Wednesday, October 3, 2018

हम शहर के दीवाने हैं

हम शहर के दीवाने हैं
जो शहर नहीं छोड़ते
लोग न जाने कैसे
अपनी माँ छोड़ देते हैं |

हमें तो लगाव है घर
की हर चीज से
लोग न जाने कैसे
अपना घर छोड़ देते हैं |

हमारे तो छलक जाते हैं आँसू
ग़ैरों को परेशां देखकर
कैसे फिर लोग अपनों के जख्म देखकर
मुँह फ़ेर लेते हैं |

पढ़ने वाले तो अखबार की
हर ख़बर पढ़ते हैं |
लोग न जाने कैसे घरवालों के पढ़ना
ख़त छोड़ देते हैं |
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गौरव हिन्दुस्तानी


ham-shahar-ke-deevane-hain
HAM SHAHAR KE DEEWANE HAIN ...



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Gaurav Hindustani

My name is Gaurav Hindustani. I am web designer by profession, but I am author by heart so Hindustani Kranti is a platform for all Authors and poets who write GOLDEN words and have special stories and poetries. You can send any time your words to me at gauravhindustani115@gmail.com.

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