Thursday, September 27, 2018

बीते चारो साल लो भैया..


बीते चारो साल लो भैया
बीते चारो साल
कम्पलीट हुआ बी.टेक ,अब लेकिन
नौकरी का बड़ा बबाल |

फर्स्ट सैम गुजरा था जानने में ,
एक-दुसरे का हाल , और
सेकंड में एम.ई ,ई.सी.
लायी थी भूचाल |
बीते चारो साल लो भैया ........ |

सहम गये थे सबके सब
जानने के अपने परिणाम
बैको की जब झड़ी लगी तो
आधे थे उस पार ,
रोते-रोते फूली अँखियाँ
चेहरे हो गये लाल |
बीते चारो साल लो भैया ........ |

थर्ड – फोर्थ बीता था बड़िया
ये हुआ था  एक कमाल ,
एक – दो की बस बैक लगी थी
बेड़ा हो गया पार |
बीते चारो साल लो भैया ........ |

डा की एल्गो न चली रे कुछ से ,
और कुछ को जावा लगी कमाल ,
आकाश सर ने जब थामी उंगली
तब आई जान में जान |
लय में आये सब अपनी –अपनी
लेकर तीर कमान ,
कर – देंगे बैक की ऐसी – तैसी
ली दिमाग में ठान |
बीते चारो साल लो भैया ........ |

संभल- संभल कर कदम रखा
फिर मिली एक चट्टान ,
एल्गो-पे-एल्गो भरी पड़ी  थी
नाम कम्पाइलर डिजाईन |
अब शैशब सर बने सारथी
ले गये रथ उस पार ,
जब आंखे हम सबने खोली ,
मिली ये चौथी साल |
बीते चारो साल लो भैया ........ |

चन्द्र (राकेश सर ) पडाते पी.ए. हमको
देते सूर्य (रवि सर ) वेब डिजाइनिंग का ज्ञान
अंकुर सर की डांट बनाती
हमारी क्लास को शमसान ,
फिर अमीन सर के  आने से
सब हो जाते खुशहाल |
बीते चारो साल लो भैया ........ |

अब आया अंतिम सेमेस्टर
बेरोजगारी का करता शोर ,
हौले-हौले कदम बढ़ाते ,
बड़ते मंजिल की ओर |
आरिफ़ सर ने जब छोड़ी उंगली ,
घेरता हमको अँधियारा ,
ज्योति मैडम की ज्योति से मन में ,
फिर हुआ नया उजियारा |

सुमित मैडम की बाते सबको
लगती प्यारी-प्यारी ,
पी.डी.पी. के वो गुण सिखलाती ,
हम सबको बारी – बारी |

Are you Getting My Point से
एंट्री होती सक्सेना सर की ,
पार्टी-पार्टी हम सब चिल्लाते ,
क्लास में पाठक सर की |
बिछड़ेंगे ये सब ,छूटेंगे  ये सब ,
नम करता मेरी आँखों को
अक्सर  यही ख्याल |
बीते चारो साल लो भैया ........ |

गौरव हिन्दुस्तानी विनती करता है
दोनों जोड़े कर ,
माफ़ कर  देना मेरी भूलो को
सिस्टर और ब्रोदर |


गौरव हिन्दुस्तानी 

बीते चारो साल लो भैया..

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Gaurav Hindustani

My name is Gaurav Hindustani. I am web designer by profession, but I am author by heart so Hindustani Kranti is a platform for all Authors and poets who write GOLDEN words and have special stories and poetries. You can send any time your words to me at gauravhindustani115@gmail.com.

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