Tuesday, October 8, 2019

ऑफिस बॉय से मुख्य न्यायाधीश बनने की अद्भुत रोमांचक यात्रा

I come from a poor family. I started my career as a class IV employee and the only asset I possess is integrity.
S.H. Kapadia


 यह भारत के उच्चतम न्यायालय के  पूर्व न्यायाधीश श्री एस एच कपाड़िया जी के, जो उन्होंने स्वयं के बारे में सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश बीआर कृष्णा अय्यर  को लिखे एक पत्र में लिखे थे |  भारत के 38 वें न्यायाधीश श्री कपाड़िया जी ने अपनी जीवन-यात्रा एक ऑफिस असिस्टेंट की तरह प्रारम्भ की थी | 
 
उनकी जज बनने की अदम्य,  उत्कट इच्छा थी |  एक निम्न मध्यमवर्गीय पारसी परिवार में जन्मे कपाड़िया जी के पिता एक क्लर्क थे एवं माता गृहणी | पढ़ाई का बोझ उन पर काफी भारी था, इसलिए होमी कपाड़िया को बेहराम जी जीजीभाई (Behramjee Jeejeebhoy) नामक लॉ फर्म पर नौकरी करनी पड़ी | कभी किसी ने कल्पना भी नहीं की थी कि यह लड़का कभी भारत के मुख्य न्यायाधीश के पद को भी सुशोभित कर सकता है | 
  
27वर्ष की उम्र में सन 1974 में वे आयकर विभाग में Counsel बने | वर्ष 1991 में बाम्बे हाईकोर्ट में मुख्य न्यायाधीश तथा दिसम्बर 2003  में उच्चतम न्यायालय में जज बनाए गये | 12 मई, 2010 को उन्हें भारत के मुख्य न्यायाधिपति की शपथ राष्ट्रपति द्वारा दिलाई गयी | 
  
न्यायमूर्ति एस एच कपाड़िया ने स्वयं को हर प्रकार के राजनैतिक दबाव से मुक्त रखा है एवं अनेक महत्वपूर्ण निर्णय दिये हैं | इस देश की न्याय प्रणाली में समुचित परिवर्द्धन एवं सुधान हेतु अनेक सफल प्रयास किये हैं  |

S.H. Kapadia
S.H. Kapadia
 

Tuesday, June 25, 2019

हाँ. मैं मजदूर हूँ

हाँ. मैं मजदूर हूँ
हाँ मैं मजदूर है
दुखी जीवन जीने को मजबूर हूँ।
आधी पेट खाना और आंसू बहाना
यही मेरा दस्तूर है

सबके घर त्योहारों का मौसम है
सबका घर खुशियों से रौशन है
क्यों कि मैं मजदूर हूँ
मेरे घर मे छाया मातम है

एक अन्न को तरसता है
तो दूजा नए कपड़े की रट रटता है
क्यों कि मैं मजदूर हूँ
मेरा दिन तनख्वाह के इंतजार मे हि कटता है।

दिन भर मन से खटता  हूँ
धूप और बारिश की चोट भी सहता हूँ
क्यों कि मैं मजदूर हूँ
बच्चों की मांगे पुरी न कर
सिर्फ आह भर कर रहता हूँ।

बच्चों की मांगे पूरी न कर
रात अंधेरे चोरों सा घर ढुकता हूँ
सूरज से भी पहले काम पर निकलता हूँ।
क्यों कि मैं मजदूर हूँ
दूखियों सा मेरा संसार है।


ज्योति झा
ज्योति झा






ज्योति झा
शिक्षा-एम.ए (हिन्दी)
साहित्यिक उपलब्धि-विभिन्न साहित्यिक मंच पर काव्य पाठ।
निवास-कोलकाता।

स्वभाव (Nature)

स्वभाव क्या है ? ( What is the nature) क्या यह बदला जा सकता है ? ( Can this be changed? ) किस स्वभाव के व्यक्ति को अच्छा कहा गया है और किसे बुरे की संज्ञा दी गई है ? ( What kind of person is said to be good and what is the name of evil?) अच्छे स्वभाव से क्या - क्या प्राप्त होता है और बुरे स्वभाव से क्या हानियाँ हैं | ( What is achieved by good nature and what are the impairments of bad nature. ) आइये जाने - 

उपदेश से स्वभाव नहीं बदला जा सकता | गर्म किया हुआ पानी फिर शीतल हो जाता है | - पंचतंत्र 

⇨ मैं नरक में जाने से नहीं डरता यदि पुस्तकें मेरे साथ हों, मैं नरक को स्वर्ग बना दूंगा | - लोकमान्य तिलक 

⇨ स्वभाव  इन्सान को जन्म से मिलता है और शिक्षा तथा संगति से उसे सुधारा जा सकता है | - प्रेमचन्द 

⇨  अच्छा स्वभाव शहद की मक्खी की तरह है, प्रत्येक झाडी से शहद ही निकालती है | - बीचर

⇨  जल तो आग की गरमी पाकर ही गरम होता है, उसका अपना स्वभाव तो ठण्डा ही होता है | - कालिदास 

⇨  वैवाहिक जीवन में तो पति-पत्नि का स्वभाव ही जीवन की बुनियाद है | - अज्ञात 

⇨ इस दुनिया में किसी भी व्यक्ति का स्वभाव प्राकृतिक रूप से ऐसा नहीं है जिसे पूर्ण कहा जा सके | उसे आवश्यकता होती है देखभाल की, आत्मसंयम की | - एस. मार्डेन 

⇨ जिसका जो स्वाभाविक गुण है, उसे उससे वंचित करने की क्षमता किसी में भी नहीं होती है | हंस का स्वाभाविक गुण है कि दूध और पानी को अलग कर सकता है | स्वयं विधाता भी इस कार्य में असमर्थ है | हंस के कुपित होने पर विधाता उसका निवास स्थान छीन सकता है किन्तु उसके नीरक्षीर विवेक को बुद्धि को नहीं छीन सकता | - भर्तृहरि 

⇨ कोई व्यक्ति अचानक स्वभाव के विपरीत आचरण करे, तब शंका कीजिये | - प्रेमचन्द

⇨ हमारे स्वभाव का प्रभाव हमारे परिवार के दूसरे किसी  सदस्य की उन्नति या अवनति पर भी पड़ता है | - डी. पाल 

⇨ स्वभाव की उग्रता झगड़े की आग को भड़काती है, परन्तु बिलम्ब से क्रोध करने वाला व्यक्ति अपने मधुर वचन से बुझा देता है | - नीति वचन 

⇨ स्वभाव के अनुसार उन्नति कीजिए, संस्कार स्वयं आपके पास चले आयेंगे | - स्वामी विवेकानन्द

⇨ स्वभाव ही मनुष्य के जीवन का स्वर्ग या नर्क निर्धारित करता है | - डी. बारिया 

⇨ एक चोट को आदमी शीघ्र भूल जाता है लेकिन अपमान को देरी से | - चेस्टर फील्ड 

⇨ बुरे लोगों को निंदा में ही आनन्द आता है | सारे रसों को चखकर भी कौआ गन्दगी से ही तृप्त होता है | - वेदव्यास 

⇨ स्वभाव कच्ची मिट्टी की भांति होता है जिसकी कोई शक्ल नहीं होती इसे आकृति देने की आवश्यकता होती हैं | - संतवाणी 

⇨ जिसका जो स्वभाव है, उसे छुड़ाना कठिन है |  यदि कुत्ता राजा बना दिया जाये, तो क्या वह जूता नहीं चबायेगा | - हितोपदेश

⇨ दया मनुष्य का स्वाभाविक गुण है | - प्रेमचन्द

⇨ व्यक्ति के स्वभाव पर उसका भविष्य निर्भर करता है | - प्रेमचन्द 

⇨ अगल-बगल देख-समझकर व्यवहार करने वाला कभी धोखा नहीं खाता | - चीनी कहावत 

स्वभाव (Nature)
स्वभाव (Nature)

Monday, June 24, 2019

प्रशंसा (Praise)

प्रशंसा क्या है ? (What is praise?) कौन प्रशंसा का पात्र है ? (Who is worthy of praise?) प्रशंसा किसकी और कैसे करनी चाहिए ? (Who should praise and how?) अपनी प्रशंसा सुनकर व्यक्ति की क्या प्रतिक्रिया होनी चाहिए ? (What should be the reaction of the person after listening to his praise?) प्रशंसा के क्या हानि-लाभ हैं ? (What are the benefits of praise?) आदि प्रश्नों का सटीक विवेचन मनीषियों एवं विचारकों की दृष्टि से | 

जैसे चाँदी की परख कुठाली पर और सोने की परख भट्टी में होती है, वैसे ही मनुष्य की परख लोगों के द्वारा की गयी प्रशंसा से होती है | - नीति वचन 

