Friday, November 30, 2018

मन के भाव .. (Best Teacher's Day Kavita)

मजबूरियों की जंजीरों ने कैद कर लिया बन्धन में,
वरना जी, ऱोज हम भी जाते पढ़ने अपने कॉलेज में |

नये नये फिर मित्र बनाते ऱोज बैठ बतियाते,
हँसी ठिठोली खूब लगाते जब भी जाते कॉलेज में |

कभी कभी पढ़ लिख लेते जी इतने से काम चलाते,
कैसे होते हैं मेधावी बतलाते जब भी जाते कॉलेज में |

रश्मि मैडम जी किरन ज्ञान की हम प्रकाशपुंज बनजाते,
अज्ञानता के अंधकार  जलाते जब भी जाते कॉलेज में |

प्राची मैडम के प्राचीन सार का नवीन प्रसार करजाते,
शाम सवेरे इनके गुण गाते जी जब भी जाते कॉलेज में |

वेद सर से आसानी से वेदों का ज्ञान पाजाते, अपनी
संस्कृति, सभ्यता के पदचिन्ह बनाते जब भी जाते कॉलेज में |

संजीव सर से लेकर ज्ञान की संजीवन चरित्र अमर कर जाते,
फिर औरो को भी चरित्रता के पाठ पढ़ाते जब भी जाते कॉलेज में |

प्रवीण मैडम हैं इक देवी सी क्या क्या न सिखलाती जी
शीष झुकाते चरणों में सब कुछ पाजाते जब भी जाते कॉलेज में |

नहीं कुछ हाथ तुम्हारे नहीं कुछ भाग्य तुम्हारे गौरव जी
ये सब कैसे पाते जी और कैसे जाते कॉलेज में |

मजबूरियों की जंजीरों ने कैद कर लिया बन्धन में,
वरना जी, ऱोज हम भी जाते पढ़ने अपने कॉलेज में |
.
.
.
.
.
.
.
गौरव हिन्दुस्तानी

teachersdaypoem

Share This
Previous Post
Next Post
Gaurav Hindustani

My name is Gaurav Hindustani. I am web designer by profession, but I am author by heart so Hindustani Kranti is a platform for all Authors and poets who write GOLDEN words and have special stories and poetries. You can send any time your words to me at gauravhindustani115@gmail.com.

0 comments: