता है। मुल्ला जी ने अखाडे को इतना सुंदर सजाया कि जूना अखाडे और मुल्ला जी का रिश्ता Permanent हो गया। उसके बाद चाहे कुंभ नासिक मे हो, चाहे उज्जैन मे या प्रयागराज मे, जूना अखाडे को सजाएगे मुल्ला जी ही। मुल्ला जी का असली नाम महमूद है पर सभी उन्हें मुल्ला जी ही कहते है। जितने दिन कुंभ चलता है मुल्ला जी अखाडे के संतो के साथ ही रहते है और जो संत उन्हें खाने को देते है वही खाते है। अखाडे के पंडाल मे मुल्ला जी को नमाज पढने के लिए जगह भी दी जाती है। मुल्ला जी बताते है कमाई तो अच्छी होती है पर अब पैसा मायने नही रखता है। मूझे तो संतो का प्यार खींच लाता है। जैसे ही मूझे जूना अखाडे से कुंभ मेले के लिए बुलावा आता है मै अपनी टीम के साथ दौडा चला आता हूं। मेले के बाहर राजनिति होगी, कुंभ मेले मे तो केवल धर्म ही धर्म है विराट हिंदू धर्म। हमारे देश मे बडे बडे दंगे होते है पर इस तरह की छोटी छोटी बाते उनपर भारी पडती है। राजनिति कितनी भी गंदगी फैलाले धर्म सब साफ कर देगा।
ENJOY UNIQUE COMBINATION OF KUMBH--JUNA AKHADA & MULLA JI LIGHT WALE AND ENJOY EVERY MOMENT.

क्योंकि हम है सच्चे हिंदूस्तानी !!!!

क्योंकि हम है सच्चे हिंदूस्तानी !!!!


गज़ल

मुझको तो रिश्ते ही दौलत थे,
जाते जाते साल तुमने वो भी छीन लिए |

समझाया बहुत दिल को सगा कोई नही,
फ़िजूल बैठा है तू यादें महीन लिए |

यहाँ तबस्सुम का कोई तलबगार नहीं,
उसको कौन पूछे जो फिरता है शक्ल ग़मगीन लिए |

रोता है, सिसकता है आंखे सुर्ख करता है ख़ुदा जाने,
पर मिलता है बेबफ़ा मुझसे आंखे सुरमईन लिए |

अरसे से ताकता है रास्ता "गौरव" उसका ऐसे,
जैसे कोई फ़रिश्ता बैठा है तोहफे बेहतरीन लिए |
.
.
.
.
गौरव हिन्दुस्तानी

गज़ल



Wednesday, January 16, 2019

माँ और पिता की ...


माँ और पिता की , मैं लाठी बनूँगी  ..-2 मैया और पिता की 
भईया की कलाई पर, मैं राखी बनूँगी |
छंट जायेगा अँधेरा, धीरे-धीरे से  .. -2 हौले- हौले से
हर गम को जो जला दे, वो ज्योति बनूँगी |


न गीत – न ग़ज़ल मैं, न वानी बनूँगी
न फूल ख़ुशबुओं के, न पुर्वा सुहानी बनूँगी | ..2
रहती है जो हर पल, कान्हा के अधर पर,
गाती-मुस्कुराती वो बन्सी बनूँगी |


न भावुक – न कोमल, फुलवारी बनूँगी
न निर्बल – न अवला, मैं नारी बनूँगी | ..2
रहती थी जिसके हाथों में ढाल और तलवार
वीरांगना झाँसी की रानी बनूँगी |


.
.
.
.
.
गौरव हिन्दुस्तानी

hindustani kranti

सिर पर चढ़ाया बेटे को ...


सिर पर चढ़ाया बेटे को क़दमों में बेटियाँ थीं

वो बन गया है राक्षस वो बनीं देवियाँ हैं
लहू देकर हमने सींचा था जिस पौधे को
आज वही जड़ को उखाड़ने चला है,
आज बेटा ही माँ-बाप को मारने चला है |

बेटियों को धिक्कार दिया था हमने,
दर्द के सिवा कुछ ताने दिये थे हमने
इतने सितम लेकर भी इस बोझ को ढो रहीं हैं
वो आज भी हमको भगवान सा पूज रहीं हैं |

ऐ ख़ुदा तू सबको इक बेटी जरूर देना
बेटा न पोंछेगा आँसू तो बेटी तो पोंछ देगी
हर दर्द को सहकर भी वो सबको ख़ुशी देगी
बेटी है जैसी आज वैसी ही कल रहेगी |
.
.
.
.

गौरव हिन्दुस्तानी 

hindustani kranti