⇨  प्रत्येक व्यक्ति प्रशंसा चाहता है | - लिंकन 

⇨  एक बुद्धिमान पुरुष की प्रशंसा उसकी अनुपस्थिति में करनी चाहिए, किन्तु स्त्री की प्रशंसा उसके मुख पर | - वेल्स लोकोक्ति

⇨  प्रतिद्वंद्वी द्वारा की गयी प्रशंसा सर्वोत्तम कीर्ति है | - टामस मूर 

⇨  प्रशंसा के प्रति अनुराग पर ही सदैव किसी जाति का महान प्रयास आधारित रहा है, जैसे उसका पतन विलासिता के प्रति अनुराग में रहा है | - रस्किन 

⇨  प्रशंसा अच्छे गुणों की छाया है, परन्तु जिन गुणों की वह छाया है उन्ही के अनुसार उसकी योग्यता भी होती है | - वेकन 

⇨  अपनी प्रशंसा सुनकर हम इतने मतवाले हो जाते हैं कि फिर हममे विवेक की शक्ति भी लुप्त हो जाती है | बड़े से बड़ा महात्मा भी अपनी प्रशंसा सुनकर फूल उठता है | - प्रेमचन्द 

⇨  मुझे किसी दूसरी वस्तु की इतनी आवश्यकता नहीं है जितनी की आत्म्पूजा की भूख के पोषण की | - अज्ञात 

⇨  अपनी पुस्तकों की प्रशंसा करने वाला लेखक अपने बचचों की प्रशंसा करनेवाली माता के समान है | - डिजरायली 

⇨  किसी के गुणों की प्रशंसा करने में अपना समय व्यर्थ नष्ट न करो, उसके गुणों को अपनाने का प्रयत्न करो | - कार्ल मार्क्स 

⇨  प्रशंसा प्रार्थना से अधिक दिव्य है, प्रार्थना स्वयं का तैयार रास्ता हमे दिखाती है, प्रशंसा वहां पहले से ही उपस्थित रहती है | - यंग 

⇨  स्वर्ण और हीरे के समान, प्रशंसा का मूल्य केवल उसके दुर्लभत्व में ही होता है | - डॉ. जॉन्सन

⇨  प्रशंसा आपके व्यक्तित्व के मूल केन्द्र पर चोट करती है, इससे आप जान सकते हैं कि आपके सामने बैठे व्यक्ति का मानसिक तथा आध्यात्मिक स्तर क्या है | - स्वामी अमरमुनि

⇨  प्रशंसा के वचन साहस बढ़ाने में अचूक औषधि का काम देते हैं | - सुदर्शन 

⇨  प्रशंसा अज्ञान की बेटी है | - फ्रैंकलिन 

⇨  प्रशंसा से बचो, यह आपके व्यक्तित्व की अच्छाइयों को घुन की तरह चाट जाती है |  - चाणक्य 

⇨  प्रशंसा की मीठी अग्नि यमराज के कठोर हृदय को भी मोम बना देती है, तभी तो वह अपने भक्त को अमर होने का वर दे देता है, यह जानते हुए भी कि इस संसार में कोई अमर नहीं है | - वेदान्त तीर्थ 

⇨  प्रशंसा की भूख जिसे लग जाती है, वह कभी तृप्त नहीं होता | - अज्ञात 

⇨  दूसरे की प्रशंसा करना बहुत कम लोग जानते हैं , इसलिए जब भी कोई आपकी प्रशंसा करे तो यह जानने की कोशिश करें कि सामने वाला आपसे आखिर चाहता है क्या है ? - स्वामी गोविन्द प्रकाश 

⇨  प्रशंसा खोजने वालों को वह नहीं मिलती | - खलील जिब्रान

प्रशंसा (Praise)
प्रशंसा (Praise)

Saturday, June 22, 2019

उदारता (Generosity)

उदार कौन है ? ( Who is generous? )  उदार किसे कहेंगे ? ( Who will say liberal? ) उदारता के क्या लाभ हैं ?( What are the benefits of generosity? )   आदि प्रश्नों का सटीक विवेचन किया गया है इस अध्याय में | महात्मा, मनीषी, विचारक एवं धर्म शास्त्र क्या कहते हैं उदारता के सन्दर्भ में, आइये जानें  - 
  
आभारी हूँ मैं उनका जिन्होंने मेरी निंदा करके मुझे सावधान बनाया | - अज्ञात 

⇒ अपने साथ उपकार करने वालों के साथ जो साधुता बरतता है, उसकी तारीफ़ नहीं है | महात्मा तो वह है जो अपने साथ बुराई करनेवालों के साथ भी भलाई करे | - महात्मा गाँधी 

⇒ सुशील, धर्मात्मा और सब मित्र व प्राणियों पर दया करने वाले पात्र बनो | दुनिया की तमाम सम्पत्तियाँ ऐसे पात्र को ही अपना आश्रय बनाती हैं, जैसे पानी नीचे की ओर तथा धुआं आसमान की ओर स्वाभाविक रूप से गति करता है | - विष्णु पुराण 

⇒ दुष्ट अपनी दुष्टता, सर्प अपना विष, सिंह रक्तपान जिस प्रकार नहीं छोड़ता, उसी प्रकार उदार अपनी उदारता नहीं छोड़ता | - स्वामी महावीर 

⇒ उपकार की फसल न बो सको, तो एक पौधा तो तैयार करो | - राज ठाकुर 

⇒ मुर्ख छोटा-सा कार्य आरम्भ करते हैं और उसी में बेचैन हो जाते हैं | बुद्धिमान बड़े से बड़े कार्य आरम्भ करते हैं और निश्चिन्त बने रहते हैं | - माद्य

⇒ उदारता मनुष्य का श्रेष्ट गुण है | - चार्वाक 

⇒ आप दूसरों के दुखों में सहानुभूति रखेंगे तो कल जब आपको उसकी आवश्यकता होगी, तब वे ही लोग आपको अपना सहयोग दिल की गहराइयों से देंगे | - अज्ञात 

⇒ महान उपलब्धियों के लिए हमे कर्म नहीं करना चाहिए, अपितु स्वप्न भी देखना चाहिए, योजना ही नहीं बनानी चाहिए, अपितु विश्वास भी करना चाहिए | - अनातोले फ़्रांस 

⇒ प्राकृतिक नियम के अनुसार सुख उदारता का और दुःख त्याग का पाठ पढ़ाने आता है | इतना ही नहीं, उदारता त्याग को पुष्ट करती है और त्याग को सुरक्षित रखता है | उदारता और त्याग को अपना लेने पर सुखियों और दुखियों में वास्तविक एकता हो जाती है, जिसके होते ही समस्त संघर्ष अपने आप मिट जाते हैं | तब कोई बैर भाव शेष नहीं रहता | - स्वामी शरणानन्द 

⇒ महान व्यक्ति न किसी का अपमान करता है और न उसको सहता है  | - होम 

⇒ उदार मन वाले विभिन्न धर्मों के सत्य देखते हैं, संकीर्ण मन वाले केवल अन्तर देखते हैं | - एक चीनी कहावत 

⇒ 'यह मेरा है यह दूसरे का' ऐसा संकीर्ण हृदय वाले समझते हैं | उदार हृदय वाले तो सारी दुनिया को कुटुम्ब सा समझते हैं | - हितोपदेश

⇒ उदारता उच्च वंश से आती है, दया और कृतज्ञता उसके सहायक हैं | - कार्नेल 

⇒ एक वीर पुरुष किसी से द्वेष नहीं करता, युद्ध की क्षति शान्ति में भूल जाता है और अपने भयंकर शत्रु का भी मित्र की भांति आलिंगन करता है | - काउपर 

उदारता (Generosity)
उदारता (Generosity)


Friday, June 21, 2019

क्षमा (Forgiveness)

क्षमा का दान सबसे बड़ा दान है | वास्तव में क्षमा का जीवन में क्या महत्त्व है ? क्षमा कौन कर सकता है ? क्षमा का क्या लाभ है ? क्षमा करने वाले को क्या प्राप्त होता है ? क्षमा न करने से क्या हानि होती है ? क्षमा किसे करना चाहिए और किसे नहीं ? इन सभी प्रश्नों का शास्त्र - सम्मत विश्लेषण किया है हमारे मनीषियों एवं विश्वविख्यात चिन्तको ने |

Forgiveness is the biggest donation. In fact what is the significance of forgiveness in life? Who can forgive me? What is the benefit of forgiveness? What does the forgiver receive? What is the loss of forgiveness? Who should forgive and not? The science of all these questions has been analyzed by our intellectuals and world renowned thinkers.

