Sunday, December 9, 2018

हमसे भी तो कोई पूछे ...

हमसे भी तो कोई पूछे
क्या है हमारी अभिलाषा
सब रखते हमारे कांधों पर
अपनी - अपनी अभिलाषा ।

पिता कहें डॉक्टरी पढ़ियो
मल्हम - पट्टी रोगी के करियो
रुपया - पैसा खूब कमईयो, पर्चन पर
लिखकर उल्टी - सीधी तुम भाषा ।
हमसे भी तो कोई पूछे........

मैया कहे वकालत करियो
तारीखान पै तारीख दिलइयो
मुकदमा तुम ही तौ जीतौगे
देकर सच्चो - झूठों उन्हें दिलासा ।
हमसे भी तो कोई पूछे........

भाई - बहिन कहें ऐसो करियो
चार लोग कहें वैसो करियो
मुझको व्यथित - चिन्तित कर
चुटकी, हँसी ठहाकों से करते तमाशा ।
हमसे भी तो कोई पूछे........

न दौलत की चाहत है
न शौहरत की ख्वाहिश मुझको
हिन्दी माँ का बेटा बन जाऊं
बस लिखता रहूँ इनकी परिभाषा ।
हमसे भी तो कोई पूछे........

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 गौरव हिन्दुस्तानी

 गौरव हिन्दुस्तानी

Monday, December 3, 2018

भईया हमसे रूठकर क्यों चले गये तुम ...

भईया हमसे रूठकर क्यों चले गये तुम,
भाभी और छोटे को क्यों ले गये तुम,
स्वर्ग था जो घर, अब वीरान हो गया है,
तुमसे सजा था घर, अब मकान हो गया है ।

मम्मी तुम्हारी याद में सुधबुध खो रहीं हैं,
सीप जैसी आँखों से मोती बिखेर रहीं हैं,
तुम्हारा ही इंतजार करती हैं वो हर पल,
तुम्हारा ही रस्ता उनकी अँखियाँ निहार रहीं हैं ।

पापा का भी हाल कुछ कम नहीं है उनसे,
तुम्हारा ही ज़िक्र अक्सर किया करते हैं बहिन से,
तुम लोग चले आओ सब कुछ यूँ ही छोड़कर,
ऐसा कहते हैं पापा तुम्हारी तस्वीर देखकर ।

बहिन तुम्हारी राह में राखी लिए बैठी है,
बांधेगी पहले बड़े भईया की कलाई में यही हठ कर बैठी है,
भाई दूज का गोला अब तक थाली में सजा है,
तुम्हारे आने का दीपक उसने भी जला रखा है ।

याद आता है मुझको छोटे की शरारत, उसके वो तेवर,
याद आता है मुझको भाभी का खिजाना कहकर अपना देवर,
अब तुम्हारे बिन कोई न रह सकेगा, आ जाओ जल्दी लौटकर
वरना हमारी आँखों से दरिया बहता ही रहेगा ।

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 गौरव हिन्दुस्तानी

 गौरव हिन्दुस्तानी