Monday, October 1, 2018

( कशिश )

जितनी तुम में कशिश है ,
उतनी ही तुम भोली हो ,
इक पल में नाक पे गुस्सा है
एक पल में तुम हमजोली हो .

जितनी तुम में कशिश है ,
उतनी ही तुम सीधी हो ,
ये सूरत तुम्हारी चाँद है
ये सीरत तुम्हारी ईदी है .

दिखने में सबके चेहरे खुली किताब से
पड़ने बैठो तो अबूझ पहली हैं,
मत किया करो विश्वास सभी पर ,
अभी तुम बच्ची हो अलबेली हो .

जितनी तुम में कशिश है ...
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गौरव हिन्दुस्तानी

Kashish


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Gaurav Hindustani

My name is Gaurav Hindustani. I am web designer by profession, but I am author by heart so Hindustani Kranti is a platform for all Authors and poets who write GOLDEN words and have special stories and poetries. You can send any time your words to me at gauravhindustani115@gmail.com.

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