Friday, November 9, 2018

बन्द करो जलाना वृक्षों को ...

बन्द करो जलाना वृक्षों को
हर साल होली के रूप में
वरना कहीं न होगी हवा-छाँव
यूँ ही जलते रह जाओगे धूप में ।
मत काटो इन्हें कसाइयों की तरह
मत करो इन पर सितम
बेरहमों की तरह
इनमे भी है वो प्यार वो अपनापन
जरा महसूस करके तो देखो
इन्हें अपनों की तरह ।
जब होता है इनको दर्द
इनकी आँखों में भी आँसू होते हैं
इन्सानों की तरह , लेकिन होते हैं
ये वेजुबान इसलिए बह जाते हैं
इनके आँसू पानी की तरह ।
होली जलाना है तो जलाओ
अपने - अपने दिलों में,
करो संकल्प ले जल अपने करों में
न मिटायेंगे वृक्षों को, न उजाड़ेंगे
किसी का आशियाना
दुश्मनों की तरह ।
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 गौरव हिन्दुस्तानी

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Gaurav Hindustani

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