जो क्षमा करता है और बीती बातों को भूल जाता है, उसे ईश्वर की ओर से पुरस्कार मिलता है | - क़ुरान 

⇒ जो मनुष्य नारी को क्षमा नही कर सकता, उसे उसके महान गुणों का उपयोग करने का अवसर कभी प्राप्त न होगा | - खलील जिब्रान 

⇒ जिसने पहले कभी तुम्हारा उपकार किया हो, उससे यदि भारी अपराध हो जाये तो भी पहले के उपकार स्मरण करके उस अपराधी को तुम्हे क्षमा कर देना चाहिए | - वेदव्यास 

⇒ दान को सर्वश्रेष्ठ बनाना है तो क्षमादान करना सीखो | - चार्ल्स बक्सन

⇒ क्षमा में जो महत्ता है, जो औदार्य है, वह क्रोध और प्रतिकार में कहाँ ? प्रतिहिंसा हिंसा पर ही आघात कर सकती है, उदारता पर नहीं | - सेठ गोविन्ददास 

⇒ जिसे पश्चाताप न हो उसे क्षमा कर देना पानी पर लकीर खींचने की तरह निरर्थक है | - जापानी लोकोक्ति

⇒ संसार में ऐसे अपराध कम ही हैं जिन्हें हम चाहें और क्षमा न कर सके | - शरतचन्द्र 

⇒ जो लोग बुराई का बदला लेते हैं, बुद्धिमान उनका सम्मान नहीं करते, किन्तु जो अपने शत्रुओं को क्षमा कर देते हैं, वे स्वर्ग के अधिकारी समझे जाते हैं | - तिरुवल्लुवर 

⇒ न तो तेज ही सदा श्रेष्ट है और न क्षमा ही  |- वेदव्यास

⇒ क्षमा मनुष्य का सर्वश्रेष्ठ तथा सर्वोच्च गुण है, क्षमा दण्ड देने के समान है | - बेरन

⇒ दुष्टों का बल हिंसा है, राजाओं का बल दण्ड है और गुणवानों का क्षमा है | - महाभारत

⇒ क्षमा धर्म है, क्षमा यज्ञ है, क्षमा वेद है और क्षमा शास्त्र है | जो इस प्रकार जानता है, वह सब कुछ क्षमा करने योग्य हो जाता है | - वेदव्यास 

⇒ संसार में मानव के लिए क्षमा एक अलंकार है | - बाल्मीकि 

⇒ क्षमा तेजस्वी पुरुषों का तेज है, क्षमा तपस्वियों का ब्रह्म है, क्षमा सत्यवादियों का सत्य है | क्षमा यज्ञ है और क्षमा मनोविग्रह है | - वेदव्यास 

क्षमा (Forgiveness)
क्षमा (Forgiveness)

Thursday, June 20, 2019

भलाई

कहावत है कि 'कर भला, तो भला' | कुछ लोग इसे कोरी कहावत मानते हैं किन्तु यह शाश्वत सत्य है | जिन्हें शंका हो वे आजमा कर देख सकते हैं | स्वार्थवश किया गया कार्य भलाई नहीं | भलाई के सही मायने क्या हैं - आइये जानें  | 

बुरे आदमी के साथ भी भलाई ही करनी चाहिए | रोटी का एक टुकड़ा डालकर कुत्ते का मुँह बन्द कर देना चाहिए |  - शेख़ सादी

⇒ जैसे एक छोटे से दीप का प्रकाश बहुत दूर तक फैलता है, उसी तरह इस बुरी दुनिया में भलाई बहुत दूर तक चमकती है | - शेक्सपियर

⇒ भले बनकर तुम दूसरों की भलाई का कारण बन जाते हैं | - सुकरात 

⇒ जो भलाई करने का सदा प्रयत्न करता है, वह मनुष्य और परमेश्वर दोनों की कृपा प्राप्त करता है | पर जो बुराई की तलाश में रहता है, उसको बुराई ही मिलती है | - नीति वचन 

⇒ जो दूसरों की भलाई करता है वह अपनी भलाई स्वयं कर लेता है | परिणाम में नहीं वरन कर्म करने में ही क्योंकि सुकर्म का भाव ही एक यथेष्ठ पारितोषक है | - सेनेका 

⇒ जो दूसरों की बुराई करते हैं, वे ख़ुद निन्दित होते हैं | - ऋग्वेद

⇒ भगवान् तुम्हारे पदक, डिग्री या सर्टिफिकेट से नहीं जांचेगा, अपितु उन जख्मों के निशानों से जाँचेगा, जो तुम्हारे शरीर भलाई के लिए बने | - एल्बर्ट हुब्बार्ड्स

⇒ मनुष्य जब संसार से जाता है तो भलाई या बुराई ही साथ ले जाता है | - कबीर 

⇒ मानव की भलाई करने के अतिरिक्त और अन्य किसी कर्म द्वारा मनुष्य ईश्वर के इतने निकट नहीं पहुँच सकता | - सिसरो 

⇒ जिसमे उपकार वृत्ति नहीं, वह मनुष्य कहलाने का अधिकारी नहीं | - महात्मा गाँधी 

⇒ भली बातें कड़वी होती हैं, किन्तु उनके कड़वेपन का स्वागत करना चाहिए | क्योंकि उनमें  भलाई निवास करती है | - भर्तृहरि

 ⇒ जो भलाई से प्रेम करता है वह देवताओं की पूजा करता है, आदरणीयों का सम्मान करता है और ईश्वर के समीप रहता है | इमर्सन 

⇒ जो मनुष्य जगत की जितनी भलाई करेगा, उसको ईश्वर की व्यवस्था से उतना ही सुख प्राप्त होगा | - दयानन्द सरस्वती 

⇒ भलाई का मार्ग भय से पूर्ण है, परन्तु परिणाम अत्युत्तम है | - सुदर्शन 

⇒ जो मेरे साथ भलाई करता है, वह मुझे भला होना सिखा देता है | - फुलर 

⇒ पुष्प की सुगन्ध वायु के विपरीत कभी नहीं जाती, परन्तु मानव के सदगुण की महक सब तरफ फ़ैल जाती है | - गौतम बुद्ध 

भलाई
भलाई

Wednesday, June 19, 2019

वाणी

वाणी हमारे जीवन को सर्वाधिक प्रभावित करने वाला गुण है | क्या महत्व है जीवन में वाणी का ? वाणी द्वारा कैसे पाया जा सकता है सुख ? वाणी द्वारा कैसे उपजता है दुःख  ? जीवन में शान्ति और अशान्ति का वाणी से सीधा सम्बन्ध है | आइये देखें क्या कहती है महान विभूतियाँ वाणी के विषय में -

बाणों से बींधा हुआ अथवा फरसे से कटा हुआ वन भी अंकुरित  हो जाता है, किन्तु कटु वचन कहकर वाणी से किया हुआ घाव नहीं भरता | - वेद व्यास 

जो व्यक्ति उपयोगी और अनुपयोगी का अन्तर समझ लेते हैं,  वे कभी व्यर्थ शब्द व्यक्त नहीं करते | - संत तिरुवल्लूर 

कठोर शब्दों में कहे गये हितकर वाक्यों को सुनकर भी मनुष्य रुष्ट हो जाता है | - भास

कम बोलने से मन की शक्ति बढ़ती है | - महात्मा विदुर 

मधुर वचन सुनने में भी और कहने में भी प्रसन्नता देते हैं | लेकिन मधुर वचन अहंकार त्याग से ही सम्भव है | - कबीर 

पशु बोलने के कारण और मनुष्य बोलने के कारण कष्ट उठाते हैं | - बुक्मान 

कोमल उत्तर से क्रोध शान्त हो जाता है | कटु वचन से उठता है | - बाईबिल

कठोर किन्तु हित की बात कहने वाले थोड़े ही होते हैं | - बाल्मीकि 

शब्द से ही श्रृष्टि का उद्गम है और उसी में श्रृष्टि का विनाश और पुनः शब्द से ही श्रृष्टि की नई रचना होती है | - गुरुनानक देव 

प्रश्न का समय पर उपयुक्त उत्तर देना आनन्द प्रदान करता है | उचित समय पर कही गयी बात ज्यादा वजन रखती है | - नीति वचन 

झूठ बोलना तलवार के घाव के समान हैं, घाव भर जायेगा, किन्तु उसका निशान सदा बना रहेगा | - शेख सादी

गाली से प्रतिष्टा नहीं बढ़ती दोनों ओर अपमान है | इस दुनिया में सबसे ज्यादा कमजोर चीज, कठोर बात है | - शरतचन्द्र

हृदय केवल हृदय की बात कर सकता है क्योंकि उसके पास वाणी नहीं होती | - महात्मा गाँधी 

वाणी से भी वाणी की वर्षा होती है | जिस पर इसकी बौछारें पड़ती हैं, वह दिन-रात दुखी रहती है | - बाल्मीकि

वाणी
वाणी


Thursday, June 13, 2019

विचार ( Thoughts )

