Saturday, September 22, 2018

शीशे से इश्क़ पे निशान लिए बैठे

शीशे से इश्क़ पे निशान लिए बैठे 
अपने दिल में तेरी पहचान लिए बैठे 

सहरा की ज़मी पर नमी के लिए 
अश्कों से भरा आसमान लिए बैठे 

कुछ टूटा कुछ अधूरा ही सही 
खुद को तड़पाने का सामान लिए बैठे 

दिल रेज़ा रेज़ा,रिसता दर्द फिर भी 
दिल में इश्क़ का अरमान लिए बैठे 

दिल की दीवारों-दरारें जोड़ना तो चाहा 
पर ज़ख़्मों के निशान लिए बैठे 

ना बिकेगी ये बाज़ारी मुहब्बत तेरी
हथेली पर हम मौत का सामान लिए बैठे

दिल के ज़ख़्मों से झांकती है उदासी
लबों पे झूठी मुस्कान लिए बैठे

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आज हर रिश्ता ज़रूरत पर टिका है.. 
या यूं कह लीजिए कि जिम्मेदारियों के नाम पर बली चढ़ा है...... 
ज़रूरत ख़त्म रिश्ता ख़त्म.. 
जैसे.. 
ना जाने वक़्त कब और कितनी करवटें बदलता है
हर करवट एक नया अनुभव कराती है,कभी प्रेम,कभी वादे,कभी अपने,कभी जुदाई,कभी बेवफ़ाई दे जाता है,खुशियां तो दो पल की आनी जानी है,तन्हाईयां तो पल पल में बस जाती है,
एक दरख़्त का बीज जब अंकुर होता है,उसके आने से चेहरों में चमक आ जाती है,हर कोई पानी से सींचना चाहता है,पल पल ख़्याल रखना चाहता है 
आज नही कल ये अंकुर बड़ा होगा फल,फूल,छाया देगा,वक़्त भी अपनी गति से बढ़ता जाता है,एक दिन,वो दिन भी आ जाता है,
हर डाली में फूल खिल जाता है अपने प्रेम की पवन से हर पल दरख़्त फल बरसाता हैं,जब थक जाए गर कोई तो उसकी छाया में राहत पाता है 
कितनी चिड़ियों का रैन बसेरा कहलाती है आज फिर वक़्त ने करवट ली और पतझड़ आया,सब तन्हा छोड़ आए,यूं तो फल फूल न दे पाता पर..
किसी का ईंधन बन जाता,हर दिन एक एक अंग किसी के चूल्हे की अग्नि में झुक जाता,माना बूढ़ा हो गया हूँ पर आज तेरे लिए रोटी बनाऊंगा.
पर एक दिन वो भी ख़त्म हो जाता,हर अंग कटते कटते ठूठ रह जाता.. 
जो कभी किसी को न भाता..हां कभी थक कर कोई राहगीर पल भर के लिए बैठ जाता टूटा सांसों को और तोड़ जाता या फिर कभी ठोकर बन दो बातें और सुन लेता.
क्या ये वो ही अंकुर है जिसमें हर कोई पानी दे जाता था प्रेम से सहलाता था 


Priya Batra
Priya Batra
 
Priya Batra
(Nagpur)
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Gaurav Hindustani

My name is Gaurav Hindustani. I am web designer by profession, but I am author by heart so Hindustani Kranti is a platform for all Authors and poets who write GOLDEN words and have special stories and poetries. You can send any time your words to me at gauravhindustani115@gmail.com.

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