Thursday, November 15, 2018

हम और हमारी मस्तियाँ

हम और हमारी मस्तियाँ
जिक्र करती हैं बस्तियाँ ।

कभी पोती कभी साफ की
हमने अपनी अपनी तख्तियाँ ।

इक पल में मेल मिलाप था अपना
और इक पल में होती थी सख्तियां ।

बारिश के पानी में कितनी
बहाई कागज की कश्तियाँ ।

अन्दाज हमारे मँहगे थे
और चीजे सारी थी सस्तियाँ ।

कैसे लोग हँसा करते थे देख
वो अपनी पागल पंतियाँ ।

दिल हमारे साफ थे केवल
मैली थी अपनी दस्तियाँ ।

हम और हमारी मस्तियाँ
जिक्र करती हैं बस्तियाँ ।

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 गौरव हिन्दुस्तानी

#Poem, #Friendship, #BestFriends

हम और हमारी मस्तियाँ

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Gaurav Hindustani

My name is Gaurav Hindustani. I am web designer by profession, but I am author by heart so Hindustani Kranti is a platform for all Authors and poets who write GOLDEN words and have special stories and poetries. You can send any time your words to me at gauravhindustani115@gmail.com.

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