आपके विचार ही आपको अच्छा-बुरा बनाते हैं| विचारों से ही व्यक्ति महान बनता है और विचारों से ही तुच्छ | सुन्दर विचार व्यक्ति के जीवन को सुखी बनाते हैं एवं अशुद्ध विचार व्यक्ति को दुखों एवं संकटों में फँसा देते हैं | विचारों को शुद्ध, परिपक्व एवं सुदृढ़ बनाएँ इन महान दार्शनिकों के मार्गदर्शन से और पाएँ जीवन का सच्चा आनन्द | 

मैले मन में अच्छे विचार वैसे ही मैले हो जाते हैं जैसे मैले बर्तन में साफ़ पानी अपनी अशुद्धता और पवित्रता को बैठता है | - महात्मा गाँधी 

⇨ सत्य में इतनी शक्ति होती है कि उसकी एक चिंगारी असत्य के पहाड़ी फूस को आसानी से भस्म कर सकती है | प्रेमचन्द

⇨ सुन्दर विचार, अनमोल धन है | - डी. पाल

⇨ विचार के सिवाय जगत और कुछ नहीं | जगत विचार का ही ठोस रूप है | - महर्षि रमण

⇨ मेघ वर्षा करते समय उपजाऊ और बंजर भूमि भेद नहीं करते | इसी प्रकार अपने सुन्दर ह्रदय के विचार धर्मी और अधर्मी दोनों पर व्यक्त करने चाहिएँ |
- तुकाराम 

⇨ बुरे विचार ही हमारी सुख-शान्ति के शत्रु हैं | - स्वेट मार्डेन 

⇨ जो कार्य बल और पराक्रम से पूर्ण हो पाता, उपाय द्वारा वह सरलता से पूर्ण हो जाता है | -  हितोपदेश

विचार ( Thoughts )
विचार ( Thoughts )

Monday, June 10, 2019

"क्या यही है समाज और सामाजिकता "

आज हमें महिलाओं को उसकी असीम अधिकार और क्षमताओं का बोध् कराना होगा और महिलाओं को स्वयं अपनी अस्मिता को पहचानना होगा। ऐसा माना जाता है कि कोई समाज महिलाओं की उपेक्षा करके प्रगति नहीं कर सकता। हमारे प्रथम राष्ट्रपति श्री राजेन्द्र प्रसाद का कथन है - स्त्री के भीतर छिपी परिवर्तनकारी ऊर्जा पृथ्वी को स्वर्गतुल्य बना सकती है। महिलाओं के प्रति बढ़ते हुए अत्याचार हमारी मध्ययुगीन मानसिकता को उजागर करते है। हमें अपनी सोच बदलनी होगी। महिलाएं हमसे किसी मामले में कमतर नहीं हैं,को कभी नकारा नहीं जा सकता है।कुछ राजनीतिक दल महिलाओ के लिए  आरक्षण की माँग करते है मगर चुनाव आते ही टिकट देने मे पीछे हट जाते है। उनकी राजनीतिक हिस्सेदारी ठीक ढंग से ना देना ये क्या बताता है एक तरफ महिलाओ की आरक्षण की माँग करना, दुसरी तरफ राजनीतिक हिस्सेदारी ना देना ये जो दोहरा चरित्र है बड़ा ही विचित्र है।महिलाएं एक दिन में पुरुषों की तुलना में छ: घण्टे अधिक कार्य करती हैं। आज विश्व में काम के घण्टों में 60 प्रतिशत से भी अधिक का योगदान महिलाएं करती हैं जबकि वे केवल एक प्रतिशत सम्पत्ति की मालिक हैं।महिलाओं के लिए नियम-कायदे और कानून तो खूब बना दिये हैं किन्तु उन पर हिंसा और अत्याचार के आंकड़ों में अभी तक कोई कमी नहीं आई है। संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष की रिपोर्ट के अनुसार भारत में 15 से 49 वर्ष की 70 फीसदी महिलाएं किसी न किसी रूप में कभी न कभी हिंसा का शिकार हो होने वाले अत्याचार के लगभग 1.5 लाख मामले सालाना दर्ज किए जाते हैं जबकि इसके कई गुण दबकर ही रह जाते हैं। विवाहित महिलाओं के विरूद्ध की जाने वाली हिंसा के मामले में बिहार सबसे आगे है जहां 59 प्रतिशत महिलाएं घरेलू हिंसा की शिकार हुई। उनमें 63 प्रतिशत शहरी क्षेत्रों की थी।समाज के कुछ मनचले ही दुष्कर्म जैसे जघन्य अपराधों को अंजाम देने से बाज नहीं आते हैं। ऐसे लोगों को समाज द्वारा ही सजा देनी चाहिए, क्योंकि कानून से बचने के सारे उपायों को यह जानते हैं। और कानून का उनको कोई डर भी नहीं होता है।कई लोग, नेता और समाज के बुद्धजीवी लोग मानते हैं कि लड़कियों को जींस नहीं पहननी चाहिए, अकेले नहीं जाना चाहिए और जल्दी घर आ जाना चाहिए। इन्हीं कारणों से उनके साथ दुष्कर्म होता है। मैं पूछती हूं कि क्या लड़कियों इन सब की आजादी नहीं है? लड़कियों के साथ दुष्‍कर्म होना उनकी दैनिक दिनचर्या नहीं, बल्कि हमारी छोटी सोच इसके लिए जिम्मेदार है।
"क्या यही है समाज और सामाजिकता "
"क्या यही है समाज और सामाजिकता "


"मायका"

सुविख्यात लेखिका 
अमृता प्रितम जी ने *मायके* पर क्या खूब लिखा है:
रिश्ते पुराने होते हैं 
पर "मायका" पुराना नही होता 
उस  देहरी को छोडना आसान नही होता।

पर कुछ अपवाद भी हैं देखें 
शायद कुछ लोग सहमत नहीं होंगे 
कुछ के घाव हरे हो जाएंगे|   
                  "मायका"
किसी मकान को घर कहे ज़माना हो गया 
रिश्ते तो रिश्ते मायका भी पुराना हो गया 
सुना था अलाये बलाये निकाली जाती हैं 
पर हकीकत, अचानक कैसे आयी ये निगाहे बोल जाती
जिस घर का कोना कोना यादों से भीगा होता 
उसी घर में,कहीं कोने में बैठ पानी पीना होता 
वो बचपन के नखरे,रंगीन कटोरी, छोटी ग्लासी 
आज पसंद की कटोरी टूटी देख आये उदासी
पूरे घर में लिपस्टिक,नेलपेंट बिखेरती
आज पर्स का सामान पर्स में रखती
ऐसा नहीं के कुछ कोई लूट ले जाएगा
हां पर माँ कहेगी..रख ले तेरा कुछ छूट जाएगा
वो क्या जाने छूट गया सब कुछ अब क्या लूट जाएगा
छोटी सी बात पर चीख चीख कर शोर मचाती
मुस्कुराए लब,आँखों में आंसू, दिल में दर्द छुपाती
वो ज़िद्द,एक कपड़ा चुनने में घंटो लगाती
आज पल में सबसे कम दाम का उठाती
जब कोई सामान दें माता पिता 
कह देती मुझे नही भाता
जिस घर से दूर होने का विचार ही रूला जाता 
वही बैठने पर घड़ी का कांटा सताता
एक ज़माने में सिर्फ हमारा नखरा चलता 
अब कहते हैं हमारे घर ये नहीं चलता 
बाहर जाते वक़्त मां कहती थी बेटा जल्दी आना 
अब कहती है पहले अपना घर संभालना
कभी हमारी चुलबुली बातों से घर में रौनक छा जाती
वक़्त यूं बदला, जब आती भाषण सुनाती
बचपन में जब दौड़ते भूकंप आता हुडदंग मच जाता
वही आज अदब से चलती तिनका भी बचाती
महलों से उठाकर फेक दिया गलियों में 
अब खुद उस गली में उन्हें गंध है आती
मां बच्चों के लिए दुनिया से लड़ जाती
आज बात बात पर शिकायत दर्ज़ कर जाती
सुना था बच्चे मां पिता के लिए बड़े नहीं होते
मायका पुराना नही होता 
रिश्ते तो रिश्ते मायका पुराना हो गया 
बेगाना हो गया |

आज भी बहोत सी बेटियों के जीवन की सच्चाई है.. 
विडंबना तो ये है कि मायके में पराया धन कहलाती है और ससुराल में कभी अपनाई नही जाती.. पराये घर से आई कहा जाता है.. कोई ये बता दे की बेटियों का घर कौन सा है 
यह एहसास दिल को झिंझोड़ता है;क्योंकि लगभग सभी ज़गह यही दास्तां है...माँ-बाप को ऐसी दकियानूसी सोच से मुक्ति पानी होगी।उनकी जिम्मेदारी सिर्फ़ बेटी की शादी तक नहीं है;बल्कि ताउम्र उसके साथ खड़ा होना है...मानसिक,आर्थिक,सामाजिक...सभी प्रकार के संबल के साथ...ताकि बेटी इस निर्दयी समाज में अपने आप को एक पल की ख़ातिर भी अकेला महसूस न करे। काश! हर माता पिता ऐसा सोचते...  आर्थिक मदद करें या न करें पर... मानसिक तौर पर हमेशा साथ खड़े रहना चाहिए...
 "मायका"
 "मायका"
Priya Batra
(Nagpur)

Sunday, June 9, 2019

हे ! युवाओं ..मत भागों ..! हे ! हिन्दुस्तान के आगामी गौरव ..रुको ..ठहरो ..|

Know your culture and Proud on Your culture.

हे ! युवाओं ..मत भागों ..! हे ! हिन्दुस्तान के आगामी गौरव ..रुको ..ठहरो ..| 
हे ! देश की युवा पीढ़ी जिस विकास की गाड़ी पर तुम बैठना चाहते हो वह अन्धकार की ओर जाती है | मत भागो इसके पीछे | 
जिस आर्यवृत की संस्कृति को पीछे छोड़ रहे हो वास्तव में वही तुम्हारा मूल है वही तुम्हारा प्रकाश है | वही तुम्हारा ज्ञान है | 
Dear Indian Your, Don't follow western culture. Don't become a modern person, become a gentleman and buildup, simple living and high thinking. 

जैसे-जैसे हम बाहरी संस्कृति को अपने देश में शरण दे रहें हैं | वैसे-वैसे ये हमारी संस्कृति का नाश कर रही है | वह दिन दूर नहीं जब यह पश्चिमी सभ्यता हमारी भारतीय संस्कृति को पूर्णतः नष्ट कर देगी | आइये जाने क्या भी हमारी पहचान और क्या थे उसके फ़ायदे | 

गुरुकुल में पढ़ते थे - 
हमारी सभ्यता में गुरुकुल थे | ऋषिमुनि बचचों को समान रूप से ज्ञान देते थे | राजा हो या प्रजा सभी के बच्चे समान रूप से शिक्षा ग्रहण करते थे | कोई भेद-भाव नहीं | यहाँ तक कि भगवान् श्री कृष्ण तथा मर्यादा पुरुषोत्तम राम को भी अपना-अपना राजमहल छोड़कर गुरुकुल जाना पड़ा | यदि चाहते तो वे इतने समृद्ध थे कि महल में ही गुरुओं को बुला सकते थे, परन्तु उन्होंने उस प्राचीन पवित्र परम्परा का सम्मान कर उसका पालन किया | 
क्योंकि बालक जब घर में, समाज में रहकर शिक्षा ग्रहण करता है तब उसका आधा मन घर की चीजों में बंट जाता है | और गुरुकुलों में जब तक शिक्षा-दीक्षा पूरी नहीं हो जाती थी वे बालक वहीँ रहते थे | परिणामस्वरूप वे हर क्षेत्र में निपुण होते थे | 

गुरुकुल में पढ़ते थे
गुरुकुल में पढ़ते थे 


सादा भोजन करते थे -
एक कहावत है कि स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मस्तिष्क निवास करता है और स्वस्थ शरीर बनता है शुद्ध, सात्विक और शाकाहारी भोजन से | भगवान् राम ने चौदह वर्षों तक जंगलों में फलाहार ही किया | और श्री कृष्ण ने माखन-मिश्री का महत्व समझाया | किन्तु आज का ये समाज राक्षस प्रवृति का होता जा रहा है | वह जानवर तो जानवर इंसानों को खाने से भी नहीं चूक रहा है इसका कारण पश्चिमी सभ्यता ही है | 
लेकिन भारत के लोग यह नहीं सोचते कि वे क्यों खाते हैं मांस ...क्योंकि उनके यहाँ अन्न, फल सब्जी आदि पर्याप्त मात्रा में नहीं होते इस कारण | परन्तु हमारा देश कृषि प्रधान देश है यहाँ अन्न की कमी नहीं | 

इमानदार तथा वचन परायण थे - 
इमानदारी हमारी संस्कृति के कण-कण में थी, महाराजा सत्यवादी हरीशचंद्र, महात्मा गाँधी ईमानदारी के साकार मूर्त हैं | और भगवान् श्री राम जिहोने वचन निभाने का सूत्र दिया | 
रघुकुल रीति सदा चलि आयी
प्राण जाये पर वचन न जायी 

ऐसी महान विभूतियों ने इस भारत की धरती पर जन्म लिया परन्तु उनका अनुशरण न कर दूसरे देशों के आडम्बर का चोला पहनने में लगें हैं | 

इमानदार तथा वचन परायण थे
इमानदार तथा वचन परायण थे


बड़ों का आशिर्वाद लेते थे - 
बड़ों के पैर छूकर उनसे आशीर्वाद की पवित्र परम्परा हमारे भारत देश में ही है और कहीं नहीं है | हर छोटे-बड़े काम में बड़ों की राय लेना शुभ माना जाता था और फलदायी भी सिद्ध होता था | 
आज की युवा पीढ़ी बड़ों के पैर छूने में ही स्वयं को लज्जित महसूस करती है उनसे किसी काम में राय लेना तो दूर की बात है | 

बड़ों का आशिर्वाद लेते थे
बड़ों का आशिर्वाद लेते थे


हमारी संस्कृति अर्थात् हमारा मूल ही खतरे में है | परिणाम स्वरुप देश में भ्रष्टाचार, बलात्कार और न जाने कौन-कौन से अपराध दिन-प्रतिदिन बढ़ते जा रहे हैं | यदि वास्तव में इन सबको मूलतः नष्ट करना है तो लौट आओ अपनी संस्कृति की ओर ...| 

Saturday, June 8, 2019

हीनता (Inferiority)

हीनता क्या है ? (What is inferiority?) मन में इसका जन्म क्यों होता है ? हीनता के प्रदर्शन से व्यक्ति को क्या हानि होती है ? (What harm does a person suffer from the performance of inferiority?) कैसे पायें हीनता से मुक्ति (How to get rid of inferiority), बता रहे हैं निम्नोक्ति अनमोल वचन | पढ़ें और हों हीनता से मुक्त | 

कीड़ों को रौंदने और शहंशाह के आगे गिडगिडाने से घृणा करें | - शेख सादी

 दीनता-हीनता का प्रदर्शन किसी मनुष्य के समक्ष मत करो, वहां से सिवाय उपहास के कुछ न पाओगे, यदि दीन-हीन बनना है तो ईश्वर के समक्ष बनो जो सबका दाता है | - शब्द प्रकाश 

 अगर कोई आदमी अपने को कीड़ा बना ले तो पद दलित होने पर उसे शिकायत का हक नहीं है | - केंट 

 हीनता हिंसा से भी हीन होती हैं | - मैथिलीशरण गुप्त 

 मनुष्य को कोई ऐसा काम नहीं करना चाहिए, जिससे वह स्वयं को छोटा और हीन समझने लगे | - सन्त ज्ञानेश्वर 

 हीनता का अनुभव करना ही पाप है | - अज्ञात 

 जो पुरुष निरुत्साह, दीन और शोकाकुल रहता है, उसके सब काम बिगड़ जाते हैं और वह अनेक विपत्तियों में फँस जाता | - बाल्मीकि रामायण 

 किसी से मेहरबानी मांगना अपनी आजादी बेचना है | - महात्मा गाँधी 

 क्या तुम लंगड़े हो जो दूसरों का आसरा ताक रहे हो ? - अरस्तु 

 खैरात के हलवे से मेहनत की सूखी रोटी मीठी होती है | - शेख सादी

 विश्व की समस्त शक्तियों हमारी हैं | हमने अपने हाथ अपनी आँख पर रख लिए हैं और चिल्लाते हैं कि सब ओर अँधेरा है | जान लो कि हमारे चारों ओर अँधेरा नही हैं | अपने हाथ अलग करो, तुम्हें प्रकाश दिखाई देगा, जो पहले भी था | कमजोरी कभी नहीं थी | हीनता कहीं नहीं थी | हम सब मुर्ख है जो चिल्लाते हैं कि हम दीन-हीन हैं, कमजोर हैं, अपवित्र हैं | - महर्षि अरविन्द 

  किसी के कृपा भाजन होने से इर्ष्या का पात्र होना अधिक अच्छा है | - अज्ञात 

हीनता (Inferiority)
हीनता (Inferiority)

अज्ञान ( Ignorance )

अज्ञान क्या है ? ( What is ignorance? ) अज्ञानी कौन है ? ( Who is ignorant? )  ज्ञान की सही परिभाषा क्या है ?  ( What is the correct definition of knowledge? ) कैसे हो अज्ञान का अन्धकार दूर ?  ( How is the darkness of ignorance away? ) आइये देखें विश्व-विभूतियों के इस सन्दर्भ में क्या विचार एवं वचन हैं |
 ( Let's see what are the thoughts and words in this context of the world class. )

भगवान् की परम भक्ति मनुष्यों में कामधेनु के समान मानी गई है | उसके रहते हुए भी अज्ञानी मनुष्य संसार रुपी विष का पान करते हैं | यह कितने आश्चर्य की बात है | - नारद पुराण 

⇒ आपनी अज्ञानता से अनभिज्ञ होना अज्ञानी की सबसे बड़ी बीमारी है | - ए.बी. एलांकट

⇒ अज्ञान एक ऐसा कांटा है, जो चुभने के बाद किसी दूसरे को नहीं दिखता, लेकिन जिसको चुभता है, उसे हमेशा परेशान करता है | - आद्य शंकराचार्य 

⇒ दुःख यदि मौत के लिए है तो अज्ञानता की कोख से पैदा होता है | - चाणक्य 

⇒ कभी-कभी उन लोगों से भी शिक्षा मिलती है, जिन्हें हमने अज्ञानी समझा था | - प्रेमचन्द

⇒ जब तक भगवान् दूर व बाहर प्रतीत होते हैं, तब तक अज्ञान है, परन्तु जब अपने भीतर अन्तर में उनका अनुभव होता है तथा यथार्थ ज्ञान का उदय होता है, तब उन्हें हृदय मन्दिर और जगत पर देखा जा सकता है | - अज्ञात 

⇒ जितना हम अध्ययन करते हैं उतना ही हमको अपने अज्ञान का आभास होता है - स्वामी विवेकानन्द

⇒ उस विषय में अज्ञानी रहो, यह ज्यादा बेहतर है बजाय अधूरा ज्ञान प्राप्त करते के | - साइरस

⇒ जहाँ अज्ञानता का बखान हो रहा हो, वहाँ बुद्धिमानी दिखाना भी मूर्खता है | - बाल गंगाधर तिलक 

⇒ अज्ञान ही पाप है | शेष पाप तो उसकी छाया मात्र है | - ओशो 

⇒ अज्ञान अन्धकार स्वरुप है | दिया बुझाकर भगाने वाला यही समझता है कि दूसरे उसे देख नहीं सकते, तो उसे यह भी समझ रखनी चाहिए कि वह ठोकर खाकर गिर भी सकता है | - रामचन्द्र शुक्ल 

⇒ अज्ञानी रहने की अपेक्षा जन्म न लेना ही श्रेयस्कर है | - प्लेटो 

⇒ अज्ञानता अँधेरी रात है जिसमे न चाँद आता है न सितारे | - महात्मा विदुर 

⇒ अज्ञान के लिए मौन से श्रेष्ट कुछ नहीं और यदि यह युक्ति वह समझ ले तो अज्ञानी न रहे | - शेख सादी

⇒ स्वयं को ज्ञानवान समझना सबसे बड़ा अज्ञान है और अज्ञानी सदा दुखी रहता है | - वेदान्त तीर्थ 

⇒ अज्ञान के समान दूसरा कोई बैरी नहीं | - चाणक्य 

⇒ अज्ञान से बड़ा कोई शत्रु भी नहीं | -  शंकराचार्य

⇒ जहाँ अज्ञान है वहाँ दुःख आकर ही रहेगा | - अरविन्द 

⇒ अज्ञान की दासता से मृत्यु श्रेयस्कर है | संतोष से बढ़कर कोई सुख नहीं और धैर्य से बड़ी शक्ति नहीं | - सत्य साईं बाबा 

अज्ञान ( Ignorance  )
अज्ञान ( Ignorance  )

Wednesday, June 5, 2019

"बेबसी"

लिखना नही जानते पर एक छोटी सी कोशिश है
आज के युग की मुहब्बत बच्चे समझना नही चाहते और माँ पिता समझा नही पाते,
बच्चे माँ पिता से बगावत करते हैं
और एक दिन धोखा खाते है
जिसका ख़ामियाज़ा नहीं भरा जा सकता
काश कोई इन पंक्तियों को पढ़ कर सही राह चुन ले तो लिखना सफल होगा..

ये मुहब्बत है जनाब ये कहा किसी का एतबार करती
ये तो इश्क़-ए-जुनूं में, बंद आँखें कर प्यार करती

ये कैसी मुहब्बत है यारों,चाहे दगा़ हो इसमे हजार
अपनों को करके गुनहगार,बंद आँखें कर प्यार करती

बड़ो की सीख पर नहीं ये एतबार करती
ये तो दोस्तों पर कर भरोसा,बंद आँखें कर प्यार करती

ये न समझे के जब दामन में दाग़ लग जाए एक बार
फिर मिटाना है दुष्वार, पर ये बंद आँखें कर प्यार करती

सिर्फ़ भरोसा ही नहीं,इज्जत भी हो जाए तार तार
दिल पे लगेंगे घाव हजार,पर ये बंद आँखें कर प्यार करती

ए-मुहब्बत कभी तो कर माँ बाप पे एतबार
कभी अपनों की करके देख दरकार,यूं न बंद आँखें कर प्यार

ये तेरी ही खुशियां सोचे हर बार यूं न बंद आँखें कर प्यार
बस एक प्रहार इस चार दिन की मोहब्बत पर, आंखे खुलती ही तब है जब सब कुछ बर्बाद हो जाये, काश इससे लोगो को ये बात समझ आये,, सच्चाई के साथ एंव विचार कर विषय चुना हमने, बस हकीकत से रूबरू कराने की कोशिश.. जिससे सभी को कुछ न कुछ शायद सीखने को मिले
प्यार की परिभाषा क्या है ये भी इन नौजवानों को नहीं पता होता, लेकिन फिर भी प्यार नाम की चिड़ियां के पीछे भागे जा रहे हैं।क्या माता पिता के प्यार से बढ़कर भी किसी का प्यार हो सकता है, नहीं न, फिर क्यों उनकी सीख को नज़रअंदाज़ कर ऐसे रास्तों पर चल पड़ते हैं जहां भविष्य निश्चित ही नहीं।
लेकिन एक बात ये भी है अगर भविष्य निश्चित हो,और सभी पक्ष मंजूरी दे तो प्रेम विवाह गलत नहीं हैं।आज समाज में प्रेम विवाह का बहुत प्रचलन है।
निष्कर्ष ये है कि भविष्य सुरक्षित रहे और सम्मान बना रहे चाहे प्रेम विवाह हो,या आयोजित विवाह।
प्रेम विवाह समस्या नही है... समस्या तो सही चुनाव है.. जो बच्चे जोश में गलत कर लेते हैं.. काश चुनाव के दौरान माँ पिता की राय लें...  और सही मार्गदर्शन मिले उस पर बच्चे सहमत हो... साथ ही प्यार की सीमाओं को समझे...
लेकिन आजकल सीमाएं पहले लांघते हैं, प्यार हमेशा रहे या नहीं।ये मनोदशा स्वस्थ समाज को चरमराने का काम कर रही है। इसलिए हमें बच्चों से खुल कर बात करनी चाहिए ..चाहे वो बेटा हो या बेटी... सही गलत हमें हर तरह का उन्हें समझाने की कोशिश करनी चाहिए... चाहे फिर कुछ लोग इसे फूहड़ पन कहे...
कुछ एहसास सांझा करने की कोशिश की है,गरआप तक पहुँचे तो लिखना सफल हुआ ..बस आप के और हमारे बीच से ही विषय लिए हैं..हम तर्क ही चाहते हैं ताकि सभी की राय सामने आए.. और बच्चों, बड़ो सभी को दिशा प्रदान हो...


"बेबसी" - प्रिया बतरा
"बेबसी" - प्रिया बतरा 

Priya Batra
(Nagpur)

Tuesday, June 4, 2019

आदत (Habit)

आदत क्या है ? (What is habit ?, What are good habits ? What are bad habits ?) आदत कब अच्छी और कब बुरी होती है ? (Which is good habit and which is bad habit ?) कैसे पड़ती हैं बुरी आदतें और इनसे छुटकारा सम्भव है ? (How do bad habits and get rid of them ?) व्यक्ति को कैसी आदत डालनी चाहिए ? आदतों की शक्ति एवं लाभ-हानि का सटीक विवेचन विश्व-विख्यात विचारकों के नजरिये से - (Let's see the power of habit).

