Monday, November 12, 2018

भानु-शशि को निसदिन ढलते देखा

भानु-शशि को निसदिन ढलते देखा,
आरोह-अवरोह तारों को करते देखा,
पर पिता तुम्हारे कदमों को न थमते देखा ।

नंगे पाँवों को धूप में जलते देखा,
तुम्हें शूल पथों पर पल-पल चलते देखा,
पर पिता तुम्हारे कदमों को न थमते देखा ।

पीर पराई पर औषधि मलते देखा,
तुम्हें विषम स्थितियों में दृढ पर्वत सा देखा,
पर पिता तुम्हारे कदमों को न थमते देखा ।

सरल-शान्त बाहर-बाहर से देखा,
अथाह अशांत एक शोर अंतर्मन में देखा,
पर पिता तुम्हारे कदमों को न थमते देखा ।

सुख के सागर में अधीर न होते देखा,
दुःख की पगडण्डी पर तुम्हें संभलते देखा,
पर पिता तुम्हारे कदमों को न थमते देखा ।

घर-गृहस्थी के बोझ को ढोते देखा,
हर रिश्ते को मजबूती की डोर से बांधे  देखा,
पर पिता तुम्हारे कदमों को न थमते देखा ।
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 गौरव हिन्दुस्तानी

#Father, #Love, #Emotions

 गौरव हिन्दुस्तानी



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Gaurav Hindustani

My name is Gaurav Hindustani. I am web designer by profession, but I am author by heart so Hindustani Kranti is a platform for all Authors and poets who write GOLDEN words and have special stories and poetries. You can send any time your words to me at gauravhindustani115@gmail.com.

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