➤ आदत रस्सी की भांति है, पर ऱोज इसमें हम एक बट देते हैं और अंत में इसे तोड़ नहीं पाते - मान

➤ गन्दी आदतों को छोड़ने की आदत डालो - डी. पॉल 

➤ बुरी आदतों से हमारी शुद्धता का आभास मिलता है - डॉ. एल्डर 

➤ आदत तो आदत ही है और किसी भी व्यक्ति द्वारा यह खिड़की से बाहर नहीं फैंक दी जाती | हाँ, एक-आध सीढ़ि तो खिसकाई जा सकती है | - मार्क -ट्वेन 

➤ इस संसार का प्रत्येक व्यक्ति आदत से मजबूर होता है | - सुकरात 

➤ आदतों को रोका न जाये तो वे शीघ्र ही लत बन जाती हैं - संत आगस्टिन 

➤ किसी व्यक्ति में एक बुरी आदत पड़ती है, तो फिर वह बीज के रूप में बुरी आदतों के वृक्ष को पनपा देती है | - शैतान के बेटे को घर पर आमन्त्रित करो तो उसका पूरा कुनबा चला आता है | - स्वेट मार्डेन 

➤ लोमड़ी खाल बदलती है, आदतें नहीं | - सेटोंनियम

➤ आदत विषैले नाग की भांति है जिसका जहर इन्सान के जीवन को समय से पूर्व नष्ट कर देता है | हैगलेट

➤ आदत डालनी है, तो परहित करने की आदत डाल | - धरम बारिया 

➤ आदत की शक्ति महान है, यह हमे मेहनत को बर्दाश्त करना सिखाती है और चोट से नफरत कराती है | - सिसरो 

➤ आदतें लोहे की जंजीर के समान हैं जो हमे बाँधकर रखती है | - लेक स्टीन 

➤ आदत के कारण लोग जितने काम करते हैं उतने वेवेक के कारण नहीं करते | - अंग्रेजी लोकोक्ति

➤ नीम गुड के साथ खाने पर भी अपनी कड़वाहट नहीं छोड़ता, इसी तरह नीच सज्जनों के साथ रहकर भी आपनी आदत से बाज नहीं आता | - राम प्रताप त्रिपाठी 

➤ आदत भी एक तरह की आँख है | - अमृतलाल नागर 

मनुष्य सम्पत्ति प्राप्त हो जाने पर भी उसका उपभोग नहीं जानता अर्थात जैसी आदत रहती है उसी के अनुसार खर्च करता है | जैसे गर्दन भर पानी में डूबा हुआ भी कुत्ता जीभ से चाटकर ही पानी पीता है | - अज्ञात 

आदत (Habit)
आदत (Habit)

"तुम बिन"

जब से तुम नहीं हमसफर
तुम बिन ज़िंदगी भी अंजानी राहों का सफर

देखें लाख तुफां बाहर समंदर
तुम बिन कैसे बयां करे अंदर का मंजर

हैं अकेले,नही तुम हो पास
तुम बिन जीने का नही एहसास

क्या कहे तुम बिन नही सुकूं
तुम बिन जी ना सकूं

लम्हा-लम्हा,कतरा-कतरा जल रही हैं ज़िंदगी
तुम बिन कैसे हो बंदगी

किससे कहे हम जिये कैसे
रोना चाहें भी तो कैसे,इन आँखों में तुम बसे

वक्त नही कटका ख़्वाहिशे भी टूट गई
तुम बिन हर तमन्ना रूठ गई

बोझिल हुई हैं सांसे तुम बिन
आँखें धुंधला गई तुम बिन

मांगी थी जो हर मन्नत अधूरी
तुम बिन जीना मजबूरी

तुम बिन खुशियां कहां बाज़ार में
हम तो दर्द ख़रीद लाए उधार में

===============

ख़ुदा भी तू,मूरत भी तू
तुम बिन इबादत किस की करूं

यूं भी तेरे ख़्यालो में थी ज़िंदगी
तुम बिन होती नहीं ख़्यालो में बंदगी

ख़्वाबो वाली नींद टूट गई
तुम बिन खुशियां रूठ गई

तुम्हारे दिए फूल सौगात हुई पुरानी
तुम बिन हर बात झूठी कहानी

अब सोती नहीं है ये आँखें
तुम बिन बहोत रोती हैं ये आँखें

तेरी चाहत के सिवा कोई चाहत नही
तुम बिन मिलती कही राहत नहीं

वो लम्हा तूने जब मुंह मोड लिया
तुम बिन हमने जीना छोड़ दिया

निखरना भूल गए तुम बिन
कि बिखर गए हैं तुम बिन..

===============

 सांसें भी बेवफ़ा लगें
तुम बिन जीना भी सज़ा लगें

कभी जिन आँखों में रंगत समायी
तुम बिन वो आँख भर आयी

तेरा दिया दर्द भी बेगाना
तुम बिन बेरंग ज़माना

अब है कायनात से रंजिशें
तुम बिन नही अब सांसों को बंदिशें

दुआ के लिए हाथ उठाए भी तो कैसे
तुम बिन क्या मांगे रब से

यूं तो कहने को है सभी पास
तुम बिन नही खुद के ही साथ

क्यों हो तुम ख़फा
तुम बिन भटके मेरी वफ़ा

तुम बिन कैसे कटे ये पल
बहोत हुआ अब साथ चल


"तुम बिन"
"तुम बिन"

Priya Batra
(Nagpur)

Monday, June 3, 2019

त्याग (Sacrifice)

त्याग क्या है ? (What is sacrifice?) त्याग के क्या फल हैं ? (What is the result of sacrifice?) किसका त्याग त्याग कहा गया है, किसे त्यागने से सुख प्राप्त होता है ? (Who gets happiness from renouncing?) व्यक्ति की ख़ुशी का सबसे बड़ा रहस्य क्या है ? (What is the biggest secret of a person's happiness?) आइये जानें | 

इच्छाओं का त्याग करने वाले यात्रियों के गुण गाना उतना ही असम्भव है, जितना संसार में अब तक मरे जीवों की गिनती करना | - श्री निक्वार्क 

➤ इन छः का त्याग कभी न करें - सत्य, दान, कर्म, क्षमा, धैर्य और गुरु | - वेदव्यास

➤ त्याग और बलिदान किये बिना यदि तुम ज्ञान प्राप्त करना चाहते हो तो उसका देवता तुम्हारे लिए द्वार नहीं खोलेगा | इस संसार में कुछ भी पाने के लिए उसका मूल्य चुकाना ही पड़ता है | - स्वेटमार्डेन 

➤ त्याग के बिना किसी स्वार्थ की प्राप्ति नहीं होती| - रवीन्द्रनाथ ठाकुर

➤ संसार में सबसे बड़ा अधिकार सेवा और त्याग से प्राप्त होता है | - प्रेमचन्द 

➤ कोई भी मनुष्य स्वयं के लिए गुलाब नहीं उगाता | आनन्द प्राप्ति के लिए सुन्दरता को दूसरों के साथ बाँटने से ही उसकी प्राप्ति में वृद्धि होती है | - चेस्टर चार्ल्स 

➤ ऊंचाई पर पहुँचने के पश्चात् बादल बनकर भलाई के लिए बरसो | -  नित्यानन्द

➤ अपना जीवन लेने के लिए नहीं, देने के लिए है - स्वामी विवेकानन्द

➤ जिस आदमी की त्याग की भावना अपनी जाति से आगे नहीं बढ़ती, वह स्वयं स्वार्थी होता है और अपनी जाति को भी स्वार्थी बनाता है | - महात्मा गाँधी 

➤ ख़ुशी का सबसे बड़ा रहस्य त्याग है | - एंड्रयू कारनेगी

➤ छोटी वस्तुओं की अपेक्षा बड़ी वस्तुओं का त्याग सरल है | - माल्टेन

➤ त्याग के अतिरिक्त और कहाँ वास्तविक आनन्द मिल सकता है, त्याग के बिना न ईश्वर प्रेरणा हो पाती है, न प्रार्थना | - रामतीर्थ 

➤ त्याग के समान कोई सुख नहीं है | - महाभारत

➤ पूर्ण त्याग और ईश्वर में पूर्ण विश्वास ही हर चमत्कार का रहस्य है | - स्वामी रामकृष्ण परमहंस

➤ ख़ुशी इस बात पर निर्भर करती है कि आप क्या दे सकते हैं इस पर नहीं कि आप क्या पा सकते हैं | - महात्मा गाँधी 

➤ कर्म से, धन से अथवा संतान से विद्वानों ने अमृत रुपी मोक्ष नहीं प्राप्त किया है, किन्तु एक त्याग से उसे प्राप्त किया है | - अज्ञात 

त्याग (Sacrifice)
त्याग (Sacrifice)

वैवाहिक जीवन में मुकाबला नहीं बल्कि.. आदर भाव चाहिए ..

वरना औरत किसी पुरूष से कम नहीं....
किसी मर्द से मुकाबला करना और
किसी भी दर्ज़े में कमज़ोर न रहना,
मुझे अच्छा लगता है |
खुद का काम खुद करना
किसी पुरूष के आसरे न रहना
मुझे अच्छा लगता है |
पुरूष के साथ कदम से कदम मिलाकर चलना,
कठिन रास्तों पर भी निडर रहना,
खुद का ख़्याल खुद रखना
मुझे अच्छा लगता है |
पुरूष का प्रेम से बढ़ाया हाथ,
साथ चलना ज़िंदगी के उतार चढ़ाव में
मुझे अच्छा लगता है |
मदद का हाथ न हो जो,
मेरी कमजोरी न जताता हो जो वो साथ
मुझे अच्छा लगता है |
बुरा लगता है जब कोई कहे तुम से नहीं होगा,
मुझे अपने कंधों पर जिम्मेदारी लेना..
और कहना तुम छोड़ दो यह मेरा काम है..
ऐसा बोझ उठाना मुझे अच्छा लगता है |
भाग दौड़ की ज़िंदगी,
घंटो स्टेशन पर गाडी का इंतजार,
भाग कर ट्रेन पकड़ना मुझे अच्छा लगता है |
घर की जिम्मेदारियों के साथ साथ
बाहर की दिक्कत उठाना मुझे अच्छा लगता है |
हर रोज़ रात को दरवाज़े खिड़कियों की जांच करना,
आधी रात हलकी सी आहट पर
शेरनी बन गरजना मुझे अच्छा लगता है |
मजबूत बन आंसू छिपाकर मुस्कुराना,
यकीन से अगला कदम बढ़ाना मुझे अच्छा लगता है
परिवार की जिम्मेदारी और मान के लिए ढाल बन खड़े हों जाना,
बच्चो को सहारा दे सीने से लगाना मुझे अच्छा लगता है |
गैर नज़रों से बच्चों को महफ़ूज़ करना,
और उन नज़रों को नोच देना मुझे अच्छा लगता है |
कभी अफसोस नही मुझे की कोई मर्द की मदद नहीं मिली,
खुशगवार एहसास है कि अबला नही,
हर मुकाबला जीत जाना मुझे अच्छा लगता है

बस मर्द ये मान ले औरत कम नही,
किसी पुरूष की भी मदद के लिए हाथ बढ़ाना अच्छा लगता है
हर लम्हा हंस कर जीना,ज़िंदगी गुज़ारना नही..
हंस कर बिताना अच्छा लगता है |

वैवाहिक जीवन में मुकाबला नहीं बल्कि आदर भाव चाहिए.. वरना औरत किसी पुरूष से कम नहीं..वह खुद को,बच्चो को, परिवार को.. यहां तक की पुरूष को भी संभाल सकती है... बस ऐसे जीना मुझे अच्छा लगता है.. आप भी किसी से कम नहीं बस एक छोटी सी कोशिश और नज़रियें की है बात... और याद रहे एक औरत ही पुरूष को जन्म देती है.. पुरूष नही....

वैवाहिक जीवन में मुकाबला नहीं बल्कि.. आदर भाव चाहिए ..
वैवाहिक जीवन में मुकाबला नहीं बल्कि.. आदर भाव चाहिए ..


Priya Batra
(Nagpur)

ईश्वर (God)

ईश्वर के प्रति हमारा नजरिया क्या है ? (What is our view of God?) क्या ईश्वर से माँगना ही धर्म है ? (Is it a religion to ask God?) हम ईश्वर को क्या दे सकते हैं ?  What can we give to God? ईश्वर हमसे क्या चाहता है ?  (What does God want from us? ) कैसे पा सकते हैं हम ईश्वरको ? (How can we find God?)

ईश्वरत्व मानवता के उत्कर्ष के साक्षत्कार का साधन मात्र है | जिसे ईश्वर की अनुभूति हो जाती है उसका हृदय दया, करुणा तथा सेवा भावना से सराबोर हो जाता है | - मैथिलीशरण गुप्त 

⇨ ईश्वर कोई बाह्य सत्य नहीं है | वह तो स्वयं के ही परिष्कार की अन्तिम चेतना अवस्था है | उसे पाने का अर्थ स्वयं वही हो जाने के अतिरिक्त और कुछ नहीं है | - आचार्य रजनीश 

⇨ वास्तविक राम कोई आदमी नहीं है जो कि कहीं अन्यत्र रहता हो और बुलाने पर आजाये  | चूँकि राम कोई और नहीं अपितु निजात्मा है | इसलिए राम नाम रटना नहीं है अपितु निज को जानना है, चूँकि निज का बोध ही असली राम की उपलब्धि है | - आधुनिक वेदव्यास 

⇨ साक्षी स्वरुप आत्मा को ज्ञान की आँखों से अपने मन में ही समझकर देखे | चूँकि साक्षी स्वरुप आत्मा का साक्षात्कार किये बिना संसार का जन्म-मरण रुपी झगड़ा छूट नहीं सकता | - संत कबीर 

⇨ ईश्वर प्रत्येक व्यक्ति को सच और झूठ में एक को चुनने का अवसर देता है | - इमर्सन 

⇨ ईश्वर एक वृत्त है, जिसका केंद्र तो सर्वत्र है, किन्तु वृत्त रेखा कहीं नहीं | - संत आगस्टाइन 

⇨ जो पुरुष स्वयं को शरीर , प्राण, इन्द्रिय और मन नहीं मानकर साक्षीस्वरुप में स्थित एकमात्र शिव रूप परमात्मा ही समझते हैं, उनकी ऐसी निश्चयात्मक बुद्धि ही समाधि कहलाती है | - अन्नपुर्नौप्निषद 

⇨ यदि ईश्वर है तो हमे उसे देखना चाहिए, यदि आत्मा है तो हमे उसकी प्रत्यक्ष अनुभूति कर लेनी चाहिए अन्यथा उन पर विश्वास न करना ही अच्छा है | ढोंगी बनने की अपेक्षा स्पष्ट रूप से नास्तिक बनना अच्छा है | - स्वामी विवेकानन्द

⇨ प्रभु को समर्पित करने योग्य मनुष्य के पास "मैं" के अतिरिक्त और कुछ भी नहीं है | शेष जो भी वह छोड़ता है वह केवल छोड़ने का भ्रम है | क्योंकि वह उसका था ही नहीं | - आचार्य रजनीश 

⇨ क्या ईश्वर है ? ईश्वर ही ईश्वर है - सभी कुछ वही है, लेकिन जो "मैं" से भरे हैं, वे उसे नहीं जान सकते | उसे जानने की पहली शर्त स्वयं को खोना है | - आचार्य रजनीश

⇨ जिसकी पीठ पर परमेश्वर का हाथ हो उसके लिए कुछ भी कठिन नहीं | भगवान जो चाहे कर दे उसका हाथ कौन पकड़ सकता है | - सुदर्शन 

⇨ भगवान् को सभी मनुष्यों के साथ एक समान प्रेम है लेकिन अधिकतर लोगों के चेतना का धुंधलापन उन्हें इस दिव्य प्रेम को देखने से रोकता है | - माता पाण्डिचेरी

⇨ अनुकूलता प्रतिकूलता को मत देखो, जिस प्रभु ने उनको भेजा है, उस प्रभु को देखो और उसी को अपना मानकर प्रसन्न रहो | - स्वामी रामसुख दास 

⇨ ईश्वर कण-कण में है, वह सर्वव्यापी है | इस कथन का आश्रय सिर्फ़ इतना है कि आप ईश्वर को हमेशा मौजूद मानें | - स्वामी शिवानन्द 

⇨ परमात्मा को बाहर मत ढूंढ़ों | परमात्मा कोई आदमी नहीं है, जो तुम्हे बाहर मिल जायेगा | चित्तवृत्ति निर्विशेष होने पर जहाँ होती है और सविषयता से पूर्व जहाँ थी वही परमात्मा है - आधुनिक वेदव्यास 

⇨ मेरे लिए इस बात का महत्व नहीं कि  ईश्वर मेरे पक्ष में है या नहीं | मेरे लिए अधिक महत्वपूर्ण बात यह है कि मैं ईश्वर के पक्ष में रहूँ क्योंकि ईश्वर हमेशा सही होता है | - अब्राहम लिंकन 

⇨ परमात्मा व्यक्ति नहीं, उसका साक्षात्कार नहीं हो सकता | परमात्मा शक्ति है लेकिन शक्ति भी पदार्थगत नहीं है, आत्मगत है, इसलिए उसका पहला अनुभव स्वयं में प्रवेश पर ही होता है | - आचार्य रजनीश

⇨ भगवान् निराकार है और साकार भी | फिर वे इन दोनों अवस्थाओं से परे जो हैं, वे भी हैं | केवल वे ही स्वयं जानते हैं कि वे क्या हैं ? - रामकृष्ण परमहंस 

⇨ भगवान् को समर्पण करने का अर्थ है अपनी तंग सीमाओं का त्याग करके अपने आपको उनके द्वारा आक्रांत होने देना और उनकी लीला का केंद्र बनने देना - माता पाण्डिचेरी 

ईश्वर
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